प्रतिपक्ष की आवाज दबायी जाती है और मंत्री सदन में जवाब नहीं देते है : गोविन्द सिंह डोटासरा
० संवाददाता द्वारा ०
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि विधानसभा में गतिरोध प्रारम्भ हुआ जब सरकार के मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को लेकर अशोभनीय टिप्पणी की तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उक्त टिप्पणी को विधानसभा की कार्यवाही से निकालने की मांग की जब मांग नहीं मानी गई तो वे डायस पर गए और उन्होंने मंत्री की ओर इंगित करते हुए टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि अचानक क्या खयाल आया कि विधानसभा अध्यक्ष उठकर जाने लगे और फिर विधानसभा स्थगित कर गए।
जयपुर। राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि विधानसभा में गतिरोध प्रारम्भ हुआ जब सरकार के मंत्री ने पूर्व प्रधानमंत्री इन्दिरा गांधी को लेकर अशोभनीय टिप्पणी की तथा नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने उक्त टिप्पणी को विधानसभा की कार्यवाही से निकालने की मांग की जब मांग नहीं मानी गई तो वे डायस पर गए और उन्होंने मंत्री की ओर इंगित करते हुए टिप्पणी को कार्यवाही से हटाने की प्रार्थना की। उन्होंने कहा कि अचानक क्या खयाल आया कि विधानसभा अध्यक्ष उठकर जाने लगे और फिर विधानसभा स्थगित कर गए।
उन्होंने कहा कि पन्द्रह मिनट बाद जब विधानसभा अध्यक्ष ने चैम्बर में बुलाया तो जाने पर बिना कोई बात करे विधानसभा अध्यक्ष ने सीधे ही माफी मांगने को कहा जबकि उनसे निवेदन किया गया कि विपक्ष ने केवल टिप्पणी हटाने की मांग की है यह आक्रोश केवल मंत्री के बयान पर व्यक्त किया गया है किन्तु विधानसभा अध्यक्ष ने उनके सहित 6 विधायकों को बजट सत्र के लिए निलम्बित कर दिया जबकि डायस पर तो केवल तीन ही सदस्य गए थे। उन्होंने कहा कि दो दिन तक सरकार की ओर से गतिरोध समाप्त करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया और कांग्रेस के नेताओं द्वारा विधानसभा अध्यक्ष से सम्पर्क करने पर रूखा व्यवहार किया गया फिर भी सभी ने यह माना कि शायद गुस्से में होंगे विधानसभा में आएंगे तो बैठकर चर्चा हो जाएगी।
उन्होंने कहा कि संसदीय कार्य मंत्री जोगाराम पटेल द्वारा कहा गया कि प्रकरण को लेकर खेद व्यक्त किया जाए और इस गतिरोध को समाप्त किया जाए तब उनसे तय पाया गया कि सम्पूर्ण घटनाक्रम को लेकर खेद व्यक्त किया जाएगा। उन्होंने कहा कि यह बात केवल जोगाराम पटेल मंत्री से हुई थी उसके पश्चात् विधानसभा अध्यक्ष ने हो सकता है मंत्री की बात को स्वीकारा ना हो और विधानसभा की कार्यवाही प्रारम्भ हो गई इस पर मुख्य सचेतक से बात करने पर उन्होंने विधानसभा की कार्यवाही स्थगित करवाने कर आने की बात कही और चले गए लेकिन विधानसभा की कार्यवाही चलती रही और सरकार की ओर से उन्हें व नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जो विधानसभा अध्यक्ष के कक्ष में बैठे थे जिसका विरोध करने पर विधानसभा की कार्यवाही स्थगित हुई।
उन्होंने कहा कि सदन के स्थगित होने के पश्चात् एकत्रित कांग्रेस विधायकों के साथ बातचीत के ब्यौरे को लेकर चर्चा हुई किन्तु इस चर्चा में किसी प्रकार के अमर्यादित व असभ्य शब्दों का इस्तेमाल नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि मीडिया में कोई समाचार चलने की बात विधानसभा अध्यक्ष ने स्थगन के पश्चात् हुई चर्चा में बतायी और कहा कि इस पर भी खेद व्यक्त कर देना नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली की सहमति होने के पश्चात् वे सदन में बुलाये जाने पर गए और तय बिंदुओं पर तीन बार खेद प्रकट कर दिया और विधानसभा अध्यक्ष के द्वारा खेद बोलने पर भी बता दिया तीन बार खेद प्रकट कर चुका हूं अब इस गतिरोध के लिए जिम्मेदार मंत्री से भी खेद प्रकट करवाया जाए, यह मांग स्वीकार किए जाने की बजाए विधानसभा अध्यक्ष ने विधानसभा की कार्यवाही स्थगित कर दी जिसके पश्चात् सभी कांग्रेस सदस्य विधानसभा से बाहर चले गए।
