प्रधानमंत्री मोदी को बताना चाहिए कि जो युद्ध विराम हुआ है उसकी शर्तें क्या है : कांग्रेस

० संवाददाता द्वारा ०

जयपुर। देश की सेना एवं सशस्त्र बलों के शौर्य व सफलता के सम्मान में बाड़मेर में कांग्रेस पार्टी द्वारा जय हिंद सभा आयोजित की गई जिसमें राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सिंह सुरजेवाला, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के राजस्थान प्रभारी से सुखजिन्दर सिंह रंधावा, पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव सचिन पायलट, नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली, अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मध्यप्रदेश प्रभारी  हरीश चौधरी, एआईसीसी सचिव चिरंजीराव, रित्विक मकवाना, सांसद उम्मेदाराम, पूर्व नेता प्रतिपक्ष हेमाराम चौधरी सहित पूर्व सैनिक, कांग्रेस के वरिष्ठ नेतागण एवं कार्यकर्तागण शामिल रहे।
इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव रणदीप सुरजेवाला ने कहा कि राजस्थान की वीरधरा के लोग जो तपती हुई भूमि से सीमा की रक्षा करने के लिए वीर सैनिक देती है, वहां के लोग सेना के पराक्रम व शौर्य के बारे में अच्छी तरह जानते हैं। उन्होंने कहा कि हर भारतीय और हर राजस्थानी को हमारे देश की सेना के शौर्य पर गर्व है। उन्होंने कहा कि भारत की सेना देश के शौर्य का प्रतिबिम्ब है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना अपने लहू से देश की मिट्टी को सीच कर सीमाओं की रक्षा सर्वोच्च बलिदान देकर करने का प्रतीक और प्रतिबिम्ब है। उन्होंने कहा कि भारतीय सेना बहादुरी की वह मिसाल है जो केवल हिन्दुस्तान में नहीं बल्कि पूरी दुनिया में दी जाती है।
इसलिए भारत की सेना का पहलगाम के बाद किया गया ऑपरेशन सिन्दूर हो अथवा 1965 का युद्ध हो या 1971 की लड़ाई हो भारत के सेना के रणबांकुरों को जितना नमन करें उतना कम है। उन्होंने कहा कि सेना की वर्दी सिलवाकर उसे पहनकर फोटो खिंचवा कर वोट लेना एक अलग बात है लेकिन आज की सरकार सेना के लिए कर क्या रही है यह हमारे पूर्व सैनिक और रणबांकुरों की पत्नियां व वीरांगनाएं जानना चाहती है। उन्होंने कहा कि हिंदुस्तान की सरकार ने 11 साल से फौज की भर्ती रोक रखी है और फौज में दो लाख पद खाली है। आज प्रश्न है कि 11 साल बीत जाने के बाद भी माउंटेन स्ट्राईक फोर्स की भर्ती क्यों नहीं हुई।
उन्होंने कहा कि हम वायु सेना के जांबाज़ पायलट और सैनिकों की तारीफ तो करते हैं पर यह नहीं बता रहे कि हमारी वायु सेवा के अंदर जहाज की 45 स्क्वाड होनी चाहिए आज वह 45 स्क्वाड्रन क्यों नहीं पूरी की गई, क्यों जहाज के बेड़े की कमी है, यह सवाल प्रधानमंत्री मोदी और बीजेपी से पूछना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह सच है कि आज हमारी सेना का शौर्य और पराक्रम नहीं होता तो पाकिस्तान को धूल नहीं चटा पाते, किंतु यह भी सच है कि जब सारे पत्रकार कह रहे थे कि हमारी सेना लाहौर पहुंचने वाली है, कराची पहुंचने वाली है, पाकिस्तान के घुटने टूट चुके हैं, तो ऐसे में रातों रात सेना को बिना सुने और सेना से बिना बात किए अमेरिका की घोषणा पर युद्ध विराम की क्या आवश्यकता थी यह सवाल पूछना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि यह पूछना भी आवश्यक है कि युद्ध विराम तो भारत का हो और घोषणा पाकिस्तान का प्रधानमंत्री करें।

