लेखिका आभा सिंह की तीन पुस्तकों का विमोचन व कृति चर्चा

० आशा पटेल ० 
जयपुर। स्पंदन महिला साहित्यिक एवं शैक्षणिक संस्थान जयपुर और प्रौढ़ शिक्षण समिति द्वारा आयोजित कार्यक्रम में लेखिका आभा सिंह के दो उपन्यास -“वक्त की खिड़की से”और “लॉक डाउन,एक कोलाज़” तथा कविता संग्रह “भाव ध्वनि के पुल” का विमोचन किया गया। कार्यक्रम में अतिथियों का स्वागत करते हुए स्पंदन अध्यक्ष नीलिमा टिक्कू ने बताया कि आभा सिंह ने अब तक पांच कहानी संग्रह एक लघुकथा संग्रह तीन कविता संग्रह, तीन यात्रा संस्मरण, तीन उपन्यास , एक लघुकथा संग्रह ,हाइकु संग्रह समेत कुल 15 किताबें लिखी हैं ।
आभा जहां कुशल कवयित्री हैं वहीं सशक्त कहानीकार-उपन्यासकार भी हैं। “वक़्त की खिड़की से”,उपन्यास बहुत धैर्य से लिखा गया उपन्यास है जिसमें पारिवारिक रिश्तों के स्याह सफ़ेद सच बताते हुए एकजुटता से विरोधी परिस्थितियों का सामना कैसे किया जा सकता है।सकारात्मक संदेश दिये हैं।
लॉक डाउन , एक कोलाज में कोरोना काल की आरम्भ से लेकर अंत तक की तस्वीर के अनुभव बखूबी चित्रित किये हैं।आपको कई सम्मान मिल चुके हैं । कार्यक्रम में सचिव प्रौढ़ शिक्षण समिति राजेन्द्र बोड़ा ने सबका स्वागत किया।
कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए नन्द भारद्वाज ने आभा सिंह को एक संजीदा लेखक बताते हुए उनके गद्य लेखन पर प्रकाश डाला। आभा सिंह ने अपनी रचना प्रक्रिया पर प्रकाश डालते हुए अपनी अब तक की लेखन यात्रा के बारे में बताया। मुख्य अतिथि प्रो.बीना अग्रवाल ,पूर्व अधिष्ठाता संस्कृत संकाय राजस्थान विश्वविद्यालय जयपुर, .विशिष्ट अतिथि डॉ. पुष्पा गोस्वामी ,पूर्व उप निदेशक साहित्य एवं जनसंपर्क विभाग राजस्थान सरकार ने आभा को एक सशक्त लेखिका बताया।तीनों पुस्तकों की नीर क्षीर समीक्षा डॉ.संगीता सक्सैना डॉ.कंचना सक्सेना और रितु सिंह ने की।डॉ. जयश्री शर्मा और डॉ. सुषमा शर्मा ने अपने विचार व्यक्त किए।

कार्यक्रम में आभा सिंह की कविताओं का पाठ पल्लवी माथुर, डॉ. सुशीला शील, स्मिता शुक्ला,स्वयं सिद्धा सुशीला शील ने किया।उनके उपन्यासों के अंश का पाठ एस. भाग्यम शर्मा और कविता मुखर ने किया।माधुरी शास्त्री ने सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम का संचालन डॉ. आशा शर्मा ने किया।

टिप्पणियाँ

Sushila Sheel Rana ने कहा…
स्पंदन द्वारा आयोजित अत्यंत गरिमामय लोकार्पण । आशा जी का सधा हुआ सुंदर संचालन, उत्कृष्ट समीक्षाएँ और आभा जी की बेहतरीन कविताओं का अति सुंदर काव्यपाठ। डॉ बीना जी ने संस्कृत की सूक्तियाँ उद्धृत कर सृजन कर्म पर अनुकरणीय टिप्पणियाँ की। नंद भारद्वाज सर का वक्तव्य प्रेरक रहा। ननीलिमा टिक्कू जी को अत्यंत गरिमामय आयोजन के लिए और आभा सिंह जी को तीन पुस्तकों के लोकार्पण के लिए बहुत-बहुत बधाई💐💐

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