नारी का नाम नवधाभक्ति के रूप में मिल जायेंगे

विजय सिंह बिष्ट 


प्ररेणा दायक घरवाली से,धन शोहरत मान बढाई घर की लक्ष्मी से मिलती है एक कहानी आती है दो साथी कहते हैं तेरी नाक कहां है एक ने कहा मेरी नाक घर में है दूसरे ने कहा मेरी मेरे पर ही है।


फिर दोनों ने परीक्षा के लिए एक दूसरे के घर को चुना।जिसकी अपने पर थी वह घर वाले के घर गया, नमस्कार आदि के बाद उसने घरवाले भाई के बारे में पूछा , उसकी घरवाली ने कहा वे दो दिन के बाहर गए हैं। आप बैठो उसने पूर्ण आवाभगत के साथ उसकी सेवा  की, कहा आ जायेंगे, आप ठहरें वे नहीं है तो मैं तो हूं, यदि आप चले गएऔर वे सुनेगे कि आप आये थे वे नाराज होंगे। आप को कोई परेशानी नहीं होगी।वह वहीं ठहर गया। 


दूसरा उस के यहां गए जिसने कहा था मेरी मेरे पर ही है, वहां जाकर वह उसकी पत्नी से मिला उसने  औपचारिक रूप से सेवा अभिवादन किया , वह बोली वह घर में नहीं हैमैं आपको जानती पहचानती नहीं हूं आप कौन हैं जब वह आ जाये तब आना, मुझे बहुत सारे काम करने हैं आप जा सकते । अब दोनों मिले तो उन्होंने कहा सचमुच किसी की घर में होती है जहां प्यार से आवाभगत होती है आदर और सम्मान मिलता है।


दूसरी ओर तुम अपने में ही सब कुछ हो। तुम्हारी पत्नी का स्वभाव रूखा है। कहानी का अंत घर की लक्ष्मी से होता है जो अच्छे लक्षणों से घरवाली और घर की शोभा है लक्ष्मी का स्वरूप है  जो दो घरों का मान बढ़ाती है दूसरी को कुलक्षणी कहने में  दुःख तो होता है किन्तु जो दूसरे का सम्मान नहीं करती वह सम्मान योग्य नहीं है वह अपनी ही लाज नहीं बचा सकती दो घरों की क्या बचायेगी। नारी का नाम नवधाभक्ति के रूप में कल से मिल जायेंगे।


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