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डॉ.नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ का लोकार्पण English Lete...

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Jaipur : अरावली का भविष्य असुरक्षित Sachin Pilot Says

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2026 में KG बेसिन पर RIL–सरकार का 247 मिलियन डॉलर विवाद सुलझने की उम्मीद

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० संवाददाता द्वारा ०  नई दिल्ली : KG-D6 गैस ब्लॉक को लेकर रिलायंस इंडस्ट्रीज (RIL) और भारत सरकार के बीच चल रहा 247 मिलियन डॉलर का विवाद वर्ष 2026 में सुलझ सकता है। यह मामला इस समय अंतरराष्ट्रीय मध्यस्थता के अंतिम चरण में है। रिलायंस वर्ष 2002 से KG-D6 ब्लॉक की ऑपरेटर है। उत्पादन साझेदारी अनुबंध (PSC) के तहत गठित मैनेजमेंट कमेटी, जिसमें सरकार के दो प्रतिनिधि शामिल हैं, हर फैसले पर वीटो अधिकार रखती है।  कमेटी की पूर्व स्वीकृति के बिना न तो कोई खर्च किया जा सकता है और न ही कोई निर्णय लागू होता है। रिलायंस के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने इन सभी प्रक्रियाओं का पूरी तरह पालन किया है और अब तक सरकार ने कंपनी पर किसी अनियमितता का आरोप भी नहीं लगाया है। इसके बावजूद, खर्च हो जाने के बाद कुछ लागतों को अमान्य ठहराया जाना अनुबंध की भावना के विपरीत माना जा रहा है। यह मामला लागत-वसूली को लेकर रिलायंस और सरकार के बीच चल रहा है. सरकार का कहना है कि रिलायंस द्वारा दिखाए गए कुछ खर्च लागत-वसूली के दायरे में नहीं आते, इसलिए अतिरिक्त प्रॉफिट पेट्रोलियम की मांग की गई है। वहीं, NELP नीति के तहत हुए...

अरावली को खण्ड-खण्ड करने की साजिश ,अस्तित्व का मंडरा रहा संकट

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० ज्ञानेन्द्र रावत ०  आज अरावली पर सुप्रीम कोर्ट की परिभाषा के अनुसार अरावली पर्वत वह भू आवृत्ति है जिसकी ऊंचाई उसके आसपास के भूभाग से कम से कम 100 मीटर अधिक हो। अरावली पर्वत माला ऐसे दो या दो से अधिक पहाड़ियों का समूह है, जो एक दूसरे से 500 मीटर की दूरी से अधिक हो। सुप्रीम कोर्ट की इस नयी परिभाषा से देश में खासकर अरावली पर्वत माला अंतर्गत आने वाले राज्यों में जगह-जगह प्रदर्शन हो रहे हैं, आंदोलन हो रहे हैं, शहर-कस्बों तक में, बैठकों और स्कूल-कालेजों में जन जागरण के माध्यम से छात्रों व आमजन को अरावली पर आये खतरे के बारे में सचेत किया जा रहा है।  यह सब इतना हो-हल्ला और हाहाकार इसलिए है कि अरावली पर्वत माला आज खतरे में है। दरअसल उत्तर भारत की सबसे पुरानी इस पर्वतमाला पर आज अपने अस्तित्व का संकट मंडरा रहा है। जानकारों का मानना है कि आज 670 मिलियन साल पुराने इतिहास को जमींदोज करने का प्रयास किया जा रहा है। इसके परिप्रेक्ष्य में सर्वोच्च न्यायालय के 20 नवम्बर के आदेश पर ध्यान दें तो यह स्पष्ट हो जाता है कि अगर यह लागू हो गया तो यह निश्चित है कि अरावली तो हरियाली विहीन हो ही जायेगी, ...

डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ अंग्रेजी रूपान्तरण का लोकार्पण

