नाटक 'मुगल बच्चा' में दी अहंकार न करने की सीख

० अशोक चतुर्वेदी ० 
जयपुरः जवाहर कला केंद्र की पाक्षिक नाट्य योजना के तहत नाटक ‘मुगल बच्चा’ का मंचन किया गया। इस व्यंग्यात्मक नाटक ने न केवल दर्शकों को हंसाया, बल्कि कई जगह भावुक करते हुए अहंकार न करने की सीख भी दी। महमूद अली ने इस्मत चुगताई की कहानी का नाट्य रुपांतरण कर न केवल निर्देशक की भूमिका निभाई बल्कि इस एकल नाट्य प्रस्तुति में 11 किरदारों को मंच पर बखूबी साकार किया। नाटक के नाम में ही इसका सार छिपा है। यह कहानी है काले मियां और उसकी पत्नी गौरी बी की। दोनों मुगल खानदान से ताल्लुक रखते हैं।
दोस्तों के मजाक से आहत होकर अपने अहंकार की संतुष्टि के लिए काले मियां पत्नी का घूंघट ना उठाने की कसम खा लेता है। वह गौरी बी को घूंघट उठाने को कहता है, इससे दोनों में ठन जाती है। काले मियां की इस बचकाना हरकत के चलते वह अपनी पत्नी का चेहरा भी नहीं देख पाता। जीवन के आखिरी पड़ाव पर जब गौरी बी घूंघट उठाने को राजी होती है तो काले मियां का इंतकाल हो जाता है। नाटक में प्रकाश परिकल्पना गगन मिश्रा व मंच परिकल्पना अभिषेक झांकल की रही। अनीस कुरैशी ने नृत्य परिकल्पना तो शाहरुख खान ने संगीत संचालन की भूमिका निभाई।

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