राजस्थान सरकार ने बजट में स्कूली शिक्षा की अनदेखी की : संयुक्त अभिभावक संघ

० आशा पटेल ० 
जयपुर। 
प्रदेश भाजपा सरकार ने अपने कार्यकाल का दूसरा बजट पेश किया, इस बजट को लेकर शिक्षा से जुड़े अभिभावकों के प्रमुख संगठन संयुक्त अभिभावक संघ ने अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि राजस्थान सरकार ने अपने इस बजट में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को पूरी तरह से नजरअंदाज कर 0 अंक वाला बजट पेश किया, इस बजट से अभिभावकों को बहुत आशा थी कि राज्य सरकार स्कूली शिक्षा पर कुछ अहम सुधार करेगी, किंतु राज्य सरकार ने अभिभावकों की आशाओं को निराशा में तब्दील करने वाला बजट पेश किया। अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि बजट में कोचिंग सेंटरों में बढ़ती आत्महत्या, निजी स्कूलों का मनमानी फीस, स्कूलों में छात्र-छात्राओं की सुरक्षा, विद्यार्थियों के सोश्यल मीडिया उपयोग जैसे किसी भी मामले पर कोई चर्चा नहीं ।
राजस्थान प्रदेश प्रवक्ता अभिषेक जैन बिट्टू ने कहा कि बजट को देखकर यह कहने में कोई अतिशयोक्ति नहीं होगी कि वर्तमान सरकार पूरी तरह से शिक्षा विरोधी सरकार की भूमिका का निर्वहन कर रही है इसलिए इस बजट में ना तो कोचिंग सेंटरों में विद्यार्थियों द्वारा बढ़ते आत्महत्या के चलन को ध्यान में रखा गया, ना निजी स्कूलों की बढ़ती मनमानी फीस और प्रताड़ना को ध्यान में रखा, ना सरकारी और निजी स्कूलों में छात्र हो या छात्रा दोनों की सुरक्षा व्यवस्था पर कोई ध्यान नहीं दिया, अनफिट स्कूलों के वाहनों से हर दुघटनाओं के शिकार विद्यार्थी हो रहे है ना उस पर ध्यान दिया,

 ना प्रदेश के निजी स्कूलों पर लागू फीस एक्ट 2016-17 कानून जिसे सुप्रीम कोर्ट ने अनिवार्यता के साथ लागू करने का आदेश दिया हुआ है उस पर कोई प्रावधान किया और आरटीई (राइट टू एजुकेशन) के तहत होने वाले दाखिले प्रक्रिया पर सरकार ने कोई ध्यान दिया। प्रदेश का अभिभावक बहुत विकट स्थिति के दौर से गुजर रहा है और मजबूरन निजी स्कूलों की मनमानियां का शिकार हो रहा है लाखों शिकायतों के बावजूद कार्यवाही ना होने से हताश निराश अभिभावकों को बजट से बहुत आशा थी जिसे राजस्थान सरकार ने पूरी तरह से धराशाही कर दिया।

जैन ने कहा कि यह कहने में कोई सकोच नहीं होगा कि शिक्षा को लेकर अभिभावक वर्ग जातियों, धर्मों और अपने - अपने प्रोफेशन में बंटा हुआ, वह यह भूल चुका है वह अभिभावक है जिसका फायदा ना केवल निजी स्कूल, कॉलेज, कोचिंग संचालक उठा रहे है बल्कि राज्य सरकार भी इस बिखराव का फायदा उठाकर अभिभावकों को ठगने और तोड़ने की योजनाओं पर कार्य कर रहा है। यह बजट ना केवल अभिभावक विरोधी बल्कि यह बजट पूरी तरह से शिक्षा विरोधी बजट जो ना केवल गरीबों का मजाक उड़ा रही है बल्कि जरूरतमंद और असहाय वर्ग को भी अपमानित कर रही है।

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