जे डी बिरला इंस्टीट्यूट के स्कूल ऑफ कॉमर्स ने जेन जी बजट डिबेट का आयोजन किया

० पूजा शर्मा ० 
कोलकाता : कोलकाता के शैक्षणिक परिदृश्य में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर जुड़ा, जब जे डी बिरला इंस्टीट्यूट के स्कूल ऑफ कॉमर्स ने विद्या मंदिर सोसाइटी ऑडिटोरियम में “रियलिटी चेक – जेन जी के नजरिए से भारत के बजट 2026–27 को फिर से देखना” शीर्षक से एक कार्यक्रम का आयोजन किया।
 अपनी तरह के इस आयोजन ने एक सशक्त मंच प्रदान किया, जहाँ विभिन्न कॉलेजों के विद्यार्थियों ने भारत के भविष्य के सक्रिय हितधारकों के रूप में केंद्रीय बजट 2026–27 का विश्लेषण किया और उस पर अपने विचार रखे।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण एक ऊर्जावान टीम-आधारित वाद-विवाद प्रतियोगिता रही, जिसका प्रस्ताव था, “हाउस की राय है कि भारत का यूनियन बजट 2026 अधिकतम रूप से जनरेशन जेड के हितों को पूरा करता है। सेंट जेवियर्स कॉलेज (ऑटोनॉमस), गोयनका कॉलेज ऑफ कॉमर्स एंड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, जादवपुर विश्वविद्यालय, इआईसीएएसए, सिस्टर निवेदिता विश्वविद्यालय, इंस्टीट्यूट ऑफ बिजनेस मैनेजमेंट और जे डी बिरला इंस्टीट्यूट सहित कोलकाता के प्रमुख संस्थानों ने इस संवाद में सक्रिय भागीदारी निभाई।
वाद-विवाद विश्लेषण रोजगार सृजन, स्टार्ट-अप प्रोत्साहन, डिजिटल अवसंरचना, कौशल विकास, कर-प्रणाली, जीवन-यापन की लागत तथा युवा भारत के दीर्घकालिक आर्थिक रोडमैप जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर केंद्रित रहा। प्रतिभागियों ने तथ्यों और आंकड़ों पर आधारित तर्कों के साथ अपनी तैयारी, विश्लेषण क्षमता और दृष्टिकोण का प्रभावशाली प्रदर्शन किया।
जे डी बिरला इंस्टीट्यूट के निदेशक ने कहा कि कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बजट के आंकड़ों का विश्लेषण करना नहीं था, बल्कि यह समझना भी था कि जेन जी के लिए बजट कैसा होना चाहिए और उनकी आकांक्षाओं को किस प्रकार प्रतिबिंबित करता है।  सत्र का संचालन विशलिस्ट कैपिटल के मैनेजिंग पार्टनर नीलांजन दे ने किया। निर्णायक मंडल में एफसीए ईशान तुलसियान, सीए गगन केडिया और डॉ. समीप बरुआ शामिल रहे।
कार्यक्रम की उपलब्धि वाद-विवाद में कृत्रिम बुद्धिमत्ता (ए आई) का समावेशन रहा। जे डी बिरला इंस्टीट्यूट के एक छात्र द्वारा विशेष रूप से विकसित एवं अनुकूलित ए आई पोर्टल ने एक अतिरिक्त निर्णायक एवं विशेषज्ञ टिप्पणीकार के रूप में कार्य किया और विश्लेषणात्मक टिप्पणियाँ प्रदान कीं। यह पहल संस्था की नवाचार-प्रवृत्ति, शैक्षणिक कठोरता और भविष्य-केंद्रित शिक्षण दृष्टिकोण को दर्शाती है।

प्रस्ताव के समर्थन में बोलने वाली विजेता टीम को ₹20,000 की पुरस्कार राशि प्रदान की गई। एम.डी. शाहिद दयार को ‘सर्वश्रेष्ठ वक्ता’ का पुरस्कार प्रदान किया गया, जबकि हर्ष कुमार अग्रवाल को इसी श्रेणी में उप विजेता घोषित किया गया।

“रियलिटी चेक” केवल एक वाद-विवाद प्रतियोगिता नहीं, बल्कि कोलकाता के शैक्षणिक वातावरण में एक सार्थक पहल के रूप में उभरा। इस आयोजन के माध्यम से जे डी बिरला इंस्टीट्यूट का स्कूल ऑफ कॉमर्स राष्ट्रीय नीतियों और भविष्य की दिशा पर केंद्रित चर्चाओं में जेन जी की सक्रिय भागीदारी सुनिश्चित करने में अग्रणी भूमिका निभा रहा है।

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