कार्स 24 रिपोर्ट : देश की सड़कों पर रोज़ाना तोड़े जा रहे यातायात के नियम
नयी दिल्ली : देश में जहां गाड़ी चलाने को ज़िम्मेदारी से ज़्यादा अधिकार माना जाता है, कार्स 24 द्वारा जारी नई रिपोर्ट इस बात पर रोशनी डाली है कि यातायात नियमों और वाहन चलाने में अनुशासन न बरतना देश में कितना आम हो चुका है। कंपनी द्वारा जारी पहली चालान रिपोर्ट भारत में सड़कों की वास्तविकता का खुलासा करती हैः रिपोर्ट के मुताबिक केवल 2024 में गाड़ी चलाने के दौरान नियमों को तोड़ने के चलते रु 12000 करोड़ के ट्रैफिक फाईन लगाए गए, जिनमें से रु 9000 करोड़ के चालान चुकाए नहीं गए हैं।यह रिपोर्ट लोगों के व्यवहार पर भी रोशनी डालती है, जहां यातायात नियमों का उल्लंघन करना लोगों की आदत बन चुकी है। पिछले साल 8 करोड़ से अधिक चालान जारी किए, यानि सड़क पर चलने वाले तकरीबन हर दूसरे वाहन पर चालान काटा गया है। सख्त नियमों के बावजूद, नियमों को तोड़ना आम बात हो चुकी है। ये आंकड़े ऐसे सिस्टम की ओर इशारा करते हैं, जहां जुर्माना सिर्फ कागज़ों तक सीमित है, लेकिन यातायात नियमों को तोड़ने के मामलों को रोका नहीं जा पा रहा। रु 12000 करोड़ सिर्फ आंकड़ा नहीं है, यह इस बात का संकेत है कि देश के लोगों के लिए यातायात के नियम तोड़ना कितना आसान है।
ओवरलोडेड ट्रकों से लेकर बिना हेलमेट के दोपहिया राइडरों तक, यह रिपोर्ट ऐसे मामलों का खुलासा करती है, जहां नियमों को अनदेखा करना कोई बड़ी बात नहीं है। हरियाणा के एक ट्रक चालक पर 18 टन ज़्यादा ओवरलोड के चलते रु 2,00,500 का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह बैंगलुरू के एक दोपहिया राइडर पर 475 बार नियमों का उल्लंघन किए जाने की वजह से कुल रु 2.91 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है। गुरूग्राम में रोज़ाना 4500 से अधिक चालान काटे गए और रु 10 लाख प्रतिदिन संग्रह हुआ। नोएडा में एक ही माह में हेलमेट न पहनने के लिए रु 3 लाख के चालान जारी किए। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आम लोग सुरक्षा के बेसिक नियमों का पालन भी नहीं कर रहे हैं।
कार्स 24 के सह-संस्थापक गजेन्द्र जांगिड़ ने कहा ‘यातायात के नियमों का उल्लंघन नागरिक व्यवस्था के खिलाफ है। अगर हम अपने शहरों को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो हमें डर की वजह से नियमों का अनुपालन नहीं करना है बल्कि गर्व के साथ इसे अपनी ज़िम्मेदारी समझना होगा।’ नियमों का उल्लंघन अपने आप में चिंताजनक है। जारी किए गए कुल चालानों में से 50 फीसदी चालान ओवरस्पीडिंग के लिए काटे गए। ये आंकड़े हेलमेट या सीटबेल्ट न पहनने, गलत पार्किंग, सिगनल तोड़ने की वजह से काटे गए चालानों से थोड़ा ही पीछे हैं,
ओवरलोडेड ट्रकों से लेकर बिना हेलमेट के दोपहिया राइडरों तक, यह रिपोर्ट ऐसे मामलों का खुलासा करती है, जहां नियमों को अनदेखा करना कोई बड़ी बात नहीं है। हरियाणा के एक ट्रक चालक पर 18 टन ज़्यादा ओवरलोड के चलते रु 2,00,500 का जुर्माना लगाया गया। इसी तरह बैंगलुरू के एक दोपहिया राइडर पर 475 बार नियमों का उल्लंघन किए जाने की वजह से कुल रु 2.91 लाख का जुर्माना लगाया जा चुका है। गुरूग्राम में रोज़ाना 4500 से अधिक चालान काटे गए और रु 10 लाख प्रतिदिन संग्रह हुआ। नोएडा में एक ही माह में हेलमेट न पहनने के लिए रु 3 लाख के चालान जारी किए। ये आंकड़े इस बात का संकेत हैं कि आम लोग सुरक्षा के बेसिक नियमों का पालन भी नहीं कर रहे हैं।