डोटासरा ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर जिसमें वर्णित तथ्यों का कोई रिकॉर्ड नहीं, कोई वीडियो या ऑडियो नहीं और ना ही प्रमाणित है, का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने जिस प्रकार सदन चलाते हुए उनके विरूद्ध गैर वाजिब और गलत टिप्पणियां की है वो भी तब सदन के सदस्य का अधिकार होता है उसकी गैर मौजूदगी में सदस्य के विरूद्ध बिना नोटिस दिए कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, रिकॉर्ड पर नहीं ली जा सकती। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा तो इस तरह की टिप्पणियां करने से तार-तार हो गई जो कि स्वयं विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मर्यादा का ध्यान नहीं रखने के कारण हुई है।
डोटासरा ने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही में एक समाचार पत्र में प्रकाशित खबर जिसमें वर्णित तथ्यों का कोई रिकॉर्ड नहीं, कोई वीडियो या ऑडियो नहीं और ना ही प्रमाणित है, का हवाला देते हुए विधानसभा अध्यक्ष ने जिस प्रकार सदन चलाते हुए उनके विरूद्ध गैर वाजिब और गलत टिप्पणियां की है वो भी तब सदन के सदस्य का अधिकार होता है उसकी गैर मौजूदगी में सदस्य के विरूद्ध बिना नोटिस दिए कोई टिप्पणी नहीं की जा सकती, रिकॉर्ड पर नहीं ली जा सकती। उन्होंने कहा कि सदन की मर्यादा तो इस तरह की टिप्पणियां करने से तार-तार हो गई जो कि स्वयं विधानसभा अध्यक्ष द्वारा मर्यादा का ध्यान नहीं रखने के कारण हुई है।
उन्होंने कहा कि सदन में उनके विरूद्ध बड़ी असम्मानजनक भाषा का इस्तेमाल किया गया और यहां तक टिप्पणी की गई कि गोविन्द सिंह डोटासरा सदन में आने लायक नहीं है जबकि वे विधानसभा में चौथी बार सदस्य जनता के वोट से चुनकर आए है। उन्होंने कहा कि वसुन्धरा सरकार के समय उन्हें सर्वश्रेष्ठ विधायक का पुरस्कार मिला था। उन्होंने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी पूर्व में जब विधायक थे तो अनेक बार डायस पर चढ़ने के कारण निलम्बित हो चुके है और वे तो पहली बार ही हुए है, गलत हुए है उसके बावजूद सदन चले इसलिए खेद प्रकट करने के लिए तैयार हुए।
उन्होंने कहा कि लोकसभा, राज्यसभा अथवा उच्चतम न्यायालय द्वारा प्रस्तुत किसी नजीर में ऐसा कोई उदाहरण नहीं है कि इस प्रकार की इजाजत दी गई हो कि एक समाचार पत्र में प्रकाशित अथवा न्यूज चैनल पर चली खबर के आधार पर विधानसभा में चर्चा करवायी जाएं और स्पीकर द्वारा यह व्यवस्था दी जाए कि सदस्य पांच साल सदन में आने लायक नहीं है या विधायक बनने लायक नहीं है। उन्होंने कहा कि ऐसा उदाहरण किसी सदन में आज तक देखने को नहीं मिला।
उन्होंने कहा कि इससे बड़ा अपमान देश में किसी भी चुनावी प्रक्रिया अथवा लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत् नहीं किया गया है उसके बावजूद वे तैयार है कि यदि उन्हें कोई भ्रम हुआ है तो वे उसको दूर करने के लिए उनके घर तक जा सकते है और चर्चा कर भ्रम दूर करने का कार्य कर सकते है तथा खेद भी प्रकट कर सकते हैं लेकिन अपमानित होना सहन नहीं कर सकते। उन्होंने कहा कि कोई यह सोचे कि आरएसएस के इशारे पर विपक्ष की आवाज केवल इसलिए दबाई जाए कि सत्ता पक्ष अपने मन की करता रहे यह ठीक नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि कोई वास्तविक मुद्दा है तो आपसी चर्चा से उसका समाधान निकाला जा सकता है तथा चर्चा करने से उन्हें कोई गुरेज नहीं है।
उन्होंने कहा कि वे स्पीकर का सम्मान करते है अपने से बड़ा मानते है ऐसी परिस्थिति में यदि कोई कही और अनकही बात से आहत होंगे तो उन्हें खेद प्रकट करने में आपत्ति नहीं है किन्तु मंत्री अविनाश गहलोत द्वारा पूर्व प्रधानमंत्री स्व. इन्दिरा गांधी के विरूद्ध की गई टिप्पणी आज भी सदन के रिकॉर्ड पर मौजूद है उसे हटाया क्यों नहीं गया। उन्होंने कहा कि मंत्री जोगाराम पटेल कह रहे हैं कि मंत्री अविनाश गहलोत के खेद प्रकट करने के संबंध में कोई चर्चा ही नहीं हुई जबकि विधानसभा अध्यक्ष उक्त मंत्री द्वारा खेद प्रकट करने की सहमति बनना बता रहे है।
