देश के तीनों केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालयों के बीच आकादमिक समझौता

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली : तिरुपति स्थित राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय और केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय, दिल्ली के बीच बैठक में निर्णय लिया गया कि ये तीनों विश्वविद्यालयों मिल कर राष्ट्रीय शिक्षा नीति -2020 के अनुसार संस्कृत संवर्धन तथा तथा उसके नवाचारी प्रयोग को सार्थक रुप में क्रियान्वयन करने का प्रभावी प्रयास करेगा । इसके लिए एक आकादमिक समझौता (एम .ओ. यू. ) भी किया गया। इस अवसर पर केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली के कुलपति प्रो श्रीनिवास वरखेड़ी ने कहा कि यह समझौता संस्कृत के वैश्विक उन्नयन के लिए मील का पत्थर साबित हो सकता है ।
इस एम. ओ .यू .के अनुसार तीनों केन्द्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय आपस में मिल कर स्नातक ( शास्त्री ) तथा स्नातकोत्तर (आचार्य ) पाठ्यक्रमों का मानकीकरण के साथ भारतीय ज्ञान परम्परा (आई .के. एस.) को बढ़ावा देने के लिए इस तरह की सामग्रियों को आपस में साझा करेंगे । इसके अतिरिक्त शोध के लिए तीनों विश्वविद्यालयों में समान नियमावली भी लागू करने की बात की गयी । ये तीनों विश्वविद्यालय क्रेडिट ट्रांसफर, छात्रवृत्ति वितरण के समान अवसर ,संकाय विनिमय कार्यक्रम, कौशल विकास ,ऑनलाइन पाठ्यक्रमों की मान्यता, इंटर्नशिप कार्यक्रमों के सुव्यवस्थित संचालन, संकाय सदस्यों के लिए उन्मुखीकरण , पाठ्यक्रम (रिफ्रेशर कोर्स) , प्रशिक्षण कार्यक्रमों तथा संयुक्त अनुसंधान आदि विषयों पर बल दिया जाएगा ।
 भारत सरकार के निर्देश में ये तीनों विश्वविद्यालय प्रत्येक वर्ष इक्ट्ठे मिल कर इस उत्कर्ष महोत्सव को आयोजित करता है। तीनों विश्वविद्यालयों में कार्य संपादन की सक्रियता तथा पारदर्शिता एकसूत्र में आबद्ध होकर उन्नयनी हो सके। बैठक में राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , तिरुपति के कुलपति प्रो. जी. एस. आर. कृष्णमूर्ति तथा श्री लाल बहादुर शास्त्री राष्ट्रीय संस्कृत विश्वविद्यालय , दिल्ली के कुलपति प्रो. मुरली मनोहर पाठक ने राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एन.ई.पी.-2020 )के क्रियान्वयन तथा विभिन्न शैक्षणिक क्षेत्रों में इन विश्वविद्यालयों द्वारा किए गए नवाचारों की चर्चा करते संस्कृत के क्षेत्र में इन निर्णयों को कार्यान्वित करने के लिए विभिन्न चुनौतियों तथा उनके समाधानों को लेकर भी अपने विचार रखें ।

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