संयुक्त अभिभावक संघ की मांग : कोचिंग कानून में अभिभावकों से ले राय-अभिषेक जैन

० आशा पटेल ० 
जयपुर। कोटा, जयपुर सहित प्रदेश के विभिन्न शहरों में विगत कुछ वर्षों से बालिग और नाबालिग विद्यार्थियों द्वारा लगातार आत्महत्या के मामले बढ़ते जा रहे है जो ना केवल शिक्षा पर दाग लगा रहे है बल्कि अभिभावकों को भी प्रताड़ना झेलने पर मजबूर कर रहे है। विद्यार्थियों द्वारा की जा रही आत्महत्या के मामलों को रोकने के लिए केंद्र सरकार पहले ही गाइड लाइन बनाकर जारी कर चुकी है किंतु आज तक उन गाइड लाइनों की पालना ही सुनिश्चित नहीं हो सकी है ऐसे में अब एक साल बाद एक बार फिर कोचिंग सेंटरों को लेकर राजस्थान सरकार भी बिल बनने की तैयारी कर रही है, जिसकी जानकारी राजस्थान सरकार ने हाईकोर्ट में दी है।

जिस पर अभिभावकों के प्रमुख संगठन संयुक्त अभिभावक संघ ने कहा है कि " कानून तो बना दिए जाते है पालना सुनिश्चित क्यों नहीं करवाई जाती, अब अगर विद्यार्थियों के आत्महत्या के मामले बढ़ रहे हैं। केंद्र का लाया गया कानून एक वर्ष में पालन के अभाव में फेल हो गया तो राजस्थान सरकार का कानून कितना प्रभाव छोड़ेगा यह उसकी पालना सुनिश्चितता पर निर्भर करता है, बिल लाए जाने से पहले अभिभावक संघ सरकार से मांग करता है कि " बिल बनाने में अभिभावकों के सुझावों को शामिल किया जाए, क्योंकि जब कोई घटना घटती है तो सरकार, प्रशासन और संचालक द्वारा सभी अभिभावकों को दोषी ठहरा दिया जाता है किंतु अभिभावकों की बात बिल्कुल भी सुनी नहीं जाती, बिना अभिभावकों से सुझाव लिए अगर बिल सदन में पेश होता है तो संयुक्त अभिभावक संघ इसका पूरा विरोध करेगा।

संयुक्त अभिभावक संघ राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि आखिरकार सरकार कब प्रदेश में अपनी भूमिका का निर्वहन करेगी, पहले केंद्र सरकार कानून लेकर आती है तो अब राजस्थान सरकार कानून लेकर आने की बात बोल रही है लेकिन हालात जस के तस है बल्कि आत्महत्या के मामले रुकने की बजाय ओर बढ़ रहे है जिसका सबसे प्रमुख कारण अभिभावकों के सुझावों को दरकिनार करना है, बावजूद इसके कानून पर कानून थोप दिए जाते है और पीड़ित अभिभावक को ही दोषी ठहरा दिया जाता है।  
राजस्थान सरकार से हमारी मांग है विद्यार्थियों ने आत्महत्या की भावना खत्म होनी चाहिए जिसको लेकर वह बिल/कानून लेकर आना चाहते है उस कानून में अभिभावकों के सुझावों को प्राथमिकता देवे और अभिभावकों के सुझावों को अवश्य शामिल करे।

 साथ ही इस बिल में प्रशासन की मौजूदगी में कोचिंग संचालक, विद्यार्थी और अभिभावकों के बीच एक टेबल/मंच पर आपसी संवाद को भी प्रमुखता के साथ स्थान देकर अनिवार्यता को लागू करे, साथ ही प्रशासन, कोचिंग सेंटर और अभिभावक तीनों को शामिल जिला स्तर पर बोर्ड का भी गठन करे जिससे विद्यार्थियों के आत्महत्या के मामलों को प्रभावी ढंग से रोका जा सके। अगर राजस्थान सरकार अभिभावकों के सुझावों को शामिल नहीं करती है तो संयुक्त अभिभावक संघ इसका कड़ा विरोध करेगा।

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