भारत का तीसरा मून मिशन चंद्रयान-3 ने इतिहास रच दिया

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : भारत का तीसरा मून मिशन चंद्रयान-3 ने इतिहास रच दिया है.चंद्रयान-3 ने बुधवार (23 अगस्त) की शाम 6 बजकर 4 मिनट पर चांद के साउथ पोल पर सॉफ्ट लैंडिंग करते ही इतिहास रच दिया. इसरो की योजना के मुताबिक़ विक्रम लैंडर और रोवर (प्रज्ञान) मूल कार्यक्रम के अनुसार चंद्रमा की सतह पर सफ़लता पूर्वक सही समय पर पहुंच गए हैं.

उल्लेखनीय हैं कि चंद्रयान-3 के चांद के साउथ पोल पर लैंडिंग बड़ी अहम मानी जा रही है. इसीलिए भारत दुनिया का पहला देश है जो चांद के दक्षिणी ध्रुवी क्षेत्र पर पहुंचा हैं. पूरे देश में जश्न शुरू हो चुका है. वैसे चांद पर सॉफ्ट लैंडिंग में अमेरिका, रूस और चीन के बाद भारत ऐसा करने वाला चौथा देश है. डॉ.राजीव मिश्रा, राष्ट्रीय उपाध्यक्ष जयहिंद नेशनल पार्टी ने देश की इस उपलब्धि पर वैज्ञानिकों को बधाई दी, साथ ही कहा की यह नए भारत के जयघोष का क्षण हैं.

उल्लेखनीय हैं कि चंद्रमा का दक्षिणी ध्रुव क्षेत्र इसलिए दिलचस्प है क्योंकि इसके आसपास स्थायी रूप से छाया वाले क्षेत्रों में पानी होने की संभावना हो सकती है. इस मिशन के जरिए इसरो पता लगाएगा कि चांद की सतह पर भूकंप कैसे आते हैं. यह चंद्रमा की मिट्टी का अध्ययन भी करेगा. योजना के मुताबिक, यह मिशन भारत के अंतरिक्ष क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा. चंद्रमा पर, संयुक्त राज्य अमेरिका, रूस और चीन के साथ जुड़कर - और एक अंतरिक्ष शक्ति के रूप में उभरेगा.

यह भारत की निजी अंतरिक्ष कंपनियों के लिए अगले दशक के भीतर वैश्विक लॉन्च बाजार में अपनी हिस्सेदारी पांच गुना बढ़ाने के लक्ष्य को आगे बढ़ाएगा. इससे पहले, जब चंद्रमा मिशन लॉन्च किया गया था, इसरो "भारत की अंतरिक्ष यात्रा में एक नया अध्याय" लिख रहा है और "प्रत्येक भारतीय के सपनों और महत्वाकांक्षाओं" को ऊपर उठा रहा है.

बता दें कि कुछ दिन पहले इस कोशिश में रूस का लूना-25 नाकाम हो चुका है. ऐसे में भारत के चंद्रयान-3 मिशन की अहमियत बढ़ गई है. पूरी दुनिया की निगाहें इस मिशन पर थी. विदित हो कि चंद्रयान-3 की सफलता के लिए देश में पूजा और प्रार्थनाओं का दौर भी चलता रहा है. चंद्रयान-3 मिशन को पूरा करने में क़रीब 615 करोड़ रूपए की लागत आई है. चंद्रयान-3 में लैंडर, रोवर और प्रोपल्शन मॉड्यूल हैं. लैंडर और रोवर चांद के साउथ पोल पर उतरने के बाद 14 दिन तक वहां प्रयोग करेंगे. प्रोपल्शन मॉड्यूल चंद्रमा की कक्षा में रहकर धरती से आने वाले रेडियंश का अध्ययन करेगा l

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