अहिल्याबाई के कार्य और आदर्श आज भी स्मरणीय - देवनानी
जयपुर,। राजस्थान विधान सभा अध्यक्ष वासुदेव देवनानी ने पुण्य श्लोक देवी अहिल्याबाई होलकर के जन्म शताब्दी समारोह के अवसर पर उनके जीवन पर आधारित नाट्य मंचन पर कहा कि राष्ट्र समर्था देवी अहिल्या की पुण्य गाथा का श्रेष्ठ मंच संयोजन किया है। उन्होंने कहा अहिल्याबाई होल्कर उन महान महिला रत्नो में से एक हैं, जिनका नाम भारत के घर-घर में जाना जाता है। वे सर्व कल्याणकारी भारतीय संस्कृति की साक्षात प्रतिमूर्ति रही। भारतीय नारी का ज्वलंत उदाहरण अहिल्या बाई जीवन में संघर्षों से अनेक बार जूझी लेकिन कभी हार नहीं मानी। देवनानी ने कहा कि भारतीय इतिहास में अहिल्याबाई वीरता- धीरता के साथ विनम्रता और शक्ति वैभव की पहचान है। उन्होंने महिलाओं के अधिकारों को बढ़ावा दिया। उन्होंने महेश्वर को सांस्कृतिक और आध्यात्मिक केंद्र बनाया। महेश्वर में घाटों का निर्माण आज भी उनके शासन की समृद्धि और समझदारी को दिखाते हैं। देवनानी ने कहा कि अहिल्याबाई का संघर्ष और सफलताओं से भरा जीवन लोगों के लिए प्रेरणा स्रोत है। भारतीय संस्कृति की प्रतीक अहिल्याबाई के कार्य और आदर्श समाज के लिए स्मरणीय है। उनकी गौरवशाली गाथा हम सभी के लिए प्रेरणा स्रोत है।
बिडला सभागार में अहिल्या बाई होल्कर की 300 वीं जयंती पर नागपुर से आये चालीस कलाकारों ने नाटक का मंचन किया। यह आयोजन विश्वमांग्लय सभा और राज्य के सांस्कृतिक और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मातृत्व को समर्पित संस्था विश्वमांग्लय सभा की ओर से इस नाटक का मंचन देश के 101 जिलों में किया जा रहा है। नाटक की लेखिका डॉ. वृशाली जोशी थी। इस मौके पर उपमुख्यंमत्री दिया कुमारी, सांसद मनोज तिवारी, भैयाजी जोशी, प्रशांत हरतालकर, नीता बूचरा और पूजा देशमुख मौजूद रहें।
लोक माता के रूप में पहचानी जाने वाली अहिल्याबाई ने भारत की समूची मानवता के स्थाई हित को ध्यान में रखकर अनेक ऐतिहासिक और स्मरणीय कार्य किए। आध्यात्मिकता, एकात्मकता और राष्ट्रीयता की सुप्त भावनाओं को जागृत कर उन्होंने सच्चे अर्थों में राष्ट्र निर्माण का कार्य किया था। श्रेष्ठ कार्य, उच्च विचारों और अच्छे जीवन के कारण ही देवी अहिल्या का जीवन प्रेरणामयी व लोकोपयोगी रहा। वे हमारी भारतीय संस्कृति की एक मूल्यवान और अलभ्य मोती थी। श्री देवनानी ने कहा कि सनातन संस्कृति में माताओं की महती भूमिका होती है। घरों में संस्कारों की आवश्यकता है। हम सब लोग घर में बच्चों को समय दे, संस्कारित करें। रामायण का अध्ययन करें।
बिडला सभागार में अहिल्या बाई होल्कर की 300 वीं जयंती पर नागपुर से आये चालीस कलाकारों ने नाटक का मंचन किया। यह आयोजन विश्वमांग्लय सभा और राज्य के सांस्कृतिक और पर्यटन विभाग के संयुक्त तत्वावधान में किया गया। मातृत्व को समर्पित संस्था विश्वमांग्लय सभा की ओर से इस नाटक का मंचन देश के 101 जिलों में किया जा रहा है। नाटक की लेखिका डॉ. वृशाली जोशी थी। इस मौके पर उपमुख्यंमत्री दिया कुमारी, सांसद मनोज तिवारी, भैयाजी जोशी, प्रशांत हरतालकर, नीता बूचरा और पूजा देशमुख मौजूद रहें।
.jpeg)


टिप्पणियाँ