विश्व में होने वाली सड़क दुर्घटनाओ में भारत पहले स्थान पर

० आशा पटेल ० 
जयपुर - विश्व में प्रति वर्ष लगभग 13.5 लाख लोग सड़क हादसों में जान गंवा रहे हैं । विश्व में होने वाली सड़क दुर्घटनाओ में दुर्भाग्यवश भारत पहले स्थान पर है। अकेले भारत में हर साल 1,70,000 से अधिक लोग सड़क दुर्घटनाओं में जान गंवा देते हैं और 5,00,000 लोग घायल होते हैं । सड़क हादसों में दोपहिया वाहन चालकों की मृत्यु का आंकड़ा 28 % है । सड़क हादसों में जान गवानें वाले 18 - 45 वर्ष के 81% युवा हैं, जो देश का भविष्य हैं। इन्ही आंकड़ों में कमी लाने के लिए सहायता द्वारा CMS फाउंडेशन के सहयोग से CSR गतिविधियों के तहत Shine International School मे विद्यार्थियो को जीवन रक्षा प्रणाली मे प्रशिक्षित करने के लिए 2 प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया।
सहायता संस्था की ट्रस्टी प्रो. दीपाली भार्गव व सीईओ मनीष संचेती द्वारा शिक्षक प्रशिक्षण महिला महाविद्यालय में महत्वपूर्ण बातें साझा की गई। अगर दुर्घटना हो जाए तो आप पीड़ित के घरवालों को तुरंत संपर्क कर उन्हें घायल की स्थिति के बारे में बताकर बुला सकते है इसके लिए हमें अपने मोबाइल की लॉक स्क्रिन पर कम से कम 3 In Case of Emergency नंबर लिखकर डालने चाहिए क्योंकि यदि मौके पर या अस्पताल में घायल के घरवालों को बुला लिया जाए तो घायल को उचित संभाल मिल पायेगी और दुर्घटना में होने वाली मौतों के आंकड़ों में कमी आएगी। 

 मनीष संचेती ने विद्यार्थियों को दुर्घटना की स्थिति में पीड़ित की जीवन रक्षा से सम्बंधित उपायों जैसे CPR व Compression Only Life Support (कंप्रेशन ओनली लाइफ सपोर्ट) यानि (COLS), विद्यार्थी मौके पर ही कैसे घायल की स्थिति का आंकलन करें, यदि घायल बेहोश है तो उसको 90 डिग्री की करवट पर “Log Roll” की स्थिति में अस्पताल पहुंचाए एवं सभी आपातकालीन सुविधाओं के नंबर जैसे कि 112, 108, 104 पर संपर्क करके एंबुलेंस को बुलाकर मदद ली जा सकती है साथ ही राजमार्ग पर एंबुलेंस बुलाने के लिए 1033 नंबर का उपयोग करना चाहिए। 

संस्था द्वारा प्रशिक्षण में दुर्घटना में होने वाली विभिन्न चोटों जैसे मेरुदंड में चोट, सिर की चोट, हड्डी टूटना, अंग विच्छेद के साथ-साथ मधुमेह, मिर्गी, लकवा, ह्रदयाघात, सर्पदंश, जानवर का काटना, प्राकृतिक आपदा इत्यादि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने प्रतिभागियों को सड़क सुरक्षा प्रतिज्ञा भी करवाई की कोई भी दुर्घटना दिखने पर वे अवश्य वहां रुक कर मदद करेंगे। इस मौके पर विद्यार्थियों के सड़क सुरक्षा एवं जीवन रक्षा से सम्बंधित जानकारी का प्रशिक्षण पूर्व व पश्चात का आंकलन करने के लिए प्रश्नोतारी भी भरवाई गयी तथा उन्हें संस्था की और से एक लघु फिल्म “आखिर कब तक” दिखाई गयी जिसमें इस प्रशिक्षण का व्यवहारिक चित्रण था। संस्था की ओर से विद्यालय को मेडी-किट एवं प्रतिभागियों को सर्टिफिकेट दिए गए। अंत में प्रिंसिपल डॉ प्रतिभा पाराशर ने सहायता टीम का आभार व्यक्त किया और विश्वास दिलाया कि इस प्रकार के कार्यक्रम विद्यालय समयानुसार करवाए जाते रहेंगे।

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