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रिलायंस फाउंडेशन स्कॉलरशिप के नतीजे 5,100 यूजी–पीजी छात्रों का चयन
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० संवाददाता द्वारा ० मुंबई : रिलायंस के संस्थापक एवं अध्यक्ष रहे धीरूभाई अंबानी की 93वीं जयंती पर रिलायंस फाउंडेशन ने शैक्षणिक वर्ष 2025-26 के लिए अपनी अंडरग्रेजुएट (UG) और पोस्टग्रेजुएट (PG) स्कॉलरशिप के परिणाम घोषित कर दिए। इस वर्ष देशभर से 5,000 यूजी और 100 पीजी छात्रों का चयन किया गया है। चयनित यूजी छात्रों को अधिकतम 2 लाख रुपये और पीजी छात्रों को 6 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता प्रदान की जाएगी। यह पहल 2022 में घोषित उस प्रतिबद्धता का हिस्सा है, जिसके तहत रिलायंस फाउंडेशन 10 वर्षों में 50,000 छात्रवृत्तियाँ प्रदान करेगा। अब तक फाउंडेशन 33,471 छात्रवृत्तियाँ दे चुका है। 2025-26 बैच के लिए चयन प्रक्रिया बेहद प्रतिस्पर्धी रही। 1.25 लाख से अधिक आवेदनों में से चुने गए 5,100 छात्र 28 राज्यों और 4 केंद्र शासित प्रदेशों से हैं और 15,544 शिक्षण संस्थानों का प्रतिनिधित्व करते हैं, जो इस कार्यक्रम की अखिल भारतीय पहुंच को दर्शाता है। रिलायंस फाउंडेशन के प्रवक्ता ने कहा भारत के युवाओं में असाधारण प्रतिभा और संकल्प है। हमारी छात्रवृत्तियाँ केवल वित्तीय सहायता तक सीमित नहीं ...
सांभर अब ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन के रूप में उभर रहा है : उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी
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० आशा पटेल ० जयपुर । उपमुख्यमंत्री तथा पर्यटन मंत्री दिया कुमारी के मुख्य आतिथ्य में तथा पूर्व विधायक निर्मल कुमावत, अतिरिक्त जिला कलेक्टर जयपुर, आशीष कुमार, सांभर एसडीएम, ऋषि राज कपिल, पर्यटन विभाग के उपनिदेशक उपेन्द्र सिंह शेखावत की उपस्थिति में राजस्थान पर्यटन विभाग एवं जयपुर जिला प्रशासन तथा सांभर नगर पालिका के सयुंक्त तत्वाधान में 27 से 31 दिसम्बर तक पांच दिवसीय सांभर महोत्सव का शुभारम्भ किया गया। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी के द्वारा क्राफ्ट एवं फूड स्टॉल का भ्रमण किया तथा कलाकार एवं हस्तशिल्पियों का उत्साह वर्धन किया। दिया कुमारी ने इस अवसर पर डाक कार्ड (Postal Cards) का विमोचन भी किया। उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने सांभर फेस्टिवल की देश-विदेश से आए पर्यटकों का स्वागत करते हुए कहा कि पिछले वर्ष की तुलना में इस वर्ष फेस्टिवल का आयोजन और भी बड़े स्तर पर किया जा रहा है तथा अगले वर्ष यह और भव्य रूप से आयोजित किया जाएगा। उन्होंने कहा कि सांभर फेस्टिवल ने अब वैश्विक पर्यटन मंच पर अपनी अलग पहचान बना ली है। सांभर अब ग्लोबल टूरिस्ट डेस्टिनेशन बनता जा रहा है। दिया कुमारी ने कहा कि सांभर...
डॉ.नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ का लोकार्पण English Lete...
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2026 में KG बेसिन पर RIL–सरकार का 247 मिलियन डॉलर विवाद सुलझने की उम्मीद
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० संवाददाता द्वारा ० नई दिल्ली : KG-D6 गैस ब्लॉक को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और भारत सरकार के बीच चल रहा 247 मिलियन डॉलर का विवाद वर्ष 2026 में सुलझ सकता है। यह मामला इस समय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के अंतिम चरण में है। रिलायंस वर्ष 2002 से KG-D6 ब्लॉक की ऑपरेटर है। उत्पादन साझेदारी अनुबंध (PSC) के तहत गठित मैनेजमेंट कमेटी, जिसमें सरकार के दो प्रतिनिधि शामिल हैं, हर फैसले पर वीटो अधिकार रखती है। कमेटी की पूर्व स्वीकृति के बिना न तो कोई खर्च किया जा सकता है और न ही कोई निर्णय लागू होता है। रिलायंस के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने इन सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया है और अब तक सरकार ने कंपनी पर किसी अनियमितता का आरोप भी नहीं लगाया है। इसके बावजूद, खर्च हो जाने के बाद कुछ लागतों को अमान्य ठहराया जाना अनुबंध की भावना के विपरीत माना जा रहा है। यह मामला लागत-वसूली को लेकर रिलायंस और सरकार के बीच चल रहा है. सरकार का कहना है कि रिलायंस द्वारा दिखाए गए कुछ खर्च लागत-वसूली के दायरे में नहीं आते, इसलिए अतिरिक्त प्रॉफिट पेट्रोलियम की मांग की गई है। वहीं, NELP नीति के तहत हुए...
अरावली को खण्ड-खण्ड करने की साजिश ,अस्तित्व का मंडरा रहा संकट
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० ज्ञानेन्द्र रावत ० आज अरावली पर सुप्रीम कोर्ट की परिभाषा के अनुसार अरावली पर्वत वह भू आवृत्ति है जिसकी ऊंचाई उसके आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। अरावली पर्वत माला ऐसे दो या दो से अधिक पहाड़ियों का समूह है, जो एक दूसरे से 500 मीटर की दूरी से अधिक हो। सुप्रीम कोर्ट की इस नयी परिभाषा से देश में खासकर अरावली पर्वत माला अंतर्गत आने वाले राज्यों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, आंदोलन हो रहे हैं, शहर-कस्बों तक में, बैठकों और स्कूल-कालेजों में जन जागरण के माध्यम से छात्रों व आमजन को अरावली पर आये खतरे के बारे में सचेत किया जा रहा है। यह सब इतना हो-हल्ला और हाहाकार इसलिए है कि अरावली पर्वत माला आज खतरे में है। दरअसल उत्तर भारत की सबसे पुरानी इस पर्वतमाला पर आज अपने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। जानकारों का मानना है कि आज 670 मिलियन साल पुराने इतिहास को जमींदोज करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके परिप्रेक्ष्य में सर्वोच्च न्यायालय के 20 नवम्बर के आदेश पर ध्यान दें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि अगर यह लागू हो गया तो यह निश्चित है कि अरावली तो हरियाली विहीन हो ही जायेगी, ...