नया वर्ष नया हर्ष
० डॉ० वहाब ०
नया वर्ष नया हर्ष नई उमंग
नव उल्लास
नया उत्साह
नव तरंग मन में
दूर हो दुःख
दूर वेदनाएं सब
श्रम से प्राप्त सुख हो
मुख पर न हो मुखौटा
मन मानव का शुद्ध हो
पर निर्भर नहीं
आत्म निर्भर हो
जनस्वार्थ को त्यागे
उपकार परोपकार
परमार्थ जानें
ईश्वर में हो आस्था
छल कपट का भाव न हो
मनुष्यता का अभाव न हो
हिंसा को कर नकार
अहिंसा को अपनाएं
बना रहे जन मन यह भाव
अक्षुण्ण हो सांप्रदायिक सद्भाव
कभी न घेरे निराशा घन
आलोडित हों आशाएं मन ।
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