कार्स 24 के सह-संस्थापक गजेन्द्र जांगिड़ ने कहा ‘यातायात के नियमों का उल्लंघन नागरिक व्यवस्था के खिलाफ है। अगर हम अपने शहरों को सुरक्षित बनाना चाहते हैं तो हमें डर की वजह से नियमों का अनुपालन नहीं करना है बल्कि गर्व के साथ इसे अपनी ज़िम्मेदारी समझना होगा।’ नियमों का उल्लंघन अपने आप में चिंताजनक है। जारी किए गए कुल चालानों में से 50 फीसदी चालान ओवरस्पीडिंग के लिए काटे गए। ये आंकड़े हेलमेट या सीटबेल्ट न पहनने, गलत पार्किंग, सिगनल तोड़ने की वजह से काटे गए चालानों से थोड़ा ही पीछे हैं,
हालांकि इस बात पर ध्यान देना ज़रूरी है कि ओवरस्पीडिंग व्यक्ति की जान तक को जोखिम में डाल देती है। इसके बावजूद लोग नियमों का पालन नहीं करना चाहते। इसके अलावा 75 फीसदी जुर्माने का भुगतान नहीं किया गया है, जो सार्वजनिक जवाबदेहिता की कमी को दर्शाता है। लेकिन अब चालान की अनदेखी करके आप बच नहीं सकते। रिपोर्ट के अनुसार चालान नहीं भरने पर आपका ड्राइविंग लाइसेंस और रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट रद्द किया जा सकता है। इंश्योरेन्स प्रीमियम बढ़ाया जा सकता है और बार-बार डिफॉल्ट रहने पर आपको कोर्ट से सम्मन भी मिल सकता है। इसके बावजूद लोग इस बारे में चिंता नहीं करते।
इन आंकड़ों में एक और रोचक तथ्य सामने आया है, इसके मुताबिक यह गलत है कि सड़क के कुछ यूज़र बाकी यूज़र्स के मुकाबले ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं। 55 फीसदी चालान चार-पहिया वाहनों पर काटे गए, जबकि शेष 45 फीसदी दोपहिया वाहनों पर काटे गऐ। यानि कोई भी मासूम नहीं है, हर शहर, हर आय वर्ग, हर तरह के वाहन चलाने वाले लोग नियमों को आसानी से तोड़ रहे हैं। कार्स 24की चालान रिपोर्ट पॉलिसी के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव लाने पर भी ज़ोर देती है। कंपनी का मानना है कि नियमों को सख्ती से लागू करने, एआई-इनेबल्ड सर्विलान्स जैसी टेक्नोलॉजी को अपनाने,
इन आंकड़ों में एक और रोचक तथ्य सामने आया है, इसके मुताबिक यह गलत है कि सड़क के कुछ यूज़र बाकी यूज़र्स के मुकाबले ज़्यादा ज़िम्मेदार हैं। 55 फीसदी चालान चार-पहिया वाहनों पर काटे गए, जबकि शेष 45 फीसदी दोपहिया वाहनों पर काटे गऐ। यानि कोई भी मासूम नहीं है, हर शहर, हर आय वर्ग, हर तरह के वाहन चलाने वाले लोग नियमों को आसानी से तोड़ रहे हैं। कार्स 24की चालान रिपोर्ट पॉलिसी के साथ-साथ लोगों की सोच में बदलाव लाने पर भी ज़ोर देती है। कंपनी का मानना है कि नियमों को सख्ती से लागू करने, एआई-इनेबल्ड सर्विलान्स जैसी टेक्नोलॉजी को अपनाने,
ऑटोमेटिक चालान सिस्टम और सार्वजनिक जागरुकता के द्वारा इन परिणामों में सुधार लाया जा सकता है। लेकिन सिस्टम और सर्विलान्स के दायरे से बढ़कर भारत को अपनी सोच बदलनी होगी। सुरक्षित तरीके से गाडी चलाना सिर्फ इसलिए ज़रूरी नहीं कि आप पर जुर्माना लगाया जाएगा, बल्कि यह आपकी ज़िम्मेदारी है। भारत की सड़कों को अब और चालानों की ज़रूरत नहीं बल्कि अनुशासन की ज़रूरत है। जब तक हम नियमों को तोड़ते रहेंगे, खतरा बढ़ता रहेगा।

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