 उन्होंने कहा कि 10 मई को 5:33 पर पाकिस्तान के विदेश मंत्री ने युद्ध विराम की घोषणा की और 5:58 पर हमारे विदेश सचिव ने घोषणा की, प्रश्न तो बनता है कि जब बात हिंदुस्तान और पाकिस्तान के बीच की थी और पाकिस्तान झुक रहा था तो युद्ध विराम की घोषणा करने वाला अमेरिका कौन होता है। उन्होंने कहा कि अमेरिका के राष्ट्रपति ने एक बार नहीं आठ बार कहा कि युद्ध विराम नहीं होता मैंने करवा दिया और इस आधार पर करवा दिया कि यदि युद्ध विराम नहीं किया तो धंधा बंद कर देंगे। उन्होंने प्रश्न किया कि भारत सरकार को जवाब देना चाहिए कि व्यापार जरूरी है अथवा देश, यह जवाब नरेन्द्र मोदी को देना चाहिये। उन्होंने कहा कि व्यापार जरूरी है या हमारी माता-बहिनों का सिंदूर जरूरी है, यह जवाब भी नरेन्द्र मोदी को देना पड़ेगा। 

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री यदि आपकी रगो में सिंदूर दौड़ता है तो व्यापार की आड़ में समझौता कैसे हो सकता है, यह जवाब देश की जनता मांग रही है। उन्होंने कहा कि यदि अमेरिकी राष्ट्रपति का दावा गलत है तो प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को आगे बढक़र इस दावे का खंडन करना चाहिए और बताना चाहिए कि यह झूठ है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी का मौन बताता है कि कहीं ना कहीं दाल में कुछ काला है। इसलिए अमेरिका के राष्ट्रपति कुछ भी कहे भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मुंह से अमेरिका की बात के संबंध का एक शब्द नहीं निकलता, जबकि इंदिरा गांधी ने तो अमेरिका के राष्ट्रपति निक्सन की हेकड़ी निकाल दी थी। 

उन्होंने कहा कि हमारी सेना के पराक्रम और शौर्य के हम सब मुरीद हैं, तो हमारे प्रधानमंत्री क्यों घबरा रहे हैं और क्यों अमेरिका से डर रहे हैं, उन्हें सामने आना चाहिए और कहना चाहिए कि डोनाल्ड ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं, वह ऐसा करेंगे तो उन्हें सब का समर्थन मिलेगा, किन्तु ऐसा नहीं करेंगे तो देश के स्वाभिमान को प्रधानमंत्री चोट पहुंचा रहे हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को यह बताना चाहिए कि जो युद्ध विराम हुआ है उसकी शर्तें क्या है जब दो दलों के बीच समझौता होता है तो कुछ शर्ते भी तय की जाती है। उन्होंने कहा कि पाकिस्तान से 10 मई को जो समझौता हुआ उसी दिन शांति समझौते का उल्लंघन हुआ, यह जम्मू कश्मीर के लोग बता रहे हैं जिन पर गोलियां चली ऐसे में उस समझौते का क्या महत्व रह गया। 

उन्होंने कहा कि जब 12 मई को प्रधानमंत्री ने देश को संबोधित किया उस दिन भी युद्ध विराम का उल्लंघन हुआ पाकिस्तान ने सांबा जम्मू कश्मीर में ड्रोन से हमला किया तो फिर वह शांति समझौते का क्या औचित्य रहा और उस शांति समझौते की शर्तें क्या है, यह उजागर होनी चाहिए, क्योंकि पाकिस्तान आए दिन शांति समझौते का उल्लंघन कर रहा है। उन्होंने कहा कि इस शांति समझौते से भारत को क्या हासिल हुआ, यह प्रश्न तो प्रधानमंत्री से पूछना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि क्या पाकिस्तान ने वादा किया है कि वह अब युद्ध विराम को कभी नहीं तोड़ेगा, क्या पाकिस्तान ने वादा किया है कि वह उग्रवाद के सारे कैंप जो पाकिस्तान की धरती पर चल रहे हैं उन्हें बंद कर देगा,

