अमेरिका द्वारा भारत से आयातित ज्वेलरी पर 10% टैरिफ चुनौती के साथ अवसर भी

० आशा पटेल ० 
जयपुर। जयपुर ज्वेलर्स एसोसिएशन का मानना है कि 2023-24 में भारत के कुल जेम्स व ज्वैलरी निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 30.42 % (लगभग 9.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर ) था। रंगीन रत्नों के कुल निर्यात में अमेरिका का हिस्सा लगभग 23.57 % ही है। अतः यह माना जा सकता है कि भारत अपने निर्यात में पूर्णतया अमेरिका पर निर्भर नहीं है। ज्वेलर्स का मानना है कि चीन, श्रीलंका और थाईलैंड पर भारत से अधिक टैरिफ लगाये जाने की संभावना हैं, जिससे भारत को प्रतिस्पर्धात्मक लाभ मिल सकता है।
ज्वेलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष आलोक सोखियां का कहना है कि चूँकि अमेरिका द्वारा यह 10 % टैरिफ़ 90 दिनों के लिए है और इसी दौरान भारत और अमेरिका की सरकारों के बीच वार्तालाप के माध्यम से ट्रेड डील फाइनल होनी है जो कि दोनों ओर के अत्यंत सकारात्मक संबंधों के चलते दोनों पक्षों के हित में होने की पूरी संभावना है अतः इस समय इस विषय पर कोई भी निश्चित टिप्पणी करना बेमानी है। ज्वैलर्स से अनुरोध है कि इस विषय में किसी भी नकारात्मक विचार पर ध्यान ना दे कर पूरी सकारात्मकता बनाये रखें ।
ज्वेलर्स एसोसिएशन के मानद मंत्री नीरज लूणावत ने ज्वैलर्स के लिए कुछ सुझाव दिए, जैसे विविधीकरण: अपने उत्पादों और बाजारों में विविधीकरण लाएं। नए बाजारों में प्रवेश करने और नए उत्पादों को लॉन्च करने से आपकी एक ही बाज़ार पर निर्भरता कम होगी। आज भारत स्वयं में रंगीन रत्नों का बहुत बड़ा मार्केट बनता जा रहा है। यहाँ रंगीन रत्न जड़ित आभूषणों को प्रमोट करने पर विशेष ध्यान दें। गुणवत्ता पर ध्यान: अपने उत्पादों की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान दें। उच्च गुणवत्ता वाले उत्पादों के लिए ग्राहकों की मांग बढ़ रही है और इससे आपको प्रतिस्पर्धा में आगे रहने में मदद मिलेगी।

 डिजिटल मार्केटिंग: डिजिटल मार्केटिंग का उपयोग करके अपने उत्पादों को वैश्विक स्तर पर प्रमोट करें। इससे आपको नए ग्राहकों तक पहुंचने और अपनी ब्रांड पहचान बनाने में मदद मिलेगी। ग्राहक संबंध: अपने ग्राहकों के साथ मजबूत संबंध बनाएं। उनकी जरूरतों और पसंद को समझने से आपको अपने उत्पादों को उनकी आवश्यकताओं के अनुसार तैयार करने में मदद मिलेगी। निरंतर प्रशिक्षण: अपने कर्मचारियों को निरंतर प्रशिक्षण दें, जिससे वे नए कौशल और ज्ञान प्राप्त कर सकें और आपकी कंपनी को आगे बढ़ाने में मदद कर सकें।
 समझदारी से निर्णय लें: सभी जौहरी बंधुओं से निवेदन है कि इस समय नकारात्मक बातों पर ध्यान न दें। यह समय इन सारे सुझावों पर कार्य कर अनिश्चितता के इस दौर में इस चुनौती को अवसर में बदलने का समय है।

एसोसिएशन के संयोजक अनिल बंब का कहना है कि वर्तमान संकट की स्थिति अल्पकालिक चुनौती हो सकती है, लेकिन दीर्घकालिक दृष्टिकोण से यह अवसर भी है। भारत के पास गुणवत्ता, डिज़ाइन और विविधता का हुनर है और प्रतिस्पर्धात्मक लाभ भी है, जिसे सही रणनीति के साथ वैश्विक स्तर पर भुनाया जा सकता है । हमे पूर्ण विश्वास है की जयपुर के जौहरी इस संकट की घड़ी में हम इस परिस्थिति से और मजबूत होकर निकलेंगे ।

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