जब कोई पैसा या संपत्ति स्थानांतरित नहीं हुई है,तो मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हुई : कांग्रेस

० आनंद चौधरी ० 
नई दिल्ली, कांग्रेस पार्टी ने नेशनल हेराल्ड मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की कार्रवाई को राजनीतिक प्रतिशोध करार दिया और कहा कि मोदी सरकार विपक्षी नेताओं को डराने व जनता के मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए ईडी का दुरुपयोग कर रही है। ईडी की इस गलत कार्रवाई के विरोध में कांग्रेस ने देशव्यापी विरोध प्रदर्शन आयोजित किए, जिनमें लाखों लोगों ने भाग लेकर अपना समर्थन दिया।

कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन ने कहा कि नेशनल हेराल्ड अखबार पंडित नेहरू जी ने आजादी से पूर्व शुरू किया था, जो आजादी के बाद से आर्थिक तंगी से जूझ रहा था। कांग्रेस पार्टी ने इसे कर्ज देकर चलाया। उन्होंने पूछा कि इसमें भ्रष्टाचार कहां है। उन्होंने कहा, अब मोदी सरकार का कहना है कि कर्ज लेकर इसे चलाना गलत है। सच्चाई ये है कि भाजपा सिर्फ विपक्ष को डराना चाहती है, वो कानून के खिलाफ जाकर काम कर रही है। नई दिल्ली स्थित कांग्रेस कार्यालय में पत्रकार वार्ता करते हुए कांग्रेस संचार विभाग के प्रभारी महासचिव जयराम रमेश और राज्यसभा सांसद डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी में ईडी की कार्रवाई को कानून का मजाक बताते हुए इसे पूरी तरह तथ्यहीन करार दिया।

जयराम रमेश ने कहा कि पिछले दो दिन से प्रतिशोध, उत्पीड़न और धमकी देने की राजनीति जारी है। कांग्रेस नेतृत्व खासतौर पर कांग्रेस संसदीय दल की चेयरपर्सन सोनिया गांधी जी और नेता विपक्ष राहुल गांधी को जानबूझकर निशाना बनाया गया। जनता के मुद्दों, विदेश नीति और आर्थिक संकट से ध्यान हटाने के लिए ये प्रयास किया जा रहा है।  डॉ. अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि इस मामले में बिना किसी पैसे के लेनदेन के मनी लॉन्ड्रिंग का आरोप लगाया जा रहा है। उन्होंने नेशनल हेराल्ड मामले की पृष्ठभूमि बताते हुए कहा कि नेशनल हेराल्ड अखबार को प्रकाशित करने वाली एसोसिएटेड जर्नल्स लिमिटेड (एजेएल) को कांग्रेस ने स्वतंत्रता संग्राम के दौरान स्थापित किया था। 

आर्थिक संकट के कारण अलग-अलग समय में कांग्रेस ने इस कंपनी को ऋण दिया। कई दशकों में यह राशि बढ़कर कुल 90 करोड़ रुपये हो गई। एजेएल के पुनर्गठन के लिए तय हुआ कि इसे ऋण-मुक्त बनाया जाए। इसके लिए यंग इंडिया नामक एक गैर-लाभकारी कंपनी बनाई गई और एजेएल के 90 करोड़ रुपये के ऋण को यंग इंडिया को स्थानांतरित कर दिया गया। एजेएल और नेशनल हेराल्ड को मजबूत करने के लिए इस ऋण को हिस्सेदारी में बदला गया।

सिंघवी ने आगे बताया कि इस कंपनी से गैर-लाभकारी कंपनी कितना भी लाभ कमाए, लेकिन एक भी पैसा लाभांश दिया नहीं जा सकता। ये सीधे तौर पर सेक्शन-आठ के तहत प्रतिबंधित है। इसके तहत कोई वेतन, कोई अन्य सुविधाएं भी नहीं दी जा सकतीं। उन्होंने बताया कि यंग इंडिया कंपनी ने न ही कोई संपत्ति खरीदी और न ही बेची। एजेएल की सारी संपत्तियों का मालिकाना हक अब भी उसके पास ही है; अंतर केवल इतना है कि अब एजेएल की 90-99 प्रतिशत शेयर होल्डिंग यंग इंडिया के पास है। यंग इंडिया में कुछ निदेशक हैं, जिन्हें कोई लाभांश भी नहीं मिलता। उन्होंने पूछा कि जब कोई पैसा या संपत्ति स्थानांतरित नहीं हुई है, तो मनी लॉन्ड्रिंग कैसे हुई।

उन्होंने कहा कि सरकार ने ईडी को अपना इलेक्शन डिपार्टमेंट बना रखा है, और राजनीतिक प्रतिशोध के लिए उसका बार-बार दुरुपयोग किया जा रहा है। ईडी के मामलों में सजा की दर एक प्रतिशत है। ईडी ने जो मामले दर्ज किए हैं, उनमें से 98 प्रतिशत सत्तारूढ़ दल के राजनीतिक प्रतिद्वंद्वियों के खिलाफ हैं।

