स्व.विश्वास कुमार की स्मृति में 'पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता' पर परिचर्चा
जयपुर। पिंकसिटी प्रेस क्लब में स्व. विश्वास कुमार की स्मृति में 'पत्रकारिता में कृत्रिम बुद्धिमत्ता' विषय पर परिचर्चा का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोड़ा ने की। परिचर्चा में वरिष्ठ पत्रकार नारायण बारेठ ने कहा कि एआई एक विनाशक तकनीक है, जो मानव के लिए खतरा बन सकती है। उन्होंने कहा कि एआई पत्रकारों से बेहतर काम कर रही है, जिससे अखबारों को नुकसान हो रहा है। उन्होंने एआई के कारण गलत सूचनाओं के प्रसार और निजता के खतरे पर भी चिंता व्यक्त की।
डीआईपीआर के उप निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा कि एआई नौकरियां पैदा कर सकती है और मानव की तुलना में कई गुना तेजी से काम कर सकती है। उन्होंने एआई को क्रांति बताते हुए कहा कि यह डेटा माइनिंग को आसान बना रही है और सोशल मीडिया को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने एआई के लाभों के बारे में बताते हुए कहा की इससे कार्य क्षमता में वृद्धि हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार सनी सेबेस्टियन ने कहा कि एआई से नौकरियों को खतरा है और यह वैश्विक परिदृश्य में परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि एआई फेक न्यूज और डीप फेक जैसी समस्याओं का कारण बन रही है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोड़ा ने एआई से कॉपीराइट के खतरे और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के खत्म होने की बात कही। जयपुर डिस्कॉम के पूर्व सीएमडी आर.जी. गुप्ता ने स्व. विश्वास कुमार को एक सादा व्यक्तित्व और अच्छे इंसान के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि एआई कहां तक जाएगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ संतुलन भी जरूरी है। परिचर्चा में भाग लेने वाले सभी वक्ताओं ने एआई के लाभों और खतरों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एआई के उपयोग में सावधानी बरतने और इसके दुरुपयोग को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा ने किया, सुनीता चतुर्वेदी और दीपशिखा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र सिंह राठौड़, प्रबन्ध कार्यकारिणी सहित अनेक वरिष्ठ एवं युवा पत्रकार उपस्थित थे।
डीआईपीआर के उप निदेशक आशीष खंडेलवाल ने कहा कि एआई नौकरियां पैदा कर सकती है और मानव की तुलना में कई गुना तेजी से काम कर सकती है। उन्होंने एआई को क्रांति बताते हुए कहा कि यह डेटा माइनिंग को आसान बना रही है और सोशल मीडिया को भी प्रभावित कर रही है। उन्होंने एआई के लाभों के बारे में बताते हुए कहा की इससे कार्य क्षमता में वृद्धि हो रही है। वरिष्ठ पत्रकार सनी सेबेस्टियन ने कहा कि एआई से नौकरियों को खतरा है और यह वैश्विक परिदृश्य में परिवर्तन ला रही है। उन्होंने कहा कि एआई फेक न्यूज और डीप फेक जैसी समस्याओं का कारण बन रही है।
कार्यक्रम के अध्यक्ष वरिष्ठ पत्रकार राजेन्द्र बोड़ा ने एआई से कॉपीराइट के खतरे और पत्रकारिता की स्वतंत्रता के खत्म होने की बात कही। जयपुर डिस्कॉम के पूर्व सीएमडी आर.जी. गुप्ता ने स्व. विश्वास कुमार को एक सादा व्यक्तित्व और अच्छे इंसान के रूप में याद किया। उन्होंने कहा कि एआई कहां तक जाएगी, यह कहना मुश्किल है, लेकिन दक्षता बढ़ाने के साथ-साथ संतुलन भी जरूरी है। परिचर्चा में भाग लेने वाले सभी वक्ताओं ने एआई के लाभों और खतरों पर अपने विचार व्यक्त किए। उन्होंने एआई के उपयोग में सावधानी बरतने और इसके दुरुपयोग को रोकने की आवश्यकता पर बल दिया। कार्यक्रम का संचालन वरिष्ठ पत्रकार जगदीश शर्मा ने किया, सुनीता चतुर्वेदी और दीपशिखा शर्मा ने धन्यवाद ज्ञापित किया। प्रेस क्लब अध्यक्ष डॉ. वीरेन्द्र सिंह राठौड़, प्रबन्ध कार्यकारिणी सहित अनेक वरिष्ठ एवं युवा पत्रकार उपस्थित थे।

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