गरज—बरस सावन घिर आयो गाने पर झूमे श्रोता

० अशोक चतुर्वेदी ० 

जयपुर: जवाहर कला केंद्र में अल्लारक्खा खान व साथियों ने धमाकेदार सुर सिम्फनी फ्यूजन की प्रस्तुति दी। इसी के साथ तीन दिवसीय 'राग मल्हार' उत्सव का समापन हुआ। फ्यूजन में सितार, संतूर, बांसुरी, तबला, ड्रम, गिटार एवं गायन का मिश्रण सुन श्रोता झूम उठे। गायन के साथ इंडियन व वेस्टर्न इंस्ट्रूमेंट्स की जुगलबंदी ने कार्यक्रम को खास बना दिया। वेस्टर्न रिदम के साथ आलाप से प्रस्तुति शुरू हुई। इसके बाद मिया की मल्हार से कलाकारों ने आनंद बरसाया। 

गरज—बरस सावन घिर आयो गीत से कलाकारों ने सावन का स्वागत किया। जब गीत और इंस्ट्रूमेंट्स की धुन रंगायन सभागार में गूंजी तो श्रोताओं का जोश देखते ही बनता था। इसके बाद मेघ मल्हार व अन्य रचनाएं पेश की गयी। कलाकारों ने लोगों की फरमाइश को भी ध्यान में रखा।इन्होंने डाली जान सितार पर जनाब अल्लारखा खान ने कार्यक्रम की अगुवाई की। संतूर पर फतेह अली, तबले पर गुलाम गौर, ड्रम्स पर शफात हुसैन, अयान खान, बांसुरी पर संदीप सोनी, की—बोर्ड पर अशोक पंवार, गिटार पर अरणव मेहता ने संगत की। 

वहीं सौरभ वशिष्ठ ने कार्यक्रम में अपनी आवाज दी। गौरतलब है कि जवाहर कला केंद्र की ओर से 23 से 25 जुलाई तक तीन दिवसीय राग मल्हार उत्सव का आयोजन किया गया था। इसमें ख्यात कलाकारों ने राग मल्हार की अलग—अलग प्रस्तुतियॉं दी। पहले दिन श्गिरीन्द्र तलेगांवकर ने शास्त्रीय गायन, दूसरे दिन पं.कैलाश मोठिया ने वायलिन और अंतिम दिन अल्लारक्खा एंड ग्रुप ने अपनी प्रस्तुति से लोगों का मनोरंजन किया।

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