पँख फैलाने दे उसे,अपनी चाह पाने दे उसे


स्वच्छ,  निर्मल और  तारो भरे शून्य मे।
अपने भबिष्य की लम्बी चाह की उडान मे।
अपने आगे पीछे हर दिशा के उस वक्षस्थल मे।
जिधर उडे उडने दे उसे,पँख फैलाने दे उसे।


भबिष्य की इक लम्बी लकीर
पढने दे जीवन की तस्वीर।
आडी तिरछी रेखाओँ को चीर।
पढने दे मन की वह तस्वीर।
तब आभास सुखद का हो उसे
पँख फैलाने दे उसे।


दर्द,पीडा,दुख की अनुभूति
जब तक न करे इसकीवह पूर्ति।
ठोकरोँ की टीस,काटोँ की चुभन।
भूख प्यास से पीडित हो तन।
कुछ तो एहसास लगे तब उसे।
पँख फैलाने दे उसे।


कुछ पाने को कुछखोना जरूरी।
हँसने के लिये रोना है जरूरी।
अपने मँजिल की उस चाह मे।
खोज भबिष्य कीहर राह मे।
मँजिल को पाने दे उसे।
पँख फैलाने दे उसे।
अपनी चाह पाने दे उसे।


       


टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

IFWJ के पत्रकारों का सिस्टम के विरुद्ध अनिश्चितकालीन धरना

ईद मिलन एवं सैफी सम्मान समारोह में दिखी एकता की मिसाल,संस्थाओं को किया गया सम्मानित

ईद मिलन एवं सैफी सम्मान समारोह 5 अप्रैल को दिल्ली में

स्वर्ण जयंती पर ‘उत्कर्ष’ अनुशासन, शिष्टाचार और उत्कृष्टता का संगम

फोर स्कूल ऑफ मैनेजमेंट ने सशक्त नारियों में सिलाई मशीन वितरित की

उत्तराखंडी फिल्म “कंडाली” का पोस्टर विमोचन समारोह दिल्ली में होगा आयोजित

असंगठित श्रमिकों के अधिकारों पर राष्ट्रीय मंथन,सामाजिक सुरक्षा को लेकर उठी आवाज

जयपुर बाल महोत्सव में 15 अप्रैल तक कर सकते है फ्री रजिस्ट्रेशन

30+ स्टार्टअप्स,एक विज़न : हेल्थ एक्सचेंज 2026 से हेल्थ इनोवेशन को नई दिशा

आर्च कॉलेज ऑफ डिज़ाइन का 26वाँ स्थापना दिवस : वूमेन शिल्पियों को एक्सीलेंस अवार्ड