व्यापार युद्ध का परिणाम आसमान छूते सोना,चांदी के दाम
० महाबीर सिंह ०
दुुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध छिड़ने और इसके थमने के फिलहाल कोई संके्रत नहीं दिखने से जहां एक तरफ 2025 में विश्व व्यापार में गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है वहीं दूसरी तरफ सोना और चांदी के दाम नित नई उंचाईयां छू रहे हैं। सोना जल्द ही एक लाख रूपये पर पहुंचने वाला है, तो चांदी का दाम पहले ही एक लाख रूपये प्रति किलो से उपर निकल चुका है। आम आदमी के साथ साथ छोटे आभूषण विक्रेता इस स्थिति से चिंतित हैं।
हम यह सुनते आये हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी अनिश्चितता का माहौल बनता है, सोना, चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम बढ़ जाते हैं। वही स्थिति इन दिनों देखने को मिल रही है। जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभाली है तब से दुनियाभर के बाजारों में उठापटक मची हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिये जवाबी शुल्क नीति पर अमल शुरू किया है। उनका मानना है कि दुनिया के ज्यादातर देश अमेरिकी सामान पर ज्यादा शुल्क वसूलते हैं जबकि अमेरिका उन देशों से आने वाले माल पर बहुत कम शुल्क वसूलता है,
अब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध यदि थम जाता है। विभिन्न देशों के साथ अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार समझौता हो जाता है, जैसा कि अमेरिकी प्रशासन कह रहा है कि 75 देशों ने उससे बातचीत की पेशकश की है। जापान के साथ व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है। भारत और अमेरिका के बीच भी बातचीत का एक दौर हो चुका है, जल्द ही आगे बातचीत होने के संकेत हैं। वर्ष के अंत तक चीजें सामान्य हो सकतीं हैं। तब क्या सोना, चांदी के दाम नीचे आयेंगे। यह एक बड़ा सवाल है। पिछले एक साल (मार्च 2024 से अप्रैल 2025) के दौरान यदि सोने के दाम पर नजर डाली जाये तो एक-दो महीने मामूली गिरावट दिखाने के बाद दाम फिर बढ़ने लगे।
इन दिनों विश्व बाजार में सोने के दाम 3,300 डालर प्रति ट्राय औंस के रिकार्ड स्तर से उुपर चल रहे हैं। अमेरिकी डालर की कीमत छह माह के निम्नस्तर पर है। कच्चे तेल के दाम नीचे हैं। ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण प्रसंस्कृत खनिजों और उनके विभिन्न उत्पादों के आयात पर अमेरिका की निर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे को लेकर जांच के आदेश दिये हैं। इससे कीमती धातुओं के दाम और तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप कब क्या करेंगे और क्या नहीं करेंगे इसको लेकर अनिश्चितता बरकरार है, और जब तक यह रहेगी सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जायेगा।
दुुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं अमेरिका और चीन के बीच व्यापार युद्ध छिड़ने और इसके थमने के फिलहाल कोई संके्रत नहीं दिखने से जहां एक तरफ 2025 में विश्व व्यापार में गिरावट की आशंका व्यक्त की जा रही है वहीं दूसरी तरफ सोना और चांदी के दाम नित नई उंचाईयां छू रहे हैं। सोना जल्द ही एक लाख रूपये पर पहुंचने वाला है, तो चांदी का दाम पहले ही एक लाख रूपये प्रति किलो से उपर निकल चुका है। आम आदमी के साथ साथ छोटे आभूषण विक्रेता इस स्थिति से चिंतित हैं।
