गिग कर्मियों को सशक्त बनाने के लिए रैपिडो ने श्रम और रोजगार मंत्रालय के साथ एमओयू पर दस्तखत किए

० योगेश भट्ट ० 
नई दिल्ली : राईड-हेलिंग प्लेटफॉर्म, रैपिडो ने श्रम एवं रोजगार मंत्रालय, भारत सरकार के साथ एक मैमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग (एमओयू) पर हस्ताक्षर किए हैं। इस एमओयू का उद्देश्य भारत में गिग कर्मियों के लिए आजीविका के अवसरों का निर्माण करना है। इस सहयोग के अंतर्गत नेशनल करियर सर्विस (एनसीएस) प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत लोगों के लिए प्रतिमाह 5 लाख आजीविकाओं का सृजन होगा और उन्हें कमाई करने के लचीले एवं गरिमापूर्ण अवसर प्राप्त हो सकेंगे। श्रम शक्ति भवन, दिल्ली में केंद्रीय श्रम एवं रोजगार मंत्री, डॉ. मनसुख मंडाविया की उपस्थिति में मंत्रालय की ओर से

 अंजलि रावत, डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ एम्प्लॉयमेंट (डीडीजी) और रैपिडो की ओर से पवन गुंटूपल्ली, को-फाउंडर द्वारा इस एमओयू पर हस्ताक्षर किए गए। इस सहयोग का उद्देश्य रैपिडो के डिजिटल प्लेटफॉर्म द्वारा एनसीएस पर पंजीकृत लोगों को अंशकालिक एवं पूर्णकालिक रोजगार के अवसर प्रदान करना है। इस विषय में समर्पित आउटरीच अभियानों द्वारा जानकारी का प्रसार किया जाएगा, ताकि कैप्टन (ड्राईवर पार्टनर) आसानी से उन सभी शहरों में आजीविका के अवसर खोज व प्राप्त कर सकें, जहाँ रैपिडो की सेवाओं का संचालन होता है।

इस बारे में पवन गुंटुपल्ली, को-फाउंडर, रैपिडो ने कहा, ‘‘हम इस परिवर्तनकारी अभियान के लिए श्रम व रोजगार मंत्रालय के साथ साझेदारी करके उत्साहित हैं। एनसीएस प्लेटफॉर्म और रैपिडो की सुलभ टेक्नोलॉजी की मदद से हम लोगों को आय के लचीले अवसर प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं। यह सहयोग नौकरी तलाशने वालों एवं सस्टेनेबल आजीविका के बीच की दूरी को खत्म करके भारत में समावेशी आर्थिक वृद्धि सुनिश्चित करने के हमारे उद्देश्य को प्रदर्शित करता है।’’

अंजलि रावत, डिप्टी डायरेक्टर जनरल ऑफ एम्प्लॉयमेंट, श्रम एवं रोजगार मंत्रालय ने कहा, ‘‘गिग इकॉनॉमी में व्यापक स्तर पर आजीविका का निर्माण करने की क्षमता है। रैपिडो के साथ इस सहयोग के द्वारा हम कर्मियों को नए अवसर प्रदान कर रहे हैं ताकि वो भारत के विकसित होते हुए कार्यबल में अपनी जगह बना सकें। यह साझेदारी समावेशी विकास करने और देश की अर्थव्यवस्था में महत्वपूर्ण योगदान देने की हमारी प्रतिबद्धता का प्रमाण है।’’

इस सहयोग के अंतर्गत रैपिडो द्वारा ‘‘बाईक टैक्सी कैप्टन’’ को औपचारिक पहचान दी गई है और इसे एनसीएस प्लेटफॉर्म पर आधिकारिक आय श्रेणी के अंतर्गत रखा गया है। इससे गिग कर्मियों को ज्यादा कानूनी मान्यता मिल सकेगी और राष्ट्र स्तर की नीतियों में सहयोग मिल सकेगा। एनसीएस प्लेटफॉर्म पर 7 करोड़ से अधिक लोग पंजीकृत हैं, जो नौकरियाँ तलाश रहे हैं। इस साझेदारी द्वारा स्वतंत्र कार्यबल के लिए भारत के सबसे बड़े आजीविका आउटरीच अभियानों में से एक का संचालन किया जाएगा।

रैपिडो गिग अर्थव्यवस्था में इनोवेशन लाने के लिए प्रतिबद्ध है। यह हर पृष्ठभूमि और स्थान के लोगों को सशक्त बनाने के लिए रोजगार के अवसरों का निर्माण करने के लिए प्रतिबद्ध है। श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के साथ रैपिडो भविष्य के लिए एक मार्ग तैयार कर रहा है, जिसमें सभी को आजीविका के लचीले और सस्टेनेबल अवसर प्राप्त हो सकेंगे।

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