जीडी गोयनका युनिवर्सिटी और फोर्टिस मेंटल हेल्थ प्रोग्राम किशोरों के लिए जोखिम प्रबन्धन पर आयोजित सबसे बड़ा सम्मेलन

० नूरुद्दीन अंसारी ० 
 जीडी गोयनका युनिवर्सिटी, फोर्टिस मेंटल हेल्थ प्रोग्राम के सहयोग से स्कूली बच्चों में जोखिम भरे व्यवहार के प्रबन्धन पर एक सम्मेलन का आयोजन कर रही है। देश भर से स्कूल काउन्सलर्स इस कार्यक्रम ‘VARTAH: Values - Awareness – Reform – Thrive – Action – Hope’ (मूल्य-जागरूकता-सुधार-प्रगति- कार्रवाई-आशा) में एकजुट हुए है। राष्ट्रीय स्तर के इस आधुनिक स्कूल काउन्सलर्स सम्मेलन VARTAH का उद्देश्य शैक्षणिक प्रणाली में सकारात्मक मानसिक स्वास्थ्य की संस्कृति को बढ़ावा देना है। सम्मेलन ने स्कूल काउन्सलर्स एवं शिक्षकों को बच्चों एवं किशारों के कल्याण से जुड़े पहलुओं जैसे जागरुकता, सुधारों एवं कार्यों पर चर्चा और विचार-विमर्श का मौका प्रदान किया।
कार्यक्रम के दौरान किंग्स युनिवर्सिटी कनाडा, जेम्स कुक युनिवर्सिटी, सिंगापुर से आए प्रवक्ताओं एवं अन्तर्राष्ट्रीय शिक्षा से जुड़े विशेषज्ञों ने अपने विचार प्रस्तुत किए। इन सत्रों के दौरान बच्चों एवं किशोरों के मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े महत्वपूर्ण मुद्दों, इसकी संभावना की पहचान जैसे विषयों पर चर्चा की गई। साथ ही इन समस्याओं के लिए व्यवहारिक समाधान भी सुझाए गए, उदाहरण के लिए दुनिया भर के विभिन्न भोगौलिक एवं सांस्कृतिक क्षेत्रों में किस तरह से इन मुद्दों का प्रबन्धन किया जा सकता है।

डॉ समीर पारीख, चेयरपर्सन, फोर्टिस नेशनल मेंटल हेल्थ प्रोग्राम ने कहा, ‘‘बच्चों को उनके जीवन के शुरूआती महत्वपूर्ण वर्षों में सशक्त बनाना बहुत ज़रूरी है, ताकि वे आत्मविश्वास एवं दृढ़ता के साथ अपने जीवन में आने वाले उतार-चढ़ाव का सामना कर सकें। यही कौशल उन्हें सफलता के मार्ग पर अग्रसर करता है, और वे समाज में अर्थपूर्ण रिश्ते बनाकर समाज कल्याण में योगदान दे सकते हैं। बच्चों के समग्र विकास को सुनिश्चित करने के लिए मानसिक स्वास्थ्य एवं कल्याण, शिक्षा का अभिन्न हिस्सा होना चाहिए।’

प्रोफेसर (डॉ) अंजली मिढा शरन, डीन, रीसर्च एण्ड डेवलपमेन्ट एण्ड स्कूल ऑफ ह्युमेनिटीज़, सोशल साइन्स एण्ड एजुकेशन, जीडी गोयंका युनिवर्सिटी ने कहा, ‘‘VARTAH मानसिक समस्याओं के बारे में समाज में फैली रूढ़ीवादी अवधारणाओं पर ध्यान केन्द्रित करेगा और काउन्सलर्स को ज़रूरी कौशल प्रदन करेगा ताकि वे संवेदनशील माहौल में रह रहे किशोरों की मदद कर सकें। 

युनिवर्सिटी द्वारा मानसिक कल्याण एवं मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य को शिक्षा की मुख्यधारा में शामिल करने के प्रयासों के मद्देनज़र यह आयोजन किया गया। यह कार्यक्रम मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञों, स्कूल काउन्सलर्स एवं अध्यापकों को एक ही मंच पर लाया है, जहां उन्हें युवाओं के मनोवैज्ञानिक स्वास्थ्य एवं कल्याण से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा करने का मौका मिला है।’’

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