 क्या पाकिस्तान ने वादा किया है कि पहलगाम में जिसने हमारे 26 नागरिक मारे हमारी बहनों का सिंदूर उखाड़ा, उन उग्रवादियों को पाकिस्तान भारत को सौंप देगा, जिससे हम उन्हें फांसी के तख्ते पर चढ़ा सके। उन्होंने कहा कि इसका जवाब तो प्रधानमंत्री मोदी से पूछना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह सवाल भी पूछना पड़ेगा कि क्या पाकिस्तान के इन उग्रवादियों को भारत फांसी पर चढ़ाएगा जिस प्रकार मुंबई हमले के आरोपी अजमल कसाब को डॉ. मनमोहन सिंह सरकार ने फांसी पर चढ़ाया था। उन्होंने कहा कि यह सवाल तो पूछना पड़ेगा कि क्या पाकिस्तान भारत में आतंकवाद फैलाने से बाज आयेगा, क्या अब किसी बहन का सिंदूर तो नहीं उजड़ेगा, 

उन्होंने कहा कि इन सवालों को पूछना आवश्यक है कि जो आतंकवादी हमले के दोषी आतंकवादी पाकिस्तान में रह रहे हैं मौलाना मसूद अजहर समेत अन्य आतंकवादी क्या भारत को सौंपे जाएंगे। उन्होंने कहा कि क्या हाफिज सईद और दाऊद इब्राहिम अब भारत को सौंपे जाएंगे ताकि हम उन्हें फांसी लगा सके, यह सवाल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से पूछना आवश्यक है, क्योंकि यह राष्ट्र धर्म है, यह सवाल भी पूछना आवश्यक है कि क्या अब पाकिस्तान में आतंकवादियों के बड़े-बड़े मुख्यालय बंद होंगे जैश ए मोहम्मद जैसे आतंकवादी संगठनों पर ताला लगेगा, क्या लश्कर तैयबा या अन्य जिहादी फोर्स उनका नामोनिशान मिट जाएगा, तभी तो समझौते का कोई फायदा है

 इस बात का सवाल तो प्रधानमंत्री मोदी से पूछना ही पड़ेगा। यह भी पूछना पड़ेगा कि पाकिस्तान की आर्मी जनरल मुनीर करोड़ों रुपया लगाकर पाकिस्तान से उग्रवादी बनाकर भारत की सीमाओं में भेजते हैं क्या पाकिस्तान उसे बंद कर देगा। यह सवाल पूछना आवश्यक है कि पहलगाम में जो उग्रवादी हमला हुआ उसमें कौन सी इंटेलिजेंस और सुरक्षा फैलियर हुई और उसका जिम्मेदार कौन है, देश के गृहमंत्री अमित शाह ने फिर राहुल गांधी और कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिका अर्जुन खडग़े को जो पार्टी मीटिंग में कहा था कि पहलगाम में गैरिसन ग्राउंड है यह खुल गया है इसकी जानकारी नहीं थी जबकि भारत के गृहमंत्री को यह पता कैसे नहीं चला और राजनाथ सिंह जो देश के रक्षा मंत्री हैं

 उन्हें यह जानकारी क्यों नहीं मिली, देश के प्रधानमंत्री हैं उन्हें यह कैसे पता नहीं चला और पहलगाम में सेना के अधिकारी और सरकार के अधिकारी यह कहते हैं कि गैरिसन ग्राउंड तो कभी बंद ही नहीं हुआ क्या देश के गृहमंत्री और रक्षा मंत्री झूठ बोल रहे हैं यह सवाल तो उनसे पूछना ही पड़ेगा। यह सवाल भी पूछना आवश्यक है कि वह पांचो उग्रवादी जिन्होंने हमारे 26 लोग मारे वह कहां है। उन्होंने कहा कि 22 अप्रेल को पहलगाम खुला हुआ था और 2 फरवरी से 22 फरवरी के मध्य पाकिस्तान की मिल्कियत वाली कंपनी का सेटेलाइट पहले गांव की फोटो ले रहा था और बेच रहे थे जब पहलगाम के उस ग्राउंड की फोटो ली जा रही थी और सैटेलाइट ऊपर लगाकर फोटो क्यों ली जा रही थी क्यों फोटो दिख रही थी यह देश के गृहमंत्री की जानकारी में क्यों नहीं आया हमारे देश की इंटेलीजेंस क्या कर रही थी।

