इक्कीसवीं सदी में शिक्षा ही बदल सकती है युवाओं का भविष्य : हरिवंश

० योगेश भट्ट ० 
बलिया। राज्यसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा है कि इक्कीसवी सदी में युवाओं का भाग्य शिक्षा ही बदल सकती है। वे टीडी कालेज में 'हरिवंश का सृजन-संसार' विषयक राष्ट्रीय संगोष्ठी एवं संवाद कार्यक्रम में बोल रहे थे। श्री मुरली मनोहर टाउन स्नात्तकोत्तर महाविद्यालय और टाउन इंटर कालेज के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित इस कार्यक्रम में मुख्य अतिथि राजयसभा के उपसभापति हरिवंश ने कहा कि आज मैं जो कुछ भी हूं इसमें बलिया की मिट्टी का योगदान है। इसका गौरवपूर्ण अतीत रहा है।
यह ऋषियों और साधकों व क्रान्तिकारियों की धरती है। अपने बचपन को याद करते हुए उन्होंने कहा कि मैं जहां पैदा हुआ, वहां छह महीने तक बाढ़ का पानी रहता था। हरिवंश ने कहा कि शिक्षा ने बीते तीस-चालीस सालों में लोगों का भाग्य बदला है। युवाओं से अपील करते हुए कहा कि शिक्षा ही भाग्य बदल सकती है। उन्होंने कहा कि शार्टकट से सफलता पाना चाहते हैं तो आप जीवन में कुछ भी हासिल नहीं कर सकते। 

 आज पूरी दुनिया भारत की तरफ उम्मीद की नजर से देख रही है। नए स्टार्टप्स का जिक्र करते हुए कहा कि हुनरमंद लोगों को अवसर मिल रहे हैं। बलिया के युवाओं से स्टार्टप्स शुरू करने की अपील की। नई तकनीक से आने वाले दस सालों में पांच करोड़ नौकरिया मिलने वाली हैं। हरिवंश ने कहा कि बलिया में वह ताकत है कि यहां के युवाओं को सही दिशा मिले तो नई इबारत लिख सकते हैं। इसलिए बलिया बदलाव की धरती बने। उन्होंने युवाओं के सामने पूर्व राष्ट्रपति डा. कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि उनसे प्रेरणा लें।  हरिवंश ने कहा कि संकल्प से साधना की ओर अग्रसर रहने की जरूरत है। युवाओं का नकारात्मक मानस बदले, इसके लिए महाविद्यालयों को आगे आना चाहिए। शिक्षा का उद्देश्य स्कील डेवलपमेंट भी होना चाहिए। यह गांधी जी भी चाहते थे।

 उन्होंने कहा कि दुनिया टेक्नोलाजी के परिवर्तन के द्वार पर खड़ी है। पुरानी टेक्नोलाजी वाली नौकरियां खतरे में हैं। इसलिए आज के चुनौतीपूर्ण दौर में युवा नई टेक्नोलाजी अपनाएं। भविष्य की नियति का लेखन नई टेक्नोलाजी बन रही है। आज युवा छह घंटे सोशल मीडिया पर समय गंवा रहे हैं। इससे आप अपनी प्रतिभा का हनन कर रहे हैं। डिजिटल रचना का भी समय देता है और हमें कमजोर भी कर रहा है।

विशिष्ट अतिथि महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के कुलपति प्रो. कृष्ण कुमार सिंह ने कहा कि हरिवंश जी का सृजन संसार बहुत विशाल है। इतना अध्ययनशील राजनेता और पत्रकार वर्तमान दौर में बहुत कम रह गए हैं। हरिवंश की किताब 'सृष्टि का मुकुट कैलाश मानसरोवर' का जिक्र करते हुए कहा कि मानव अपने किए होने का एहसास न करे तो उसका जीना बेकार है। मनुष्य को कृतज्ञ होना चाहिए। हरिवंश जी दुनिया को आँखों से ही नहीं दिल से देखते हैं। जबकि दिल से दुनिया को देखने का चलन कम हो गया है। बलिया सौभाग्यशाली है कि यहां पैदा हुआ व्यक्ति दिल से दुनिया को देखता है। इनकी चिंताओं का दायरा बहुत व्यापक है।

 महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिन्दी विश्वविद्यालय वर्धा के पत्रकारिता विभाग के अध्यक्ष प्रो. कृपाशंकर चौबे ने कहा कि अभी तक हरिवंश जी ने 28 मौलिक किताबों का सृजन किया है। यह उनकी पत्रकारिता और लेखन यात्रा को समझने के लिए काफी है। हरिवंश जी की लेखनी में देश और दुनिया की समस्याओं पर चिंतन है। साथ ही समस्याओं का समाधान भी है। लेखनी में नैतिक मूल्यों की झलक मिलती है। चार दशकों तक हरिवंश जी देश के विरले संपादक हैं जिन्होंने न सिर्फ देश और समाज के समक्ष सवाल उठाये बल्कि समाधान भी प्रस्तुत किया। अध्यक्षता टीडी कालेज प्रबंध समिति के अध्यक्ष व संचालन प्रो. दयालानंद राय ने किया। संगोष्ठी में स्वागत वक्तव्य टीडी कालेज के प्राचार्य प्रो. रवींद्र नाथ मिश्र और धन्यवाद ज्ञापन टाउन इंटर कालेज के प्राचार्य डा. अखिलेश सिन्हा ने दिया।

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