ग्राम पंचायतों ने महिलाओं के निर्णय लेने और नेतृत्व विकास की ओर कदम उठाया

० संवाददाता द्वारा ० 
 नयी दिल्ली : अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में, देश भर की ग्राम पंचायतों ने महिला सभाओं का आयोजन करके महिलाओं के निर्णय लेने में और नेतृत्व विकास की ओर एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। ऐसे मग़बूत मंच द्वारा जेन्डर-उत्तरदायी शासन की नींव रखी गई जहाँ यह सुनिश्चित किया गया कि महिलाओं की आवाज़ न केवल सुनी जाए बल्कि धरातल पर भी विकास के लिए सक्रिय रूप से उनकी सुरक्षा, शिक्षा, स्वास्थ्य, पोषण, आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक सशक्तिकरण को बढ़ावा दिया जाए।
ये महिला सभाएं पंचायती राज मंत्रालय द्वारा सतत विकास लक्ष्यों के स्थानीयकरण की थीम 9 को आगे बढ़ाने के प्रयासों का प्रत्यक्ष परिणाम हैं, जिसमें महिला-हितैषी पंचायतों को विकसित करने पर विशेष जोर दिया गया है। संयुक्त राष्ट्र जनसंख्या कोष (यूएनएफपीए), इस पहल को बढ़ावा देने के लिए क्षमता निर्माण संबंधित प्रयासों हेतु मंत्रालय का तकनीकी सहयोगी है। पंचायती राज मंत्रालय द्वारा यूएनएफपीए के तकनीकी सहयोग से दिल्ली में दो दिवसीय राष्ट्रीय कार्यशाला का आयोजन किया गया 
जिसमे "सशक्त पंचायत-नेत्री अभियान" का शुभारंभ किया गया, जिसका उद्देश्य देश भर में 770 से अधिक ग्राम पंचायतों को महिला हितैषी ग्राम पंचायत में विकसित करना है, जिसके अंतर्गत हर ज़िले को कम से कम एक मॉडल महिला-हितैषी ग्राम पंचायत विकसित करने का निर्देश जारी किया गया । । इस कार्यशाला में 1200 निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों, नीति निर्माताओं और पंचायत के प्रतिनिधियो ने भाग लिया ।

राज्य स्तर पर भी इंदिरा गांधी पंचायती राज एवं ग्रामीण विकास संस्थान (आईजीपीआरएंडजीवीएस) और पंचायती राज विभाग द्वारा यूएनएफपीए राजस्थान के तकनीकी सहयोग से क्षमता निर्माण कार्यशाला आयोजित की गई। इस कार्यशाला में निर्वाचित प्रतिनिधियों और ग्राम विकास अधिकारियों को अपनी पंचायतों को महिला और बालिका-हितैषी पंचायतों के रूप में विकसित करने के लिए आवश्यक कौशल और जानकारी दी गई

 जिसके आधार पर लगभग 46 प्रतिभागियों ने अपनी पंचायतों के लिए जेंडर समानता को सुनिश्चित करने हेतु गतिविधियों की कार्य योजनाएँ तैयार कीं । इस कार्यक्रम में आईजीपीआर एंड जीवीएस के महानिदेशक डॉ. सुबोध अग्रवाल, अतिरिक्त निदेशक रामस्वरूप, उप निदेशक सावित्री शर्मा और यूएनएफपीए राजस्थान की युवा एवं जेंडर विशेषज्ञ त्रिशा पारीक भी उपस्थित रही ।

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