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उत्तराखंड : द्वारीखाल गुलदार के हमले में महिला की मौत // Uttarakhand Gul...

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गाँधी,जिन्ना,अम्बेडकर औऱ आजादी की किताब पर गोलमेज संवाद

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० आशा पटेल ०  जयपुर, भारत की आज़ादी की कहानी के तीन प्रमुख पात्रों गांधी, जिन्ना और अंबेडकर को एक बार फिर नई दृष्टि से देखते हुए आई पत्रकार प्रतुल सिन्हा की पुस्तक" गांधी जिन्ना अंबेडकर और आजादी" पर राजस्थान प्रौढ़ शिक्षण समिति में गोलमेज संवाद आयोजित किया गया। साहित्यगार द्वारा प्रकाशित प्रतुल सिन्हा की किताब "गांधी, जिन्ना, आंबेडकर और आजादी" पर चर्चा में राजस्थान विधान सभा के पूर्व अध्यक्ष डॉ.सी. पी. जोशी ने कहा कि महात्मा गांधी ने देश की आजादी के लिए आम आदमी को मोबिलाइज किया. उन्होंने दक्षिण अफ्रीका के साथ ही देश भर में घूम-घूम कर यह महसूस किया की अंग्रेजों को कैसे हराया जा सकता है और उसी के अनुरूप उन्होंने सत्य अहिंसा और सत्याग्रह जैसे हथियारों का उपयोग किया . पूर्व मंत्री डॉ.बी. डी. कल्ला ने कहा कि इस शोधपरक पुस्तक में इतिहास को नए नजरिए से प्रदर्शित किया गया है.महात्मा गांधी ने दक्षिण अफ्रीका में भारतीयों को वोट का अधिकार दिलाया और उन्होंने देश में वैज्ञानिक रूप से कार्य कर आजादी दिलाई . विधानसभा के मुख्य सचेतक जोगेश्वर गर्ग ने पुस्तक का विश्लेषण करते हुए कहा...

गंगा : एक दिव्य स्वरूप‘‘ पुस्तक का लोकार्पण

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० आशा पटेल ०  जयपुर। राजस्थान इंटरनेशनल सेंटर में ‘गंगाः एक दिव्य स्वरूप’ नामक पुस्तक का लोकार्पण समारोह हुआ। यह अवसर भावनात्मक और आध्यात्मिक यात्रा का प्रतीक बना, जिसमें कमला -गिरीश पोद्दार ने अपने पितृ पुरुष स्व. मिर्जामल पोद्दार, स्व. प्रभासचन्द्र पोद्दार एवं स्व. श्रीमती राजेश्वरी देवी पोद्दार को इस पुस्तक के माध्यम से श्रद्धांजलि अर्पित की। इस कार्यक्रम का आयोजन वीण् केण् पोद्दार फॉउंडेशन के अंतर्गत किया गया , वीण् केण पोद्दार फाउंडेशन के माध्यम से आर्ट कल्चर और लिटरेचर से जुड़े विभिन्न कार्यक्रमों का आयोजन करवाया जाता है और फाउंडेशन मैरिट में आये छात्रों को स्कॉलरशिप भी देता है। पोद्दार परिवार की कुलदेवी मां गंगा को समर्पित यह पुस्तक न केवल गंगा के दिव्य स्वरूप, सौंदर्य और महत्व का वर्णन करती है, बल्कि एक गहन आध्यात्मिक अनुभव भी प्रस्तुत करती है। पुस्तक एक महत्वपूर्ण नैतिक संदेश भी देती है कि नदियाँ केवल जलधाराएं नहीं, बल्कि जीवन की धारा हैं, जिन्हें स्वच्छ, सुरक्षित और सम्मानित रखना हम सभी का सामूहिक उत्तरदायित्व है। इस अवसर पर उज्जैन से आए लाइफ मैनेजमेंट गुरु पंडित विजय...

राजस्थान टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन के बने सीए रतन गोयल अध्यक्ष,जीपी गुप्ता महासचिव

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० आशा पटेल ०  जयपुर | राजस्थान टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन की नई कार्यकारिणी ( 2025-27) के लिए सर्वसम्मति से सीए रतन गोयल को अध्यक्ष एवं सीए जी. पी. गुप्ता को महासचिव चुना गया। इस कार्यकारिणी में प्रदेश के पाँच संभागों- जयपुर, बीकानेर, जोधपुर, कोटा और उदयपुर-से उपाध्यक्ष एवं सचिव भी निर्वाचित किए गए , जो क्षेत्रीय स्तर पर संगठन की गतिविधियों को सशक्त बनाने का कार्य करेंगे। इसके अतिरिक्त, 64 सदस्य कार्यकारिणी के रूप में निर्वाचित हुए हैं तथा 14 सदस्यों को कार्यकारिणी में सह- नामांकित किया गया, जिससे संगठनात्मक प्रतिनिधित्व और अधिक समावेशी एवं प्रभावशाली बन गया है। नव-निर्वाचित अध्यक्ष सीए रतन गोयल एक अनुभवी एवं सक्रिय कर सलाहकार हैं, जिनका संगठनात्मक योगदान उल्लेखनीय रहा है। वे वर्ष 2015-16 में टैक्स कंसल्टेंट्स एसोसिएशन जयपुर के अध्यक्ष रह चुके हैं, इसके अतिरिक्त 1999 में ICAI जयपुर शाखा के सचिव तथा 2023-25 के कार्यकाल में RTCA के महासचिव के रूप में भी अपनी सेवाएं दे चुके हैं। उनकी नेतृत्व क्षमता और कार्य के प्रति समर्पण संगठन को एक नई दिशा देने में सहायक सिद्ध होगा। महासचिव प...

