आर्च कॉलेज में आर्ट थेरेपी वर्कशॉप,70 से ज्यादा शिक्षकों ने लिया भाग
० आशा पटेल ०
जयपुर: आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस ने आर्ट थेरेपी वर्कशॉप ‘अनमास्किंग द आर्टिस्ट विदिन’ का आयोजन किया। इस कार्यशाला में जयपुर के विभिन्न स्कूलों से आए 70 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों को रचनात्मकता के माध्यम से मानसिक सुकून और आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर देना था। इस कार्यशाला का संचालन कॉलेज की निदेशक अर्चना सुराना ने किया। उन्होंने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि कैसे कला के ज़रिए हम अपने भीतर के विचारों और भावनाओं को बेहतर समझ सकते हैं। यह आयोजन सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय ट्रस्ट और जयपुर इतिहास महोत्सव के सहयोग से हुआ। वर्कशॉप तीन चरणों में आयोजित की गई, जिसमे पहले चरण 'क्रिएटिव सेरेन्डिपिटी' में शिक्षकों को कॉलेज परिसर में घूमकर आसपास मौजूद चीजों से प्रेरणा लेकर एक सजावटी मास्क तैयार करना था। उन्होंने रंग, पेंट, गोंद, पुराने कपड़े और अन्य सामान का उपयोग करते हुए बेहद सुंदर और अनोखे मास्क बनाए। यह अभ्यास शिक्षकों के लिए एक मेडिटेटिव और रिफ्लेक्टिव अनुभव बन गया। दूसरा चरण "थॉट्स ऑन हैंड्स" में शिक्षकों को ऊन की एक गेंद दी गई और उन्हें कहा गया कि वे उस ऊन के सहारे अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को महसूस करें और व्यक्त करें। यह गतिविधि आत्म-जागरूकता को बढ़ाने और आत्म-संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए थी।
जयपुर: आर्च कॉलेज ऑफ डिजाइन एंड बिजनेस ने आर्ट थेरेपी वर्कशॉप ‘अनमास्किंग द आर्टिस्ट विदिन’ का आयोजन किया। इस कार्यशाला में जयपुर के विभिन्न स्कूलों से आए 70 से अधिक शिक्षकों ने भाग लिया। आयोजन का उद्देश्य शिक्षकों को रचनात्मकता के माध्यम से मानसिक सुकून और आत्म-अभिव्यक्ति का अवसर देना था। इस कार्यशाला का संचालन कॉलेज की निदेशक अर्चना सुराना ने किया। उन्होंने शिक्षकों का मार्गदर्शन करते हुए बताया कि कैसे कला के ज़रिए हम अपने भीतर के विचारों और भावनाओं को बेहतर समझ सकते हैं। यह आयोजन सवाई मान सिंह द्वितीय संग्रहालय ट्रस्ट और जयपुर इतिहास महोत्सव के सहयोग से हुआ। वर्कशॉप तीन चरणों में आयोजित की गई, जिसमे पहले चरण 'क्रिएटिव सेरेन्डिपिटी' में शिक्षकों को कॉलेज परिसर में घूमकर आसपास मौजूद चीजों से प्रेरणा लेकर एक सजावटी मास्क तैयार करना था। उन्होंने रंग, पेंट, गोंद, पुराने कपड़े और अन्य सामान का उपयोग करते हुए बेहद सुंदर और अनोखे मास्क बनाए। यह अभ्यास शिक्षकों के लिए एक मेडिटेटिव और रिफ्लेक्टिव अनुभव बन गया। दूसरा चरण "थॉट्स ऑन हैंड्स" में शिक्षकों को ऊन की एक गेंद दी गई और उन्हें कहा गया कि वे उस ऊन के सहारे अपने भीतर चल रहे विचारों और भावनाओं को महसूस करें और व्यक्त करें। यह गतिविधि आत्म-जागरूकता को बढ़ाने और आत्म-संवाद को प्रोत्साहित करने के लिए थी।
तीसरे चरण में "होल्ड योर ब्रेथ एंड पेंट" में शिक्षकों को सफेद टीशर्ट दी गई और उनसे कहा गया कि वे कुछ सेकंड के लिए अपनी सांस रोककर उस पर पेंट करें। इसके माध्यम से उन्होंने न केवल अपनी कल्पनाशक्ति को आज़माया, बल्कि अपने भीतर के तनाव से भी मुक्त होने का अनुभव किया। इस चरण के अंत में सभी शिक्षकों ने अपनी पेंट की हुई टीशर्ट पहनकर रैंप वॉक भी किया। आर्च कॉलेज की संस्थापक और निदेशक, अर्चना सुराना ने कहा, "यह कार्यशाला हमारे उस विश्वास और उद्देश्य से पूरी तरह जुड़ी है, जिसमें हम डिजाइन संस्कृति को बढ़ावा देने के साथ-साथ मुख्यधारा की शिक्षा में मानसिक सेहत को भी ज़रूरी मानते हैं।"
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