हम यह सुनते आये हैं कि वैश्विक अर्थव्यवस्था में जब भी अनिश्चितता का माहौल बनता है, सोना, चांदी जैसी कीमती धातुओं के दाम बढ़ जाते हैं। वही स्थिति इन दिनों देखने को मिल रही है। जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सत्ता संभाली है तब से दुनियाभर के बाजारों में उठापटक मची हुई है। राष्ट्रपति ट्रंप ने अमेरिका को फिर से महान बनाने के लिये जवाबी शुल्क नीति पर अमल शुरू किया है। उनका मानना है कि दुनिया के ज्यादातर देश अमेरिकी सामान पर ज्यादा शुल्क वसूलते हैं जबकि अमेरिका उन देशों से आने वाले माल पर बहुत कम शुल्क वसूलता है,
इससे अमेरिका को नुकसान होता है। इसलिये उन्होंने दुनिया के तमाम देशों से अमेरिका में होने वाले आयात पर जवाबी शुल्न्क लगाने की घोषणा कर दी। पहले चरण में सभी तरह के आयातों पर दो अप्रैल 2025 से 10 प्रतिशत बेसिक शुल्क लगा दिया गया जबकि दूसरे चरण में लगने वाली उंची शुल्क दरों पर अमल फिलहाल 90 दिन के लिये रोक दिया गया। हालाकि, चीन की तरफ से जवाबी कार्रवाई होने से उसे कोई राहत नहीं दी गई।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका और चीन) के बीच शुल्क युद्ध छिड़ने से विश्व व्यापार में इस साल 0.2 प्रतिशत गिरावट का अनुमान व्यक्त किया है जबकि इससे पहले विश्व व्यापार में 2.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान था। अमेरिका की तरफ से चीन पर 245 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया है। वही,ं चीन ने अमेरिकी आयात पर शुल्क बढ़ाते हुये 84 प्रतिशत कर दिया, अमेरिकी कंपनियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिये और अपनी एयरलाइन कंपनियों को अमेरिका के बोइंग विमानों की डिलीवरी लेने से भी रोक दिया।
विश्व व्यापार संगठन (डब्ल्यूटीओ) ने दुनिया की दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं (अमेरिका और चीन) के बीच शुल्क युद्ध छिड़ने से विश्व व्यापार में इस साल 0.2 प्रतिशत गिरावट का अनुमान व्यक्त किया है जबकि इससे पहले विश्व व्यापार में 2.7 प्रतिशत वृद्धि का अनुमान था। अमेरिका की तरफ से चीन पर 245 प्रतिशत टैरिफ लगा दिया गया है। वही,ं चीन ने अमेरिकी आयात पर शुल्क बढ़ाते हुये 84 प्रतिशत कर दिया, अमेरिकी कंपनियों पर कई तरह के प्रतिबंध लगा दिये और अपनी एयरलाइन कंपनियों को अमेरिका के बोइंग विमानों की डिलीवरी लेने से भी रोक दिया।
दुनिया की इन दो सबसे बड़ी अर्थव्यवस्थाओं के बीच शुल्क युद्ध छिड़ने से चिंता और अनिश्चितता बढ़ी है, और यही वजह है कि सोने के दाम लगातार बढ़ते जा रहे हैं। पिछले एक साल की यदि बात की जाये तो 24 कैरेट स्टैण्डर्ड सोने का दाम 35 से 40 प्रतिशत बढ़कर 95,000 रूपये प्रति 10 ग्राम से उ्रपर निकल गया। वहीं इस साल जनवरी के बाद से इसमें 18 प्रतिशत से अधिक वृद्धि दर्ज की जा चुकी है। चांदी का भाव अप्रैल में ही 10,000 रूपये बढ़कर 1,10,000 रूपये किलो पर पहुंच चुका है। फरवरी 2024 के बाद से चांदी के दाम तेजी से बढ़े हैं।