 उन्होंने कहा कि यदि पहलगाम में गृहमंत्री अमित शाह सिक्योरिटी लगा देते तो यह हमला नहीं होता, लोगों की जान बच सकती थी। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार चाहती है कि राहुल गांधी और कांग्रेस पार्टी यह सवाल न पूछे लेकिन जनता से जुड़े हुए सवाल पूछने आवश्यक है कि सरकार सेना में पद क्यों नहीं भर रही, वायु सेना को विमान खरीद कर क्यों नहीं दे रही, यह सवाल प्रधानमंत्री से नहीं पूछे जाएंगे तो किससे पूछे जाएंगे। उन्होंने कहा कि सवाल पूछा जाना राष्ट्र धर्म है, राष्ट्र के पक्ष में है और यह पूछना आवश्यक है कि जब पाकिस्तान हमारे देश में उग्रवादी भेज रहा था हमारी सेना पाकिस्तान से लड़ रही थी तो पाकिस्तान को 10000 करोड़ इंटरनेशनल मोनेटरी फंड कैसे मिल गया, हमारी सरकार ने विरोध में मतदान क्यों नहीं किया,

 यह पैसा पाकिस्तान को क्यों मिल गया यह प्रश्न पूछना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जय हिंद सभा सेना के समर्थन में भारतीय सेना के शौर्य और पराक्रम के सम्मान में आयोजित की गई है यह सभा आज केन्द्र की सत्ता में बैठे हुए लोगों से सवाल पूछने के लिए भी है कि सुरक्षा में चूक कहां हुई, इंटेलिजेंस फैलियर कहां हुई और उसे ठीक किस प्रकार से किया जाएगा। इस अवसर पर सभा को संबोधित करते हुए राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कहा कि देश की आजादी के समय महान् स्वतंत्रता सेनानी सुभाष चंद्र बोस ने जय हिंद का नारा दिया था, 

जिसका तात्पर्य है कि हमारे देश की जय हो, देश की सेना की जय हो, इसीलिए आज सेना के शौर्य व पराक्रम के सम्मान के लिए आयोजित इस रैली का नाम जय हिंद सभा रखा गया है। उन्होंने कहा कि जिस प्रकार हमारी सेना ने पूर्व में बालाकोट और अब पहलगाम की घटना के बाद आतंकवादियों के पाकिस्तान स्थित ठिकानों के विरुद्ध कार्रवाई की पूरे देश व दुनिया में यह संदेश गया कि अब हमारा देश पीछे हटने वाला नहीं है। हमारी सेना और सैन्य शक्ति इतनी मजबूत है कि दुनिया का कोई भी देश हमारी सीमाओं की ओर आंख उठाकर नहीं देख सकता है।

 सीधा संदेश गया था और यह संदेश सेना के माध्यम से गया कि हमारी सीमाएं सुरक्षित है, हमारे नागरिक सुरक्षित है, इसीलिए उनके पराक्रम को सलाम करने के लिए बाड़मेर में जय हिंद सभा आयोजित हुई है। उन्होंने सभी उपस्थितजनों से दायां हाथ उठाकर सेना को सलामी देने के लिए कहा, जिस पर सभी ने एक साथ सेना को सलामी प्रदान की। इस अवसर पर डोटासरा ने कहा कि प्रधानमंत्री मोदी को आदत पड़ गई है कि सेना के शौर्य के पीछे छुपकर आम चुनाव में वोट हासिल करते हैं, जबकि वह शौर्य जो बालाकोट में दिखाया गया है और जो ऑपरेशन सिन्दूर में जो शौर्य दिखाया वह सेना का था, किन्तु जब सेना ने अपना पराक्रम दिखाया तो आज प्रधानमंत्री सेना की वर्दी में अपनी फोटो लगाकर भाजपा की यात्रायें और रैली निकलवा रहे हैं।