अनहद अहद' में डॉ. मालती बसंत और डॉ. आबिद अम्बर का सम्मान

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० योगेश भट्ट ०  भोपाल । सुप्रसिद्ध बाल साहित्यकार डॉ. मालती बसन्त को 'अहद प्रकाश बाल साहित्य गौरव सम्मान 2025' व प्रख्यात ग़ज़लकार डॉ. अम्बर आबिद को 'अहद प्रकाश ग़ज़ल गौरव सम्मान 2025' से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि लघुकथा शोध केन्द्र की निदेशक कान्ता रॉय थीं और अध्यक्षता निराला सृजन पीठ की निदेशक डॉ. साधना बलवटे ने की। कार्यक्रम में स्व.अहद प्रकाश की धर्मपत्नी फ़रज़ाना अहद मौजूद थीं। मुख्य अतिथि कान्ता रॉय ने कहा कि 'अहद जी का बाल सुलभ मन सदैव सभी को जोड़ लेता रहा, आज उनकी स्मृतियों को ताज़ा करने का मौका मिला, जो निःसंदेह गरिमामय है।'अध्यक्षता कर रही डॉ. साधना बलवटे ने कहा कि 'बाल मन के कुशल चितेरे रहे अहद जी का जुड़ाव हर उम्र के लोगों के साथ सहज रहता था। बात मातृभाषा की है तो हमें अपनी मातृभाषा के प्रति जागरुक और सजग रहना चाहिए।' प्रोफेसर संजय द्विवेदी का कहना है कि बाल साहित्य का लेखन 'परकाया प्रवेश' जैसा है। संवेदना, वात्सल्य और मासूमियत से ही बच्चों को संबोधित किया जा सकता है,अहद जी ऐसे ही रचनाकार थे। वो बहुत बेहतर इंसान थे, इसलिए...

राजस्थान में डेढ़ वर्ष के भाजपा शासन से जनता त्रस्त हो चुकी है : डोटासरा

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० संवाददाता द्वारा ०  जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी मुख्यालय जयपुर पर दूदू विधानसभा क्षेत्र में संगठन सशक्तिकरण अभियान के तहत मंडल एवं ब्लॉक कांग्रेस कमेटियों के गठन तथा क्षेत्र में हाल ही में हुए पंचायत उप चुनाव में पार्टी को मिली जीत पर पूर्व विधायक बाबू लाल नागर के नेतृत्व में बड़ी संख्या में स्थानीय कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने प्रदेश अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा का सम्मान किया एवं आभार प्रकट किया। इस अवसर पर मीडिया को संबोधित करते हुए प्रदेश अध्यक्ष डोटासरा ने कहा कि राजस्थान में डेढ़ वर्ष के भाजपा शासन से जनता त्रस्त हो चुकी है  प्रदेश में सरकार नाम की चीज नजर नहीं आती और भाजपा शासन में जनप्रतिनिधियों तथा मुख्यमंत्री की कोई भूमिका नजर नहीं आ रही है। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार चरम पर है कानून व्यवस्था चरमरा गई है किसानों के लिए बुवाई का समय है लेकिन खाद बीज मिल नहीं रहा और कृषि मंत्री पहले कह रहे थे कि पूरे देश में नकली खाद और नकली बीज मिल रहा है अब कह रहे हैं कि यह सब गुजरात से आ रहा है जो की भारत सरकार एवं डबल इंजन की सरकार पर एक बेहद गंभीर आरोप है। उन्होंने कहा कि ...

पुस्तक : "एकांतवास में ज़िंदगी" संवेदनशील यथार्थवाद की अवधारणा से मानवता और कुरूपता का यथार्थ दर्शन

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□  समीक्षक : मनीषा खटाटे  □ पुस्तक "एकांतवास में ज़िंदगी"   □ लेखक : अशोक लव □ मूल्य : 180 रुपये  □ द्वितीय संस्करण 2024  □ प्रकाशक : सर्व भाषा ट्रस्ट , राजा पुरी मेन रोड ,नयी दिल्ली । संवेदनशील यथार्थवाद (Sensitive Realism) को मानवीय भावजगत और यथार्थ को आत्मबोध और करुणाबोध की दृष्टि से परिभाषित किया जा सकता है। इस अवधारणा में साहित्यिक अभिव्यक्ति को संवेदनशील चेतना के स्वरूप में आकृतिबद्ध किया जाता है या जीवन की यथार्थ स्तिथियों को पीड़ा, द्वंद्व, वेदना, कुरूपता, आंतरिक संवेदनाओं, भावनात्मक अंतर्विरोधों , अच्छाई- बुराई के संदर्भ में कथावस्तु की संरचना में , मानवीय भावजगत के आधार पर विकसित किया जाता है। संवेदनशील यथार्थवाद में आत्मबोध के आयाम से यथार्थ को देखने की विशिष्टता और स्पष्टता रहती है तथा संवेदनशीलता और करुणाबोध की दृष्टि से यथार्थ का कठोरता की धार पर विश्लेषण और आकलन करके कथासंसार रचा जाता है। जीवन का यथार्थ खोजना हो तो मानवीय संवेदनाओं में खोजना चाहिए। यही आधार है संवेदनशील यथार्थ का। अस्तित्ववाद (Existentialism) और यथार्थवाद (Realism) समकालीन कथात्मक स...