संस्कृत को लेकर अनुवाद में अनन्त संभावनाएं

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली - केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने सीएसयू , दिल्ली के सारस्वत सभागार में द्विदिवसीय भारतीय भाषा अनुवाद कार्यशाला के उद्घाटन के अध्यक्षीय भाषण में कहा कि संस्कृत को लेकर अनुवाद में अनन्त संभावनाएं हैं ,लेकिन इसमें ज्ञान के साथ अनुवाद कौशल भी आवश्यक है ।  शिक्षाविद् तथा संगोष्ठी के मुख्य अतिथि प्रो चांद किरण सलूजा ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के सन्दर्भ में कहा कि इस नीति में भारतीय भाषाओं को बहुत ही अधिक महत्त्व दिये जाने के अनेक कारण हैं ? इस नीति से भाषा गत समरुपता देश के सभी सरकारी तथा पब्लिक स्कूल में आएगी क्योंकि भाषा सबल संप्रेषण में शक्ति का काम करती है ।
संस्कृत कवि तथा अनुवादक और डीन अकादमी प्रो बनमाली विश्बाल ने भारतीय ज्ञान परम्परा में अनुवाद के स्वरूप ,लक्षण तथा विविधता पर व्यापक प्रकाश डाला । डा पवन व्यास ने मंच का संचालन किया और प्रो मधुकेश्वर भट ने अतिथियों का स्वागत किया । इस कार्यशाला के संयोजक प्रो आर एम नारायण सिन्हा ने कार्यशाला के महत्त्व पर प्रकाश डाला और डा सूर्य प्रसाद ने धन्यवाद ज्ञापन किया । इस कार्यशाला में अनुवाद के कौशल को सीखने तथा समझने के लिए, केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय ,जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय, दिल्ली विश्वविद्यालय ,श्री लाल बहादुर शास्त्री नेशनल संस्कृत विश्वविद्यालय के स्नातक तथा शोध छात्र छात्राओं ने भाग लिया है ।

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