राज्य सरकार के बजट से युवा,किसान,महिला,पिछड़े और उद्यमियों को निराशा : डोटासरा

० संवाददाता द्वारा ० 
बजट जनता को भ्रमित करने वाला है,केवल आंकड़ों का मायाजाल प्रस्तुत हुआ, शब्दों की हेरा-फेरी हुई है, यह बजट नई बोतल में पुराना शरबत मात्र है। पुराने बजट में जो बातें दर्ज थी,वही इस बजट में है ।
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने प्रदेश की भाजपा सरकार द्वारा विधानसभा में प्रस्तुत बजट पर प्रतिक्रिया देते हुये कहा कि राज्य सरकार के बजट से युवा,किसान, महिला, पिछड़े और उद्यमियों को निराशा के अलावा कुछ नहीं मिला है। उन्होंने कहा कि बजट की विशेषता यह है कि बजट बनाने हेतु सुझाव मुख्यमंत्री से लिये गये, बजट को अंतिम रूप वित्त मंत्री ने दिया और विधानसभा में पढ़ा, किन्तु बजट भाषण समाप्त होने पर धन्यवाद ज्ञापन मुख्यमंत्री द्वारा प्रेसवार्ता कर दिया गया ।

उन्होंने कहा कि बजट जनता को भ्रमित करने वाला है, केवल आंकड़ों का मायाजाल प्रस्तुत हुआ, शब्दों की हेरा-फेरी हुई है, कुल मिलाकर यह बजट नई बोतल में पुराना शरबत मात्र है। उन्होंने कहा कि पुराने बजट में जो बातें दर्ज थी, वही इस बजट में है । उन्होंने कहा कि डीपीआर बनाने की बातें है, पीपीपी मोड़ पर आमजन की गाढ़ी कमाई से बने हुये इन्फ्रास्ट्रक्चर को दिया जायेगा। उन्होंने कहा कि हमेशा बजट में सरकारों ने मीसिंग लिंक सड़कों के लिये प्रावधान रखा है, 40 से 50 किमी मीसिंग लिंक सड़क का प्रावधान हर विधानसभा क्षेत्र के लिये किया जाता रहा है, किन्तु इस बजट में केवल मरम्मत के लिये नॉन पैचेबेल सड़कों के निर्माण के लिये 10- 10 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है और मरूस्थली जिलों में 15 करोड़ रूपये का प्रावधान रखा गया है।

उन्होंने कहा कि भर्तियों के लिये 1.25 लाख जादुई आंकड़े की घोषणा की गई है, जबकि मुख्यमंत्री पहली साल में कहते थे कि वर्षभर में एक लाख नौकरी देंगे, दूसरे साल में 1.25 लाख की घोषणा कर दी, इसका तात्पर्य यह है कि जब तीसरा बजट पेश होगा तब 2.25 लाख नौकरियां मिल चुकी होगी। उन्होंने कहा कि वास्वतविकता यह है कि जो पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा निकाली गई भर्तियां थी उनमें से जो भर्तियां प्रक्रियाधीन, वेटिंग लिस्ट में, न्यायालय आदेश के कारण अटकी होना आदि थी, ऐसे 47 हजार नौकरियों के नियुक्ति पत्र भाजपा की प्रदेश सरकार ने दिये हैं। उन्होंने कहा कि इनमें से 37 हजार को नियुक्ति मिली है और दस हजार को केवल सलेक्शन लेटर मिले हैं।

उन्होंने कहा कि 14 माह बीतने के पश्चात् भी प्रदेश सरकार एक भी सफाई कर्मी की भर्ती नहीं कर सकी है, ना ही चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों की भर्ती कर पाई । उन्होंने कहा कि सरकार शिक्षकों की भी भर्ती नहीं कर पाई, जबकि 1.25 लाख शिक्षकों के पद शिक्षा विभाग में खाली हैं और आज भी इन पदों को भरने की कोई घोषणा नहीं की गई है ।

डोटासरा ने कहा कि सरकार ने हाल ही में विज्ञापन दिया था कि अगले वर्ष 80 हजार नौकरियां देंगे, ऐसा प्रतीत होता है कि इस वर्ष जो नौकरियां नहीं दे पाये, उन्हें जोड़कर अगले वर्ष 1.25 लाख नौकरियां देने की घोषणा बजट में की गई है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार ने रोजगार की आस लगाये बैठे प्रदेश के युवाओं के हितों पर कुठाराघात किया है। उन्होंने कहा कि जो युवा शिक्षक बनने के लिये अपने माता-पिता की गाढ़ी कमाई का पैसा कोचिंग लेने हेतु खर्च कर रहे हैं, बड़े शहरों में आकर किराये पर रह रहे हैं, उनके लिये भर्तियां नहीं निकालकर प्रदेश सरकार ने उनके हितों पर कुठाराघात किया है।

