गुजरात और राजस्थान के 22 जिलों से अरावली संरक्षण यात्रा जयपुर पहुँची
० आशा पटेल ०
जयपुर । चार राज्यों में फैली 700 किमी लंबी अरावली श्रृंखला को पार करती हुई अरावली संरक्षण यात्रा जयपुर पहुँची। अरावली विरासत जन अभियान की सदस्य नीलम आहलूवालिया ने कहा “हमने यह यात्रा 24 जनवरी को गुजरात के अरावली जिले के मेघराज से शुरू की थी। इसका उद्देश्य अरावली पर्वतमाला की गोद में रहने वाले ग्रामीण समुदायों के साथ संवाद स्थापित करना था—उनकी समस्याओं को समझना, अरावली संरक्षण पर उनके विचार जानना तथा यह चर्चा करना कि क्या खनन के उद्देश्य से अरावली की एक समान (यूनिफॉर्म) परिभाषा होनी चाहिए।
हमें ग्रामीणों ने बताया कि पशु-चराई, कृषि, औषधीय पौधों के उपयोग आदि के लिए वे अरावली की अच्छी सेहत पर निर्भर हैं। ग्रामीण समुदायों ने पिछले कुछ दशकों में खनन के कारण हुए पर्यावरणीय क्षरण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अन्य सामाजिक लागतों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जयपुर के बाद अगले पड़ाव में हम राजस्थान के झुंझुनूं, सीकर और कोटपुतली जिलों का दौरा करेंगे, इसके पश्चात दक्षिण हरियाणा में प्रवेश करेंगे।
यात्रा से ही जुड़ी युवा विधि छात्रा अंजलि श्रेष्ठ ने कहा,अरावली संरक्षण यात्रा जयपुर में झालाना डूंगरी के निकट अरावली क्षेत्र में गई, जहाँ अतीत में खनन ने कई पहाड़ियों को नष्ट कर दिया है। हमने उन लोगों से मुलाकात की जिनके परिवार के सदस्य पहले खदानों में काम करते थे। कुछ को सिलिकोसिस हुआ और उनकी मृत्यु हो गई, जबकि अन्य अब भी इस घातक बीमारी से पीड़ित हैं। झालाना की सीमा पर बहने वाली जलधारा में समीपवर्ती औद्योगिक क्षेत्र के अपशिष्ट के कारण प्रदूषण और चारों ओर प्लास्टिक कचरा देखकर हमें अत्यंत दुःख हुआ।
आदिवासी समन्वय मंच भारत की सदस्य कुसुम रावत ने कहा कि जयपुर शहर के युवाओं के साथ संवाद किया। महेश नगर स्थित गीता पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। ग्रामीण संचार कलाकार रामलाल भट्ट ने बच्चों को प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने के लिए प्रेरित किया तथा कविता और गीतों के माध्यम से अरावली संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
यात्रा जयपुर के बजाज नगर स्थित ‘एज़िमुथ’ (भूगोल संस्थान) पहुँची, जहाँ कठपुतली शो के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और अरावली संरक्षण के संदेश दिए गए। युवाओं ने प्राकृतिक संसाधनों के लाभ के लिए हो रहे दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुए शहरी क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय योजना (इकोलॉजिकल प्लानिंग) के महत्व और जयपुर में दूरस्थ बांधों पर निर्भर रहने के बजाय वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
जयपुर । चार राज्यों में फैली 700 किमी लंबी अरावली श्रृंखला को पार करती हुई अरावली संरक्षण यात्रा जयपुर पहुँची। अरावली विरासत जन अभियान की सदस्य नीलम आहलूवालिया ने कहा “हमने यह यात्रा 24 जनवरी को गुजरात के अरावली जिले के मेघराज से शुरू की थी। इसका उद्देश्य अरावली पर्वतमाला की गोद में रहने वाले ग्रामीण समुदायों के साथ संवाद स्थापित करना था—उनकी समस्याओं को समझना, अरावली संरक्षण पर उनके विचार जानना तथा यह चर्चा करना कि क्या खनन के उद्देश्य से अरावली की एक समान (यूनिफॉर्म) परिभाषा होनी चाहिए।
उन्होंने कहा कि हमने गुजरात के अरावली, बनासकांठा और साबरकांठा जिलों तथा राजस्थान के सिरोही, उदयपुर, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, प्रतापगढ़, चित्तौड़गढ़, ब्यावर, राजसमंद, पाली, अजमेर, भीलवाड़ा, बूंदी, टोंक, सवाई माधोपुर, करौली, धौलपुर, खैरथल-तिजारा, डीग और भरतपुर जिलों के अनेक जमीनी स्तर के लोगों से मुलाकात की।
हमें ग्रामीणों ने बताया कि पशु-चराई, कृषि, औषधीय पौधों के उपयोग आदि के लिए वे अरावली की अच्छी सेहत पर निर्भर हैं। ग्रामीण समुदायों ने पिछले कुछ दशकों में खनन के कारण हुए पर्यावरणीय क्षरण, स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं और अन्य सामाजिक लागतों के बारे में भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि जयपुर के बाद अगले पड़ाव में हम राजस्थान के झुंझुनूं, सीकर और कोटपुतली जिलों का दौरा करेंगे, इसके पश्चात दक्षिण हरियाणा में प्रवेश करेंगे।
यात्रा से ही जुड़ी युवा विधि छात्रा अंजलि श्रेष्ठ ने कहा,अरावली संरक्षण यात्रा जयपुर में झालाना डूंगरी के निकट अरावली क्षेत्र में गई, जहाँ अतीत में खनन ने कई पहाड़ियों को नष्ट कर दिया है। हमने उन लोगों से मुलाकात की जिनके परिवार के सदस्य पहले खदानों में काम करते थे। कुछ को सिलिकोसिस हुआ और उनकी मृत्यु हो गई, जबकि अन्य अब भी इस घातक बीमारी से पीड़ित हैं। झालाना की सीमा पर बहने वाली जलधारा में समीपवर्ती औद्योगिक क्षेत्र के अपशिष्ट के कारण प्रदूषण और चारों ओर प्लास्टिक कचरा देखकर हमें अत्यंत दुःख हुआ।
आदिवासी समन्वय मंच भारत की सदस्य कुसुम रावत ने कहा कि जयपुर शहर के युवाओं के साथ संवाद किया। महेश नगर स्थित गीता पब्लिक स्कूल में विद्यार्थियों के साथ एक संवाद सत्र आयोजित किया गया। ग्रामीण संचार कलाकार रामलाल भट्ट ने बच्चों को प्रकृति के साथ सामंजस्य में जीवन जीने के लिए प्रेरित किया तथा कविता और गीतों के माध्यम से अरावली संरक्षण के प्रति जागरूकता बढ़ाई।
यात्रा जयपुर के बजाज नगर स्थित ‘एज़िमुथ’ (भूगोल संस्थान) पहुँची, जहाँ कठपुतली शो के माध्यम से पर्यावरण संरक्षण और अरावली संरक्षण के संदेश दिए गए। युवाओं ने प्राकृतिक संसाधनों के लाभ के लिए हो रहे दोहन पर चिंता व्यक्त करते हुए शहरी क्षेत्रों में पारिस्थितिकीय योजना (इकोलॉजिकल प्लानिंग) के महत्व और जयपुर में दूरस्थ बांधों पर निर्भर रहने के बजाय वर्षा जल संचयन को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर बल दिया।
टिप्पणियाँ