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० आशा पटेल ०  जयपुर। जयपुर में जवाहर नगर, सेक्टर-5, स्थित विवेकानन्द विद्या निकेतन उच्च माध्यमिक विद्यालय में स्वामी विवेकानन्द केन्द्र के तत्वावधान में कीर्ति शेष स्वतंत्रता सेनानी और सुप्रसिद्ध कवयित्री सुभद्रा कुमारी चौहान की ‘खूब लड़ी मर्दानी वह तो झांसी वाली रानी थी’ व अन्य चयनित कविताओं का अंग्रेजी रूपान्तरण ‘खूब लड़ी मर्दानी’ शीर्षक से केन्द्र के अध्यक्ष और ख्यातनाम साहित्यकार, विद्वान व कवि डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ द्वारा प्रणीत व सद्यः प्रकाशित पुस्तक का लोकार्पण हुआ। इस अवसर पर विवेकानन्द केन्द्र के महामंत्री व विद्यालय के निदेशक किशन मित्तल द्वारा मंचासीन अतिथियों, पुस्तक के लेखक डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’, जोधपुर विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो. प्रवीण चन्द्र त्रिवेदी, एम.डी.ए. के निदेशक व प्रसिद्ध मोटीवेटर प्रो. रमेश के. अरोरा, केन्द्र के उपाध्यक्ष विष्णु प्रकाश बड़ाया तथा रिटायर्ड ले. जनरल डॉ. शिवराम मेहता का स्वागत किया गया। इस अवसर पर विद्यालय की छात्राओं द्वारा सुमधुर वाणी में ‘हे ज्योति पुंज तुमको नमन्’ प्रार्थना गीत की प्रस्तुति की गई। लोकार्पित पुस्तक के इस सा...

अरावली का भविष्य असुरक्षित,सरकार का रवैया भ्रामक : पायलट

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० आशा पटेल ०  जयपुर। कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव एवं प्रदेश के पूर्व उप मुख्यमंत्री सचिन पायलट ने कहा कि राजस्थान सहित गुजरात, हरियाणा एवं दिल्ली में जो अरावली पर्वत श्रृंखला स्थित है यह मात्र पहाड़ों का समूह नहीं है, यह उत्तर भारत के अधिकांश क्षेत्र को सुरक्षा प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि अरावली पर्वतश्रृंखला पूरे पर्यावरण में लाखों लोगों के लिए एक सुरक्षा कवच बनकर खड़ी हुई है। पायलट ने जयपुर में प्रदेश एन.एस.यू.आई. द्वारा आयोजित अरावली बचाओ पदयात्रा को सम्बोधित करते हुए कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि ऐसी क्या मजबूरियां थी और क्या कारण थे जिनके चलते हजारों साल पुरानी यह पर्वतमाला जो आने वाली अनेकों पीढ़ियों की सुरक्षा प्रदान करेगा, उसे विनाश की ओर ढकेला जा रहा है।  उन्होंने कहा कि भारतीय वन सर्वेक्षण (एफ.एस.आई.) की रिपोर्ट के अनुसार 1,18,000 पहाड़िया 100 मीटर से नीचे है तथा मात्र 1048 पहाड़ियों की 100 मीटर से ऊंची है। ऐसे में केन्द्र सरकार ने माननीय सर्वोच्च न्यायालय में जो 100 मीटर से ऊंची स्थलाकृतियों को पहाड़ी मानने की नई परिभाषा प्रस्तुत की है, उससे 90 से 95 प्रतिशत...

रिदम ऑफ यूनिवर्स’ संगीत-ध्यान से जुड़ा मानसिक स्वास्थ्य का वैश्विक संदेश

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० आनंद चौधरी ०  नई दिल्ली। तनाव, डिजिटल ओवरलोड और भावनात्मक थकान के इस युग में मानसिक स्वास्थ्य को केंद्र में रखकर आयोजित शिवयोग का कार्यक्रम ‘रिदम ऑफ यूनिवर्स’ दिल्ली स्थित यशोभूमि, द्वारका में सम्पन्न हुआ। शिवयोग मास्टर ईशान‌ शिवानंद के सानिध्य में यह आयोजन आध्यात्मिक चेतना, संगीत और मानसिक एवं भावनात्मक स्वास्थ्य के संतुलन के अद्भुत संगम का साक्षी बना।  इस कार्यक्रम में भारत सहित 15 देशों से आए लगभग 6000 साधकों ने एक साथ भजन, ध्यान और लयबद्ध संगीत के माध्यम से सामूहिक मानसिक शांति और आनंद का अनुभव किया।\ प्राचीन भारतीय शिवयोग परंपरा से प्रेरित यह आयोजन पारंपरिक भजन संध्या के एक उन्नत और वैज्ञानिक स्वरूप के रूप में सामने आया, जहां चयनित ध्वनि-आवृत्तियों, गहन साउंडस्केप और सजग ध्यान के माध्यम से प्रतिभागियों ने गहरे मानसिक विश्राम और भावनात्मक संतुलन का अनुभव किया। सामूहिक जप और लयबद्ध संगीत ने उपस्थित साधकों में मानसिक दृढ़ता और आंतरिक शांति का संचार किया। इस अवसर पर डॉ. ईशान शिवानंद ने कहा कि भारतीय सनातन परंपरा में संगीत और ध्यान को मानसिक स्वास्थ्य का सशक्त माध्यम माना गय...