प्रोफेसर इलीना सेन का निधन वंचित वर्ग की अपूर्णीय क्षति

लखनऊ । रिहाई मंच ने प्रोफेसर इलीना सेन के निधन पर शोक व्यक्त करते हुए वंचित वर्ग की अपूर्णीय क्षति बताया। रिहाई मंच अध्यक्ष मुहम्मद शुऐब ने कहा कि इलीना सेन के पास वह सब कुछ था जो किसी मध्य वर्गीय व्यक्ति के लिए अपने दायरे में रहकर सुखद और चिंतामुक्त जीवन जीने के लिए ज़रूरी माना जाता है।


लेकिन उन्होंने देश के सबसे वंचित आदिवासी वर्ग की सेवा में अपना जीवन समर्पित कर दिया। उनके बीच शिक्षक बन कर रहीं और शिक्षा के प्रचार प्रसार का काम किया। उनके उत्पीड़न के खिलाफ अपने पति विनायक सेन के साथ मिलकर आवाज़ उठाई। उनके अधिकारों के लिए लड़ीं।


श्रीमती सेन ने मज़दूरों के हक हुकूक के लिए आवाज़ बुलंद की। आदिवासी महिलाएं उनमें अपनी बहन, मां और अभिभावक देखती थीं। नारी सशक्तिकरण के लिए जहां सबसे अधिक संघर्ष की ज़रूरत थी वही इलीना सेन का कार्यक्षेत्र था।


जब विनायक सेन को मार्च 2007 में आदिवासियों के उत्पीड़न के खिलाफ आवाज़ उठाने और रिपोर्ट जारी करने के कारण देशद्रोह का आरोप लगाकर जेल में ठूंस दिया गया और अदालत ने पुलिस की कहानी पर उन्हें उम्र कैद की सज़ा सुना दी उस समय इलीना सेन ने मज़बूती के साथ खड़ी रहीं। उनके असमयिक निधन से एक बड़े वर्ग ने अपना अभिभावक और शुभचिंतक खो दिया। यह वंचित समाज के लिए अपूर्णीय क्षति है।


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