संस्कृत में ब्रह्मांड की सभी भाषाओं का समावेश है : स्वामी रामदेव

० योगेश भट्ट ० 
 हरिद्वार /  हरिद्वार के पतंजलि विश्वविद्यालय में चल रहे अखिल भारतीय शास्त्र प्रतियोगिता के अवसर पर स्वामी रामदेव ने कहा कि यह कार्य वस्तुत : आत्मोत्सव तथा ज्ञानोत्सव का संवाहक है । संस्कृत में ब्रह्मांड की सभी भाषाओं का समावेश है। लेकिन कुछ इसको पढ कर अपने आप को ज्ञानी समझने लगते हैं । अतः संस्कृत के सार्वभौमिक ज्ञान प्रणाली को देखते हुए उन्हें अपनी अज्ञानता का यह समझ कदापि नहीं चाहिए । इसका बहुत बड़ा कारण यह भी है कि जीवन का समग्र विकास संस्कृत में ही सन्निहित है। यही कारण है कि जीवन का परम लक्ष्य संस्कृत को ही ध्यान में रख कर करना चाहिए । 
स्वामी का विचार था कि संस्कृतज्ञों में इतनी शक्ति होती है कि वे वेद के परा-अपरा ज्ञान के आधार पर दुनिया में अपना साम्राज्य खड़ा कर सकते हैं। अतः संस्कृत को पूजा-पाठ तक ही सीमित नहीं समझी जाय , बल्कि संस्कृत के अनुरागी राष्ट्र की चतुर्दिक जागृति के पुरोहित बनें। उन्होंने आगे कहा कि शास्त्र रक्षा के लिए स्मृति ज्ञान बहुत ही आवश्यक है, लेकिन छात्र छात्राओं को चाहिए कि वे शास्त्रों को आचरण में भी उतारें। इससे मानवता के कल्याण का मार्ग प्रशस्त होगा । इतिहास के नाम पर झूठे तथ्यों को प्रस्तुत किये जा रहें हैं और ब्रह्माण्ड तथा संस्कृत को भी उपेक्षा की गयी है ।

प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी , आचार्य बालकृष्ण तथा प्रो दिनेश शास्त्री और प्रो साध्वी देवप्रिया के साथ अन्य अतिथियों की उपस्थिति में स्वामी रामदेव ने अखिल भारतीय संस्कृत शास्त्रीय स्पर्धाओं में आमन्त्रित निर्णायक के रूप में आये विद्वानों और मार्गदर्शकों को अंगवस्त्र और पुस्तकें आदि भेंट की ।

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