नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा "दियासलाई" का लोकार्पण
० आशा पटेल ०
जयपुर | नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा " दियासलाई " का लोकार्पण किया गया। वर्षों से बाल श्रमिक बच्चों के बीच जी जान से जुटे कैलाश सत्यार्थी ने स्वयं " दियासलाई " बन कर लाखों बच्चों के जीवन को रोशन किया । इस पुस्तक के बारे में जर्नलिस्ट पुनीता राॅय ने कैलाश सत्यार्थी से अनेक जरुरी सवाल किए । मंच पर सत्यार्थी की अर्धांगिनी सुमेधा कैलाश , जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन की सूत्रधार नमिता गोखले और राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी भी मौजूद थे । राजस्थान के सोशल एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सत्यार्थी के संघर्ष के प्रारम्भ से गवाह रहे हैं | यहाँ यह कहना बहुत जरुरी है कि उन्होंने बाल श्रमिक बच्चो की मुक्ति के लिए जो संघर्ष किया उसे हम सभी ने नजदीक से देखा है |
जयपुर | नोबेल शांति पुरस्कार विजेता कैलाश सत्यार्थी की आत्मकथा " दियासलाई " का लोकार्पण किया गया। वर्षों से बाल श्रमिक बच्चों के बीच जी जान से जुटे कैलाश सत्यार्थी ने स्वयं " दियासलाई " बन कर लाखों बच्चों के जीवन को रोशन किया । इस पुस्तक के बारे में जर्नलिस्ट पुनीता राॅय ने कैलाश सत्यार्थी से अनेक जरुरी सवाल किए । मंच पर सत्यार्थी की अर्धांगिनी सुमेधा कैलाश , जयपुर लिटरेचर फेस्टिवल के आयोजन की सूत्रधार नमिता गोखले और राजकमल प्रकाशन समूह के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी भी मौजूद थे । राजस्थान के सोशल एक्टिविस्ट और वरिष्ठ पत्रकार कैलाश सत्यार्थी के संघर्ष के प्रारम्भ से गवाह रहे हैं | यहाँ यह कहना बहुत जरुरी है कि उन्होंने बाल श्रमिक बच्चो की मुक्ति के लिए जो संघर्ष किया उसे हम सभी ने नजदीक से देखा है |
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