" स्वर मौन के "इस पुस्तक की विधा को जानने के लिए जरूरी हैं ....
० साहित्य संपादक ० हिंदी साहित्य में एक स्थापित और चर्चित लेखिका सुषमा भंडारी की पुस्तक " स्वर मौन के " से कुछ पंक्तियां प्रस्तुत हैं जो इस पुस्तक की विधा को जानने के लिए जरूरी हैं आज से हम इस पुस्तक की सामग्री आप के समक्ष प्रस्तुत कर रहे हैं । हाइकु मूलतः जापानी साहित्य की प्रमुख विधा है । आज हाइकु जापानी साहित्य की सीमाओं को लांघकर विश्व साहित्य की निधि बन चुका है । हाइकु चरम क्षण की कविता है ,इस क्षण की जो गूंज हमारी चेतना में उभरती है। हाइकु कविता को भारत में लाने का श्रेय कविवर रवीन्द्रनाथ ठाकुर को जाता है । भारतीय भाषाओं में रविन्द्र नाथ ठाकुर ने जापान यात्रा से लौटने के पश्चात 1919 में "जापानी यात्री" में हाइकु की चर्चा करते हुए बंगला में दो कविताओं के अनुवाद प्रस्तुत किए । हाइकु में " पांच - सात - पांच" का अनुशासन रखना जरूरी है। आधे वर्ण की आवृत्ति चाहे बार - बार , महत्वपूर्ण होने के बावजूद भी गिनती में शामिल नहीं होता जैसे - स्नेह मिले तो ये शब्द पुष्प यूँ ही खिल जायेंगे । इसमें आधे अक्षर महत्वपूर्ण हैं पढ़े भी जा रहे हैं मगर गिनती में शामिल ...