उन्होंने कहा कि सरकार ने बजट में 150 यूनिट बिजली फ्री देने की घोषणा की है, पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार द्वारा 100 यूनिट बिजली मुफ्त देने की योजना को आगे बढ़ाने की बात कही है जबकि किसानों को दो हजार यूनिट प्रतिमाह बिजली नि:शुल्क दी जा रही थी, किन्तु अब नये बिजली कनेक्शन लेने वालों को इस योजना के तहत् कोई लाभ नहीं मिलेगा ।

उन्होंने कहा कि घरेलू बिजली पर मिलने वाली छूट में भी एक पेच राज्य सरकार ने डाला है कि मिल रही छूट बंद होगी और पीएम श्री सूर्य घर योजना केन्द्र सरकार की योजना जिसमें घरों पर सोलर प्लांट लगाया जायेगा, के तहत् षड़यंत्रपूर्वक चुनिन्दा लोगों को लाभान्वित किया जायेगा । उन्होंने कहा कि पहले इस योजना के तहत् प्रदेश की जमीनों को उद्योगपतियों के नाम आवंटित किया गया, राईजिंग राजस्थान में जमीनों के एमओयू किये गये और अब इस योजना के तहत् जिस व्यक्ति के घर पर सोलर प्लांट लगेगा उसकी लागत का 90 प्रतिशत सब्सिडी के रूप में सोलर प्लांट निर्माता को मिल जायेगी ।

इस योजना के तहत् किसी गरीब को या प्रदेशवासी को लाभ नहीं होगा, केवल चुनिन्दा उद्योगपतियों को लाभ पहुँचाया जा रहा है। उन्होंने कहा कि बड़े उद्योगपतियों को सब्सिडी देकर लाभ पहुँचाने की जगह किसानों के घरेलू और कृषि दोनों कनेक्शनों की बिजली निःशुल्क कर देनी चाहिये। उन्होंने कहा कि चुनावों में प्रधानमंत्री ने प्रदेशवासियों से हरियाणा के बराबर पेट्रोल-डीजल के दाम करने का वादा किया था, किन्तु यह वादा दूसरा बजट पेश होने के बावजूद निभाया नहीं गया और पेट्रोल- डीजल राजस्थान में हरियाणा के मुकाबले 10 रूपये महंगा बिक रहा है ।

उन्होंने कहा कि सामाजिक सुरक्षा पेंशन के नाम पर भी छलावा हुआ है, कांग्रेस सरकार के शासन में वृद्धावस्था, एकल नारी सहित सभी पेंशन में 15 प्रतिशत की बढोत्तरी की गई थी, किन्तु भाजपा की सरकार ने इस वर्ष 5 प्रतिशत के लगभग बढ़ोत्तरी की है जो कि प्रदेश के जरूरतमंद तबके के साथ छलावा है। उन्होंने कहा कि बजट में आंगनबाड़ी केन्द्रों में 5 दिन बच्चों को दूध देने की घोषणा की गई है जो कि पहले तीन दिन थी, किन्तु पिछले बजट में 50-55 करोड़ रूपये का प्रावधान होने के बावजूद कोई पैसा खर्च नहीं हुआ है।

उन्होंने कहा कि यमुना जल बंटवारे के नाम पर सबसे बड़ा छल राजस्थान व शेखावाटी की जनता के साथ भाजपा सरकार द्वारा किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस बजट में एक शब्द भी यमुना जल बंटवारे के बारे में नहीं बोला गया, क्योंकि डीपीआर जो चार माह में बनाने की घोषणा की थी, वह अभी तक बनी नहीं, ना ही डीपीआर के लिये कोई प्रावधान बजट में किया गया है, मुख्यमंत्री ने केवल अपने होर्डिंग्स लगवाकर वाहवाही लूट ली, काम जरा सा भी नहीं किया।

उन्होंने कहा कि ईआरसीपी के नाम तो बदले गये, राम जल सेतु बोलने लगे और 12 हजार करोड़ रूपये के काम गिना रहे हैं जबकि यह सारी वित्तीय स्वीकृतियां पूर्ववर्ती कांग्रेस शासन के समय जारी होकर काम प्रारम्भ हुये थे । उन्होंने कहा कि पूर्ववर्ती सरकार द्वारा दी गई वित्तीय स्वीकृतियों के काम चल रहे हैं, भाजपा सरकार ने इस योजना हेतु एक रूपया भी खर्च नहीं किया है। उन्होंने कहा कि बजट में इस योजना हेतु जो 9300 करोड़ रूपये की घोषणा की गई है वह कार्य तो मात्र झालावाड़,

