कोरोना महाभारत का सत्य


विजय सिंह बिष्ट 


आज कल कोरोना से भयभीत होकर तालाबंदी में दो माह से घर में बंद पड़े मात्र प्रमुख कार्यो में सभी संलग्न हैं बार बार हाथ धोना , किसी को फोन करना खाना बनाना और निंद्रा की गोद में चले जाना। धन्यवाद है टीवी सीरियल में रामायण और महाभारत अथवा अन्य पसंदीदा सीरियल दिखाने के लिए। कभी कभार समाचारों की ओर भी ध्यान जाता है तब ऐसा लगता है कि रामायण के पात्रों की तरह कई जगह असत्य को सत्य बनाने के लिए कैकेई और मंथरा की भूमिका में हमारी सरकारें भी काम करती हैं।


इसका प्रतिफल श्री राम चन्द्र जी की तरह गरीब जनता को भी वनवासी बनकर कंटक मार्गो से लाचार, भूखा-प्यासा जीवन बिताना होगा।
 जाके पांव पड़े न बिवाईं
सो कस जाने पीर पराई।
आज राज्य सरकारें जिस तरह से प्रवास से लौटने वाले श्रमिकों के साथ बर्ताव कर रही हैं उसके सत्य और असत्य का प्रतिफल सीमा पर खड़ी  वह बेताब भीड़ भोग रही हैं जो भूखी प्यासी,कई दिनों से पैदल चलकर पुलिस के चुंगल से छूटकर अपने गांव जाने की प्रतीक्षा कर रही है। कई राजनीतिक दल भेजने , खाने रहने और किराया देने की पहल कर रहे हैं लेकिन पक्ष और बिपक्ष घरेलू झगड़ों की तरह नकार देते हैं। हमने देखा है जो परिवार में किसी की मदद नहीं करता वह सबसे पहले अपने परायों  में अपनी सच्चाई का ढिंढोरा पीटता है वास्तविकता सभी जान तो लेते हैं लेकिन कुछ मौन रहते और कुछ आग में घी काम कर देते हैं। देश भी हमारा घर और परिवार है इसमें भी स्वार्थो की लड़ाई सत्य और असत्य की प्रबल धुरी पर घूमती है। अच्छा होता कोराना की इस विभीषिका में राजनीति को त्याग कर भविष्य निर्माताओं श्रमिकों को जीवित उनके घरों में भेजने की ब्यवस्था की जाती।


आखिर कल के भारत के निर्माण और नेतृत्व में इन्ही की सहभागिता है। कहते थे सिर मुंडाते ही ओले गिरते हैं। एक ओर श्रमिक घर जाने के लिए रात दिन  पैदल चले जा रहे हैं। दूसरी ओर तूफान अल्फन भी आने की संभावना बना रहा है। ऐसी स्थिति में संक्रमण फैलना किसी भी स्थिति में नहीं रोका जा सकता। जिस प्रकार से लोगों ने मोदी जी के आह्वान पर थाली ताली और दीये जलाये थे,आज या तो व्यवस्था के अभाव में या लोग भयातुर होकर अपने दीपक स्वयं ही बुझा रहे हैं। लोगों को सरकार पर और सरकारों को आपसी सामंजस्य बनाना ही पड़ेगा। अन्यथा नये भारत की कल्पना करना असम्भव है। यह महाभारत और कलिंग युद्ध की तरह नया इतिहास गढ़ देगा। आशा की जाती है कोराना के निरंतर बढ़ते कदमों को रोकने और जन जीवन को बचाने की हर प्रकार से सरकारें सहयोग करेंगी।


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