कहानी में देह भाषा का बहुत महत्त्व होता है"- ब्रजेश कानूनगो

० मुज़फ्फर सिद्दीकी ० 
भोपाल - अंतर्राष्ट्रीय विश्वमैत्री मंच का अभिनव आयोजन, कहानी संवाद ‘दो कहानी दो समीक्षक’, गूगल मीट पर आयोजित किया गया। इस अवसर पर संस्था की संस्थापक अध्यक्ष संतोष श्रीवास्तव ने कहा कि“कहानी का उद्देश्य पाठकों को भ्रमित करना नहीं होना चाहिए।” आपने कहानी के तत्व पर विस्तार से चर्चा की और नए लेखकों को वर्तमान में लिखी जा रही कहानी की पत्र - शैली और संवाद - शैली के बारे में समझाया।

मुख्य अतिथि शकुंतला मित्तल ने कल्पना मनोरमा की कहानी "गुनिता की गुड़िया" की गहन और सारगर्भित समीक्षा करते हुए कहा कि "कहानी कार ने बोल्ड अभिव्यक्ति शालीनता के शब्दों को उढ़ा कर की है।भ्रूण हत्या का अभिशाप हमारे समाज को वर्षों से डस रहा है।"अध्यक्षता कर रहे वरिष्ठ साहित्यकार ब्रजेश कानूनगो ने अपने सम्बोधन में चेखव के कोट को उद्धरित किया। "जब मैं लिखता हूँ तो मुझे पूरा भरोसा होता है कि पाठक उन तत्त्वों को जोड़ लेगा जो अव्यक्त हैं। "

आपने दोनों कहानियों पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि लेखक की खूबी ये होना चाहिए कि कहानी को इस तरह पाठक को पहुंचाए कि वह पठनीय बन सके। आज के कहानी संवाद में पढ़ी गई कहानियाँ पारिवारिक संवेदनाओं की कहानियाँ हैं। जिस तरह से समाज बदल रहा है उसी तरह से हमारा आचरण बदल रहा है लेकिन संवेदनाएं ज्यों की त्यों हैं। कहानी में देह भाषा का बहुत महत्त्व होता है। युगबोध के द्वारा एक सामान्य घटना को भी लम्बे समय तक याद रखा जा सकता है साथ ही यह अमर सवालों को भी हल करता है।

आपने सपना सिंह की कहानी "घटाई के घेंघ" पर विस्तार से चर्चा करते हुए कहा कि यह कहानी तो एक उपन्यास का प्लाट बन सकती है। उन्होंने कहानी कार को इस कथ्य पर उपन्यास लिखने की सलाह दी।
श्रोताओं में उपस्थित वरिष्ठ कहानीकार श्याम नारायण श्रीवास्तव ने अपनी प्रतिक्रिया में कहा कि "एक महिला ही महिला के दर्द को भली भांति समझ सकती है।"

स्वागत वक्तव्य संस्था की दिल्ली प्रदेश इकाई की महासचिव अर्चना पंड्या ने दिया तो आभार संस्था की उत्तर प्रदेश इकाई की अध्यक्ष अलका अग्रवाल ने प्रेषित किया। सञ्चालन मुज़फ्फर सिद्दीकी ने किया। समापन महेश पालीवाल की कविता से हुआ। गोष्ठी में प्रमिला वर्मा , शैल अग्रवाल, साधना वैद, सुषमा सिंह सहित देश - विदेश से लगभग 35 साहित्यकार अंत तक जुड़े रहे।

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