उन्होंने कहा कि विधानसभा की कार्यवाही से अमर्यादित टिप्पणी तो निकाली नहीं गई और समस्त असंवैधानिक, अलोकतांत्रिक कार्यवाही उनका अपमान करने व छवि धूमिल करने के लिए विधानसभा में की गई है। उन्होंने कहा कि सत्ता के मद में उनके विरूद्ध विधायकों से विधानसभा कार्यवाही में टिप्पणियां करवाई गई और स्पीकर ने यह व्यवस्था दे दी कि डोटासरा विधायक बनने लायक ही नहीं है। उन्होंने कहा कि यह लोकतंत्र नहीं है यह भाजपा और आरएसएस का फासीवादी वास्तविक चेहरा है जिसमें विपक्ष को अपमानित करो, एजेंसियों का दुरूपयोग किया जाता है, प्रतिपक्ष की आवाज दबायी जाती है और मंत्री सदन में जवाब नहीं देते है।
उन्होंने कहा कि नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के निर्देश पर उन्हें जो आदेश दिया जाएगा वह करेंगे यदि सदन से इस्तीफा देने का आदेश दिया जाएगा तो उसकी भी पालना होगी क्योंकि राजस्थान के लोगों के मुद्दों के लिए विधानसभा है उसका सत्ता के मद में सरकार दुरूपयोग ना करें। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने कहा कि गलत तथ्य बताए जा रहे है कि विपक्ष नहीं चाहता कि वार्ता हो जबकि वास्तविकता यह है कि विपक्ष से किसी ने वार्ता हेतु सम्पर्क नहीं किया और जब-जब सम्पर्क किया जाएगा तो जवाब भी दिया जाएगा क्योंकि विपक्ष भी वार्ता कर सदन का गतिरोध दूर करना चाहता है जिससे आमजनता के मुद्दों पर चर्चा की जा सके।
उन्होंने कहा कि बजट की हकीकत जनता के सक्षम विपक्ष बताना चाहता है जो आंकड़ों का खेल सरकार ने बजट में प्रस्तुत किया है उसकी सच्चाई सदन में बताने को आतुर है, इसी बात से घबरा कर सरकार ने गतिरोध जारी रहने दिया है। उन्होंने कहा कि सदन में ऐसा नहीं होता कि मंत्री मनमर्जी से कुछ भी बोल दे और उनकी टिप्पणी को कार्यवाही से हटवाने की मांग की जाए तो विपक्ष के सदस्यों का निलम्बन कर दिया जाए। उन्होंने कहा कि तीन रात तक विपक्ष सदन में धरने पर बैठा रहा तीन सदस्यों ने अलग-अलग सदन में खेद भी प्रकट कर दिया किन्तु उक्त अमर्यादित टिप्पणी आज भी सदन की कार्यवाही का हिस्सा है।
उन्होंने कहा कि बार-बार आग्रह करने के बाद भी सत्ता पक्ष ने मंत्री से खेद प्रकट करने के लिए दो शब्द नहीं कहलवाएं। उन्होंने कहा कि वे संसदीय कार्य मंत्री, मुख्य सचेतक तथा मुख्यमंत्री से भी बात कर गतिरोध दूर करने का आग्रह कर चुके है। उन्होंने कहा कि सदन के नेता ही आकर यदि कोई बात कह देते तो गतिरोध दूर हो जाता किन्तु सदन के नेता के पास ही गतिरोध दूर करने हेतु फुर्सत नहीं है। उन्होंने कहा कि सरकार ने सदन में गतिरोध केवल इसलिए बना रखा है क्योंकि मंत्रियों की परफोर्मंस खराब है और वे सदन में विपक्ष के सवालों का जवाब नहीं दे पा रहे है, इस बात की जानकारी मुख्यमंत्री को भी है।
उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री अनेकों बार अपने मंत्रियों को डांट चुके है और तैयारी के साथ आने हेतु कह चुके है जो अखबार की सुर्खियां भी बनी किन्तु मंत्री जवाब नहीं दे पाते इसीलिए सरकार गतिरोध बनाए रखना चाहती है। उन्होंने कहा कि उन्हें अंदेशा है कि सरकार इसी गतिरोध में बजट सत्र समाप्त करना चाहती है ताकि कोई चर्चा ना हो और सरकार की पोल जनता के सामने ना खुले। उन्होंने कहा कि पहली बार बजट पेश हुआ एक लाख नौकरियां देने की घोषणा की गई, दूसरी बार बजट में चार लाख नौकरियां देने की घोषणा हुई और तीसरी बार अब प्रस्तुत बजट में सवा लाख नौकरियां देने की घोषणा हुई है, प्रश्न यह है कि सरकार ने अपने कार्यकाल में कितनी भर्तियांें निकाली और उनमें से कितनों को नियुक्तियां दी, ऐसे प्रश्नों से बचने के लिए सदन में गतिरोध को सरकार समाप्त नहीं करना चाहती है।
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