ऐसी धारणा है कि सोना सबसे सुरक्षित निवेश होता है। जब भी विश्व अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता गहराती है, निवेशक अपना धन सोने में लगाते हैं। कोविड महामारी के समय भी ऐसा ही रूझान देखने को मिला था। वर्ष 2020 में जब कोरोना की पहली लहर ने जोर पकड़ा था तब भी भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक रहा। सोने की खरीदारी बढ़ी और दाम एतिहासिक उंचाई पर पहुंच गये थे। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने 2025 परिदृश्य पर अपनी रिपोर्ट में कहा है, केन्द्रीय बैंक ने पिछले तीन साल के दौरान औसतन 1,000 टन से अधिक सोने की शुद्ध खरीदारी की है,
ऐसी धारणा है कि सोना सबसे सुरक्षित निवेश होता है। जब भी विश्व अर्थव्यवस्था में अनिश्चितता गहराती है, निवेशक अपना धन सोने में लगाते हैं। कोविड महामारी के समय भी ऐसा ही रूझान देखने को मिला था। वर्ष 2020 में जब कोरोना की पहली लहर ने जोर पकड़ा था तब भी भारत सोने का सबसे बड़ा आयातक रहा। सोने की खरीदारी बढ़ी और दाम एतिहासिक उंचाई पर पहुंच गये थे। विश्व स्वर्ण परिषद (डब्ल्यूजीसी) ने 2025 परिदृश्य पर अपनी रिपोर्ट में कहा है, केन्द्रीय बैंक ने पिछले तीन साल के दौरान औसतन 1,000 टन से अधिक सोने की शुद्ध खरीदारी की है,
इस साल भी केन्द्रीय बैंक की खरीदारी अधिक रहने का अनुमान है। वहीं मार्च अंत तक इक्विटी ट्रेडेड फंड (ईटीएफ) की शुद्ध स्वर्ण खरीदारी 128 टन तक पहुंच गई। दुनियाभर में केन्द्रीय बैंक, वित्तीय संस्थान सुरक्षित निवेश के तौर पर सोने की खरीदारी पर ध्यान दे रहे हैं, ईटीएफ के रूप में भी सोने की खरीदारी तेजी से बढ़ रही है। खुदरा आभूषण विक्रेताओं की चिंता अपनी जगह है, उनका मानना है कि सोने, चांदी के उंचे दाम के चलते इस बार अक्षय तृतीया पर खरीदारी प्रभावित हो सकती है। आम ग्राहक खरीदारी से दूर रह सकता है। सोने के बजाय चांदी की खरीदारी बढ़ सकती हैं। देशभर से जो रिपोर्टें उन्हें मिल रहीं हैं उसके मुताबिक खुदरा निवेशक अच्छी खासी मात्रा में उल्टे सोना बेच रहे हैं ताकि उंचे दाम का लाभ उठाया जा सके।
अब सवाल यह है कि आने वाले दिनों में अमेरिका-चीन के बीच व्यापार युद्ध यदि थम जाता है। विभिन्न देशों के साथ अमेरिका का द्विपक्षीय व्यापार समझौता हो जाता है, जैसा कि अमेरिकी प्रशासन कह रहा है कि 75 देशों ने उससे बातचीत की पेशकश की है। जापान के साथ व्यापार समझौता जल्द होने की संभावना है। भारत और अमेरिका के बीच भी बातचीत का एक दौर हो चुका है, जल्द ही आगे बातचीत होने के संकेत हैं। वर्ष के अंत तक चीजें सामान्य हो सकतीं हैं। तब क्या सोना, चांदी के दाम नीचे आयेंगे। यह एक बड़ा सवाल है। पिछले एक साल (मार्च 2024 से अप्रैल 2025) के दौरान यदि सोने के दाम पर नजर डाली जाये तो एक-दो महीने मामूली गिरावट दिखाने के बाद दाम फिर बढ़ने लगे।
इन दिनों विश्व बाजार में सोने के दाम 3,300 डालर प्रति ट्राय औंस के रिकार्ड स्तर से उुपर चल रहे हैं। अमेरिकी डालर की कीमत छह माह के निम्नस्तर पर है। कच्चे तेल के दाम नीचे हैं। ट्रंप प्रशासन ने महत्वपूर्ण प्रसंस्कृत खनिजों और उनके विभिन्न उत्पादों के आयात पर अमेरिका की निर्भरता से राष्ट्रीय सुरक्षा पर खतरे को लेकर जांच के आदेश दिये हैं। इससे कीमती धातुओं के दाम और तेजी से बढ़ते दिखाई दे रहे हैं। कुल मिलाकर डोनाल्ड ट्रंप कब क्या करेंगे और क्या नहीं करेंगे इसको लेकर अनिश्चितता बरकरार है, और जब तक यह रहेगी सोना-चांदी आम आदमी की पहुंच से दूर होता जायेगा।
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