राजकीय सह-शिक्षा माध्यमिक विद्यालय पॉकेट-IV बिंदापुर में माइक्रोग्रीन खेती पर प्रोजेक्ट की शुरुआत

० इरफ़ान राही ० 
नई दिल्ली-बिंदापुर के राजकीय विद्यालय में कलस्टर के स्कूलों की मेंटर टीचर प्रियंका सहरावत के दिशा-निर्देश में पोषण-युक्त आहार प्रदान करने के लिए माइक्रोग्रीन खेती पर एक प्रोजेस्ट की शुआत की गयी। विद्यालय के प्राकृतिक विज्ञान शिक्षक सन्दीप तोमर ने इस प्रोजेक्ट की आवश्यकता और गतिविधियों से अवगत कराया वहीँ एको-क्लब इंचार्ज महेंद्र कुमार सैनी ने इस प्रोजक्ट पर छात्र- छात्राओं के साथ मिलकर खूब काम किया। विद्यालय प्रमुख सरोज बाला ने इस प्रोजेक्ट पर प्रियंका सहरावत से विचार-विमर्श किया और साथ ही इसे अंजाम तक पहुँचाने की मंशा जाहिर की।
प्रियंका शेरावत शिक्षा निदेशालय, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र दिल्ली के विद्यालय ने अंग्रेजी विषय की शिक्षिका हैं, वे पिछले कई वर्षों से बतौर शिक्षक मार्गदर्शक विभाग को अपनी सेवाएँ दे रही हैं। जब सम्पूर्ण विश्व पोषण की समस्या का सामना कर रहा है, हंगर इंडेक्स के आंकड़े चौकाने वाले हैं ऐसे समय में प्रियंका शेरावत ने पोषण की समस्या का सामना करने के लिए एक नई पहल की। उन्होंने एक अद्भुत माइक्रोग्रीन परियोजना की शुरुआत की जिससे राजकीय विद्यालय बिंदापुर के छात्रों/छात्राओं को पोषण से भरपूर आहार उपलब्ध हो सके।

प्रियंका शेरावत ने स्वयं में आयोजित किए गए विभिन्न कक्षाओं के छात्रों को माइक्रोग्रीन खेती के बारे में बताया। उन्होंने छात्रों को बताया कि माइक्रोग्रीन के कैसे पौधे उगाए जाते हैं, उनके फायदे क्या हैं और इन्हें खाने से कैसे आहार में शामिल किया जा सकता है। इस प्रोजेक्ट में जनकपुरी ए-ब्लॉक विद्यालय की शिक्षक मार्गदर्शक मंजू शर्मा ने मिसेज सहरावत का भरपूर साथ दिय। माइक्रोग्रीन का पोषण महत्वपूर्ण होता है क्योंकि ये छोटे-छोटे पौधे होते हैं जिनमें विटामिन, खनिज और प्रोटीन प्रचुर मात्रा में होते हैं। इससे छात्रों को अपने आहार में विविधता मिलती है और उनके स्वास्थ्य में सुधार आता है।

छात्र-छात्राओं की इस परियोजना में बहुत रुचि उत्पन्न हुई और वे उत्साहपूर्वक इसमें शामिल हुए। देखते ही देखते इस परियोजना के फायदे सबको नजर आने लगे। प्रियंका सहरावत ने अब अपने अधिकार-क्षेत्र में आने वाले अन्य सरकारी विद्यालयों में भी इसकी शुरुआत करायी है। शिक्षा निदेशालय के अन्य स्कूलों में भी इसे आगे बढ़ाने का निर्णय उन्होंने लिया है। आज प्रियंका सहरावत माइक्रोग्रीन प्रोजेक्ट की एक आइकॉन बन चुकी हैं। उनका मानना है कि यदि इस तरह के प्रोजेक्ट्स में सामाजिक सहभागिता बढे और समाज के जागरूक सदस्य इसमें सक्रिय रूप से शामिल हों तो समाज के सबसे निचले तबके के छात्र कुपोषण का शिकार होने से बच सकते हैं।

 वे अपने साथ इस प्रोजेक्ट पर काम करने वाले शिक्षक साथी सन्दीप तोमर और एको क्लब इंचार्ज महेंद्र कुमार सैनी सहित अन्य सहयोगी शिक्षकों की प्रशंसा करते हुए कहती हैं-“बिना इन लोगो के सहयोग के मैं इस प्रोजेक्ट को अंजाम नहीं दे सकती थी। सहरावत जैसी कर्मठ शिक्षिकाएं बच्चों के लिए एक टिमटिमाता दीपक हैं, जो हर समय उनके हित में काम करते हैं।

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