हर बीज में भ्रूण छिपा है


ऐ मां तेरी गोदी से जन्में,
तुमने ही हमको पनपाया।
खिले तुम्हारे आंगन में,
भांति भांति के रूपों में पाया।
ऐ मां तुमको  कोटि-कोटि नमन।।


तेरी मिट्टी में अमृत भरा है,
हर श्रृंगार से हमें सजाया,
कितनी पीयूष शक्ति है मां,
तेरे रंगों में जो हमने पाया।
ऐ मां तुझे शत् शत् नमन।


गर्जन तर्जन में भी जन्मे,
नया रूप दे हमें उगाया।
इंद्रधनुषी रूप निखारा,
भांति भांति से हमें पुकारा।


हर बीज में भ्रूण छिपा है,
नृत्य करता वह धरती में आया।
हवा ,पानी ,गर्मी ने फिर उसे जगाया।
रत्न गर्भा मां तेरी अनोखी माया।
उससे ही हम सबने जीवन पाया।
 ऐ धरणी मां शत् शत् नमन।


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

राजस्थान के सरकारी विश्वविद्यालयों के पेंशनर्स हुए लामबंद

सांगानेर में सरकार की संवेदनहीनता से 87 कॉलोनियों पर संकट

इंडिया इंटरनेशनल हॉस्पिटैलिटी एक्सपो में ईपीसीएच पवेलियन ने भारतीय शिल्प कौशल का किया प्रदर्शन

IFWJ के पत्रकारों का सिस्टम के विरुद्ध अनिश्चितकालीन धरना

पेंशनर सोसाइटी ने पेंशनर्स समस्या हल करने हेतु राज्यपाल से लगाई गुहार

श्री राम राष्ट्रीय साहित्यिक संस्था अयोध्या धाम पटल पर गूंजी पर्यावरण चेतना,महिला कवित्रियों ने रचा हरित इतिहास