 उन्होंने कहा कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प जो दोनों देशों के बीच मध्यस्थता की बात कह रहे है, उसका जवाब प्रधानमंत्री मोदी क्यों नहीं दे रहे हैं, क्योंकि आज हमारे देश का प्रत्येक नागरिक यह जानना चाहता है कि क्या ट्रम्प झूठ बोल रहे हैं अथवा श्री नरेन्द्र मोदी नतमस्तक हो गये, यह जानकारी अब देश के सामने रखनी चाहिए। उन्होंने कहा कि केन्द्र सरकार से सवाल पूछने पर भाजपा के नेता कहते हैं कि सेना के शौर्य पर प्रश्न कर रहे हो, जबकि वास्तविकता है यह है कि जो टम्प के साथ रात में सौदेबाजी की गई, उस पर हम सवाल उठा रहे हैं और यह हमारा और हर भारतीय का अधिकार है कि हम पूछे नरेन्द्र मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रम्प ने मध्यस्थता क्यों की और इस सवाल का जवाब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को संसद में सत्र बुला कर देना चाहिए।

 उन्होंने कहा कि यह सवाल इसलिए भी पूछना और महत्वपूर्ण हो गया है कि प्रधानमंत्री मोदी ने अमेरिका में कहा था कि मैं गुजराती हूं और मेरे खून में व्यापार है और आज ट्रम्प भी व्यापार के नाम पर दुहाई देकर युद्ध विराम की बात कह रहे हैं, इसलिए इस प्रश्न का उत्तर प्रधानमंत्री को देश के समक्ष देना चाहिए। उन्होंने कहा कि कांग्रेस सेना के सम्मान में खड़ी है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी सेना के शौर्य के पीछे छुपकर अपनी राजनीति करना चाहते हैं। उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री भी कुछ समय पहले जब बाड़मेर में आये तो उन्होंने कहा था कि यह संयोग है कि बालाकोट स्ट्राइक के बाद भी पहली बार सभा करने राजस्थान ही आया था और अब ऑपरेशन सिंदूर के बाद भी पहली सभा करने राजस्थान आया हूॅं। 

उन्होंने प्रधानमंत्री मोदी से प्रश्न किया कि ऑपरेशन सिन्दूर के पश्चात जो बिहार में चुनावी रैली में बिहार के मुख्यमंत्री के साथ हंसी टिटौली कर रहे थे वह खुद प्रधानमंत्री थे अथवा उनका कोई क्लोन था, यह जवाब प्रधानमंत्री मोदी जनता को प्रदान करें। उन्होंने कहा तिरंगा यात्रा की आड़ में भाजपा को छुपने नहीं देंगे और यह प्रश्न पूछा जाएगा कि जो हमारे वीर शहीद हुए हैं उनका बदला कब पूरा होगा, जो आतंकवादी निर्दोष नागरिकों पर हमले के दोषी हैं वह कब पकड़े जाएंगे। उन्होंने कहा कि शिमला समझौते के विरुद्ध जो मध्यस्थता की बात अमेरिका कर रहा है उसका खण्डन केन्द्र सरकार क्यों नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि द्विपक्षीय मध्य में अमेरिका पंचायती करने वाला कौन होता है और केंद्र सरकार इसका खंडन क्यों नहीं कर रही है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव राजस्थान प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा ने कहा कि भारत की सेना का शौर्य और पराक्रम की बराबरी कोई नहीं कर सकता। उन्होंने कहा कि देश की सीमा किसी एक की नहीं होती है, वहां सुरक्षा करते हुए जब जवान का खून गिरता है तो वह देश के जवान का होता है। उन्होंने कहा कि उनका गांव पाकिस्तान बॉर्डर के बहुत ही नजदीक है और उन्हें आज भी 1971 का युद्ध याद है उस वक्त बॉर्डर पर नारा लगता था हर हर महादेव, अल्लाह हू अकबर और जो बोले सो निहाल सत श्री अकाल, यह हमारे देश की एकता का एक बेहतरीन उदाहरण है, क्योंकि यह देश सभी का है।