भरतपुर और अलवर में ही सम्पन्न होंगे और उसके पश्चात् अन्य जिलों को तो पीने का भी पानी प्राप्त होना मुश्किल है । वैसे भी पूर्व में नियोजित योजना से अब 200 एमसीएम पानी प्रदेश को कम मिलेगा। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री से इस योजना को लेकर विधानसभा में प्रदेश की जनता की ओर से जवाब मांगा जायेगा, क्योंकि केन्द्रीय मंत्री के इशारे पर सड़क निर्माण के लिये भी विशेष प्रावधान अलवर जिले के लिये हुये हैं और ईआरसीपी योजना का भी स्वरूप बदल गया । उन्होंने कहा कि जिस प्रकार से ईआरसीपी- पीकेसी की कार्य योजना की घोषणा बजट में हुई है, अलवर,

भरतपुर, झालावाड़ के अलावा अन्य किसी जिले को पानी मिलना सम्भव नहीं है। उन्होंने कहा कि पिछले बजट घोषणाओं की 40 प्रतिशत भी क्रियान्विति नहीं हुई है, जिसके बहुत सारे उदाहरण है, जैसे जयपुर के झालाना में फॉरेस्ट एण्ड वाईल्ड लाईफ ट्रेनिंग इन्स्टीट्यूट नहीं बना, ग्रीन फील्ड एक्सप्रेस वे, खासकर कोटपूतली आदि के लिये घोषणा हुई थी किन्तु नहीं बने और डीपीआर भी नहीं बनी। उन्होंने कहा कि खाटू श्याम मंदिर कोरिडोर के लिये 100 करोड़ की घोषणा हुई थी, लेकिन ना तो डीपीआर बनी और ना कार्य हुआ। उन्होंने कहा कि अलवर के सरिस्का में ईको सेनसिटिव जोन भी घोषित नहीं हुआ है, बांदीकुई के पास इण्डस्ट्रीयल ऐरिया में लोजिस्टिक हब भी नहीं बना ।

उन्होंने कहा कि डूंगरपुर में आदिवासी महापुरूषों के स्मारक बनाने की भी घोषणा हुई थी, किन्तु कार्य नहीं हुये और अब इस क्षेत्र में ट्यूरिज्म सर्किट की घोषणा कर दी गई है जबकि प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी ने मानगढ़ धाम आकर तीन प्रदेशों की सरकार से स्मारक विकसित करने हेतु बात कही थी और राजस्थान की तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने 100 करोड़ रूपये का प्रावधान इस हेतु कर दिया था, किन्तु भाजपा की सरकार बनने के बाद ना तो उस घोषणा पर कार्य हुआ और ना ही बजट घोषणाओं को ही इन्होंने पूरा किया।

उन्होंने कहा कि आज गुजरात, मध्यप्रदेश और राजस्थान तीनों प्रदेशों में भाजपा सरकार है किन्तु प्रधानमंत्री द्वारा मानगढ़ धाम के विकास के लिये किसी प्रकार के निर्देश इन सरकारों को नहीं दिये गये हैं । उन्होंने कहा कि आठ नये बने जिलों के बजट में घोषित एक हजार करोड़ रूपये ऊंट के मुँह में जीरे बराबर है और ना काफी है। उन्होंने कहा कि इन्फ्रास्ट्रक्चर के लिये कोई विशेष प्रावधान नहीं किये गये, मामूली संख्या में स्कूल, कॉलेज और चिकित्सालय खोलने की घोषणा निराशाजनक है।

उन्होंने कहा कि भाजपा सरकार के बजट में चिकित्सा और शिक्षा, मीसिंग लिंक सड़कों के लिये कोई प्रावधान नहीं है और ना ही युवाओं को रोजगार देने का कोई विजन दिखाई दिया है। उन्होंने कहा कि एमएलए लैड फण्ड से विधानसभा विधायक सुनवाई केन्द्र बनवाने हेतु एक कमरा 10 लाख रूपये में बनाने की घोषणा की गई जो हास्यास्पद है, क्योंकि एमएलए लैड फण्ड विधायक की अनुशंषा पर खर्च होता है और उसके प्रावधानों में विधायक सुनवाई केन्द्र का कार्य ही जोड़ा गया है, अलग से कोई फण्ड नहीं दिया गया है।

उन्होंने कहा कि कोई नई नगरपालिका नहीं बनाई गई, ना ही वन स्टेट वन इलेक्शन की चर्चा हुई, अन्यथा नये नगरपालिकायें, पंचायत समिति या पुनर्सीमांकन के पश्चात् बनी पंचायतों के लिये नये भवन हेतु बजट प्रावधान दिया जाना चाहिये था। उन्होंने कहा कि बजट में 50 हजार नये कृषि कनेक्शन देने की बात कही गई है जबकि 50 हजार से ज्यादा किसान पिछले 12 महिने से डिमाण्ड नोटिस जमाकर कनेक्शन मिलने की आस में बैठे हैं, जब उन्हें कनेक्शन नहीं दे पा रहे हैं तो नये कृषि कनेक्शन कैसे देंगे। उन्होंने कहा कि बजट से प्रदेश के युवा, किसान, महिला, आदिवासी, दलित, पिछड़े सहित सभी वर्ग निराश है।

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