AJL - Young Indian का सच Associated Journals Ltd क्या है ?
Associated Journals Ltd एक अखबार निकालती है, नाम है - National Herald, इसकी स्थापना नेहरू , रवि अहमद किदवई और पुरुषोत्तम दास टंडन जैसे लोगों ने की थी । National Herald स्वतंत्रता संग्राम की आवाज़ थी जब अधिकांश अख़बार अंग्रेज़ों की बातें छापते थे।National Herald को ब्रिटिश हुकूमत ने बैन भी किया था। AJL पर बहुत क़र्ज़ चढ़ गया, इसलिए कांग्रेस पार्टी ने 2002-2011 के बीच 100 bank transaction/ चेक के माध्यम से उसे ₹90 करोड़ का लोन दिया गया। यह लोन VRS, ग्रेच्युटी, PF, tax, बिजली बिल अदा करने के काम आया।

Young Indian कंपनी क्यों बनी ?
AJL के ऊपर ऋण इतना था कि operations रुक गए थे, इसलिए AJL के ऋण/ debt को equity में बदल करके एक नई कंपनी Young Indian में ट्रांसफर कर दिया गया। यह आम बात है, सरकार ने ख़ुद NCLT में तमाम कंपनियों की debt को equity में बदला है। Young Indian not-for-profit कंपनी है। Young Indian सेक्शन 25 की not for profit कंपनी है - जिसमें एक भी पैसे का मुनाफा, dividend, salary वगैरह शेयरहोल्डर को नहीं मिल सकता। Young Indian के 4 शेयरहोल्डर थे - सोनिया गांधी, राहुल गांधी, ऑस्कर फ़र्नांडिस, मोतीलाल वोरा (तत्कालीन पार्टी अध्यक्ष, महासचिव, संगठन महासचिव और कोषाध्यक्ष)

AJL के 700 शेयरहोल्डर थे, EGM में उनकी सहमति के बाद ही क़र्ज़ शेयर में तब्दील हुआ - जिससे Young Indian भी एक और शेयरहोल्डर बन गया। Young Indian ने AJL का takeover नहीं किया है।
सारे assets और income AJL के हैं, Young Indian के नहीं. कोई भी रेंटल AJL को जाता है - Young Indian या उसके किसी भी शेयरहोल्डर को नहीं है। AJL के पास ₹5000 करोड़ की प्रॉपर्टी नहीं है। एक और झूठ बोला जाता है कि AJL के पास ₹5000 करोड़ की प्रॉपर्टी है। IT Dept ने तो ख़ुद AJL की सारी प्रॉपर्टी का आंकलन मात्र ₹359 करोड़ पर किया है। अब AJL नवजीवन और National Herald पेपर छापता है, क़ौमी आवाज़ निकालता है, websites, social media handles सब चलाता है।

केस टाइम लाइन 2013 : इस मामले में सुब्रमण्यम स्वामी 2013 में कोर्ट गए - उन्होंने 2020 तक यह केस लड़ा। उसके बाद वो मोदी शाह के ख़िलाफ़ बोलने लगे, जिसके चलते मोदी शाह आशंकित हो गए डर के मारे सरकार ने अपनी ओर से एक और केस कर दिया। 2023 में सरकार की ED ने provisional order of attachment जारी किया। 10 April, 2024 को tribunal ने इस provisional order of attachment को कन्फर्म किया, जिसके 365 दिन के अंदर ED को चार्जशीट फाइल करनी थी। उन्होंने 365वें दिन 9 April, 2025 को यह फ़र्ज़ी चार्जशीट फाइल की - जिसको आज सार्वजनिक किया गया है। 

आप 11 साल से सत्ता में हैं, आपके पास कोई साक्ष्य, कोई सबूत, कुछ नहीं है - वरना आप 365वें दिन का इंतज़ार करने को मजबूर नहीं होते। यह सरकार की बौखलाहट ही नहीं उनका मानसिक और नैतिक दिवालियापन भी दिखाता है। मोदी जी, यह कांग्रेस पार्टी है। राहुल और सोनिया गांधी के अपनों का खून इस देश की मिट्टी में शामिल है, यह गीदड़ धमकियाँ किसी और को दिखाइएगा।  हम आपकी विफलताओं, आपकी पूँजीपतियों से साठगांठ, आपकी नफ़रत की राजनीति, आपने इस देश को कितना बेरोजगार और मजबूर बनाया है, आपकी नाक के नीचे महिलाओं, दलितों, पिछड़ों, आदिवासियों का क्या हाल है - उस पर बुलंदी से अपनी आवाज़ उठाते रहेंगे।

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