NSUI National President जो गहलोत और पायलट न कर सके, वह विनोद जाखड़ ने कर दिखाया


० आशा पटेल ० 
जयपुर। राजस्थान की छात्र राजनीति ने वह स्वर्णिम इतिहास रच दिया है, जिसकी प्रतीक्षा दशकों से की जा रही थी। कांग्रेस आलाकमान ने विनोद जाखड़ को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त कर न केवल एक युवा को जिम्मेदारी सौंपी, बल्कि राजस्थान के सियासी रसूख पर भी मुहर लगा दी । भारतीय राष्ट्रीय छात्र संगठन (NSUI) के 55 साल के इतिहास में पहली बार मरुधरा की मिट्टी का कोई छात्र नेता संगठन का ‘कप्तान’ बना है। 
कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खड़गे ने विनोद जाखड़ को NSUI का राष्ट्रीय अध्यक्ष नियुक्त किया है। यह पद इसलिए भी ऐतिहासिक है क्योंकि राजस्थान कांग्रेस के अब तक के सबसे बड़े नेताओं में शुमार अशोक गहलोत और सचिन पायलट जैसे दिग्गज भी अपने छात्र राजनीति के दौर में कभी इस शीर्ष पद तक नहीं पहुँच पाए थे। इसमें कोई दो राय नहीं कि राजस्थान की राजनीति में अशोक गहलोत और सचिन पायलट का कद ‘हिमालय’ जैसा है, लेकिन NSUI के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद की बात करें तो विनोद जाखड़ ने सबको पीछे छोड़ दिया है।

अशोक गहलोत: ‘जादूगर’ के नाम से मशहूर गहलोत ने 1974 में राजस्थान NSUI के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में अपना सफर शुरू किया था, लेकिन वे कभी संगठन के राष्ट्रीय अध्यक्ष नहीं बने। सचिन पायलट: पायलट ने अपनी राजनीति की शुरुआत सीधे लोकसभा चुनाव से की थी, हालांकि वे युवा कांग्रेस और पार्टी के अन्य पदों पर रहे, लेकिन NSUI की कमान उनके पास कभी नहीं रही। पूर्व केंद्रीय मंत्री भंवर जितेंद्र सिंह या सी.पी. जोशी जैसे दिग्गज भी कभी इस राष्ट्रीय पद पर नहीं आसीन हुए। विनोद जाखड़ की यह उपलब्धि इसलिए भी मिसाल है क्योंकि उन्होंने इसे शून्य से शुरू कर हासिल किया है।

2018 में राजस्थान यूनिवर्सिटी छात्रसंघ चुनाव में जब NSUI ने उन्हें टिकट देने से मना कर दिया, तो उन्होंने बागी होकर चुनाव लड़ा और ऐतिहासिक जीत दर्ज की। संगठन ने उनकी ताकत पहचानी और वे वापस लौटे। पहले उन्हें राजस्थान का प्रदेश अध्यक्ष बनाया गया और अब वे सीधे देश के ‘नंबर 1’ छात्र नेता बन गए हैं।विनोद जाखड़ जयपुर के पास विराटनगर के एक साधारण परिवार से आते हैं। 

उनके पिता मिस्त्री हैं। एक ऐसे परिवार से निकलकर जहाँ राजनीति का कोई दूर-दूर तक वास्ता नहीं था, वहां से उठकर राहुल गांधी की ‘गुड बुक्स’ में जगह बनाना और NSUI का सर्वोच्च पद पाना, राजस्थान के हर छात्र के लिए प्रेरणा है।विनोद जाखड़ एससी वर्ग से आते हैं। उनकी नियुक्ति को कांग्रेस के एक बड़े मास्टरस्ट्रोक के रूप में देखा जा रहा है:

जातीय समीकरण: राजस्थान और उत्तर भारत में दलित युवाओं को पार्टी से जोड़ने के लिए यह एक बड़ी चाल है। यह नियुक्ति संदेश देती है कि कांग्रेस अब ‘जमीनी कार्यकर्ताओं’ को तरजीह दे रही है, भले ही उनका कोई राजनीतिक गॉडफादर न हो।

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