62 वें महाशिवरात्रि संगीत सम्मेलन का आयोजन
० योगेश भट्ट ०
नयी दिल्ली : दिल्ली के त्रिवेणी कला सभागार में 62 वें महाशिवरात्रि संगीत सम्मेलन का आयोजन किया गया इसमें पं मोर मुकुट केडिया और मनोज केडिया ने राग देस में सितार सरोद की जुगलबंदी से ऐसा जादू बिखेरा की सभी श्रोता मंत्रमुग्ध हो गए। इनके साथ तबले पर संगति पं. प्रभाकर पांडेय ने की। कार्यक्रम की शुरुआत भगवान् के सामने दीप प्रज्वालित और फूल अर्पित कर के की गयी। वेदांश मोहन और शुभम सरकार ने गायन में राग जोग और स्वर सागर की जुगलबंदी प्रस्तुत की।
इस जुगलबंदी में पंडित देवेंद्र वर्मा ने हारमोनियम पर और प्रणय रंजन ने तबले पर मनमोहक संगत की पंडित देवेंद्र वर्मा जी को स्वर्गीय पंडित जगदीश मोहन सम्मान से एवं बाकि सभी कलाकारों को स्वरश्री सम्मान से सम्मानित किया गया। कार्यक्रम में और भी कई गणमान्य लोगों की उपस्थिति ने कार्यक्रम की शोभा बढ़ाई। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि छन्दा सहजवानी और संदीप सहजवानी विशिष्ट अतिथि ध्रुव टुटेजा एवं पंडित विजयशंकर मिश्रा ने अपनी उपस्तिथि से कार्यक्रम की गरिमा बढ़ाई इनके अलावा कार्यक्रम में रोटरी क्लब संस्था की ओर से आये प्रमोद धवन एवं बाकि में पं विजयशंकर मिश्रा, पं ज्ञानेंद्र शर्मा, पंडित हरिओम शर्मा, पंडित हरिदत्त शर्मा,
अंकुश अनामी, मुकेश सिंह, श्रीमती डॉक्टर रागिनी प्रताप, एस पी शर्मा, उस्ताद असगर हुसैन, श्री पी. के. भटनागर, श्रीमती मधुरलता भटनागर, योगेश भट्ट, राजीव जॉली, कृषाँक गोमती, पंडित सुरेश गंधर्व, उस्ताद अकरम खान,शुभम गौर, संस्था के सेक्रेटरी दीपक शर्मा और नीरा शर्मा भी मौजूद रहे और कार्यक्रम के स्पोंसर्स जय भारत संस्था, रोटरी क्लब नई दिल्ली, WDF, जे के टायर, हिन्दुस्तान चाय की भी भागेदारी रही. कार्यक्रम में स्वाति शर्मा ने मंच के सञ्चालन में संपूर्ण योगदान दिया
सरगम मंदिर संस्था पिछले 61 वर्षों से निरंतर महाशिवरात्रि संगीत सम्मेलन आयोजित करती आ रही है। इसके संस्थापक पं. जगदीश मोहन स्वयं किराना घराने के अग्रणी गायकों में से थे। उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित कलाकरों को इस मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर प्रदान किया और उनके अनेक शिष्य देश-विदेशों में संगीत का प्रचार प्रसार कर रहे हैं
सरगम मंदिर संस्था पिछले 61 वर्षों से निरंतर महाशिवरात्रि संगीत सम्मेलन आयोजित करती आ रही है। इसके संस्थापक पं. जगदीश मोहन स्वयं किराना घराने के अग्रणी गायकों में से थे। उन्होंने अनेक प्रतिष्ठित कलाकरों को इस मंच पर प्रस्तुति देने का अवसर प्रदान किया और उनके अनेक शिष्य देश-विदेशों में संगीत का प्रचार प्रसार कर रहे हैं
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