वसंत उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशों की छह ऋतुओं में से एक

सारण - वसंत उत्तर भारत तथा समीपवर्ती देशों की छह ऋतुओं में से एक ऋतु है, जो फरवरी मार्च और अप्रैल के मध्य इस क्षेत्र में अपना सौंदर्य बिखेरती है। ऐसा माना गया है कि माघ महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आरंभ होता है।



फाल्गुन और चैत्र मास वसंत ऋतु के माने गए हैं। फाल्गुन वर्ष का अंतिम मास है और चैत्र पहला। इस प्रकार हिंदू पंचांग के वर्ष का अंत और प्रारंभ वसंत में ही होता है। इस ऋतु के आने पर सर्दी कम हो जाती है, मौसम सुहावना हो जाता है, पेड़ों में नए पत्ते आने लगते हैं, आम के पेड़ बौरों से लद जाते हैं और खेत सरसों के फूलों से भरे पीले दिखाई देते हैं I



अतः राग रंग और उत्सव मनाने के लिए यह ऋतु सर्वश्रेष्ठ मानी गई हैऔर इसे ऋतुराज कहा गया है। इस ऋतुराज में सरस्वती पूजा का आयोजन धूमधाम से उत्सव मनाया जाता है। 
इस अवसर पर बैंड बाजा और लोगों के समूह के साथ सरस्वती पूजा का धूमधाम से समापन हुआ तथा लोगों ने सरस्वती मां से विद्या देने वाली की जय जय कार की नारा लगाया । 


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