 उन्होंने कहा कि आज भाजपा हमें देशभक्ति नहीं सिखाये, क्योंकि इस देश की आजादी की लड़ाई कांग्रेस ने लड़ी है, इस देश की एकता और अखंडता के लिए कुर्बानियां कांग्रेस के नेताओं ने दी है और जो पाकिस्तान आज आंख दिखा रहा है उसके दो टुकड़े इंदिरा गांधी ने कर दिए थे। यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को समझना चाहिए कि पाकिस्तान की रीड की हड्डी हमने तोड़ दी थी, वह आज पुन: खड़ा होना चाहता है, उसकी तो कमर तोडऩे का वक्त आ गया था, सेना को पूरी छूट देकर उसके विरुद्ध ऐसी कार्रवाई होनी चाहिए थी कि हमारे देश की तरफ दोबारा आंख उठाकर नहीं देखता।

इस अवसर पर पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान के आतंकवादी ठिकानों पर हमला किया, अपना शौर्य दिखाया, लेकिन अचानक युद्ध विराम हो गया जो समझ से पर है, क्योंकि ऐसा कभी होता नहीं है, पूर्व में भी पाकिस्तान से युद्ध हुआ तो बांग्लादेश में पाकिस्तान की सेना ने समर्पण कर दिया जो युद्ध विराम हुआ था, आज किन शर्तों पर पाकिस्तान से युद्ध विराम हुआ यह किसी को पता नहीं है, कम से कम देश को पता चलना चाहिए कि कोई बातचीत चल रही है, 

पाकिस्तान ने कोई शर्त मानी है या ऐसी शर्त मानी जाती है कि जिन आतंकवादियों ने पहलगाम में हमला किया था वह भारत को सुपुर्द किये जाएंगे तो ऐसा वादा पाकिस्तान करता तो युद्ध विराम होना चाहिए था। उन्होंने कहा कि ऐसा कोई वादा और समझौता होता कि भविष्य में पाकिस्तान में आतंकवादी ठिकाने नहीं बनेंगे, कोई शर्त ऐसी मानी जाती तो यह तो फिर युद्ध विराम होना समझ में आता है, लेकिन बिना किसी शर्त के अचानक युद्ध विराम हो गया, वह भी अमेरिका के राष्ट्रपति ने ट्विट कर बताया कि दोनों देशों के बीच युद्ध विराम हो गया है, जबकि अमेरिका ने कभी भारत का साथ नहीं दिया।

 उन्होंने कहा कि वर्ष 1961 में जब पं. जवाहरलाल नेहरू ने गोवा को आजाद कराने हेतु पुर्तगाल की सेना पर हमला किया तो अमेरिका ने विरोध किया था, 1972 में जब इंदिरा गांधी ने सिक्किम को भारत में विलय करवाया तो भी अमेरिका ने विरोध किया था, 1971 के युद्ध में अमेरिका के तत्कालीन राष्ट्रपति ने इंदिरा गांधी को धमकी दी थी, जिसकी उन्होंने परवाह नहीं की और पाकिस्तान के दो टुकड़े करवा दिए, यह सब दर्शाता है कि अमेरिका कभी भारत के साथ रहा ही नहीं। उन्होंने कहा कि रूस हमारे साथ रहा था, किन्तु केन्द्र सरकार की डामाडोल नीति के कारण आज रूस भी तटस्थ है और विश्व के बाकी देश भी हमारे साथ नहीं खड़े हैं, जबकि पाकिस्तान का चीन जैसे देश ने साथ दे दिया।

 उन्होंने कहा कि राहुल गांधी बार-बार यही कह रहे हैं कि हमने आपका साथ दिया, विश्वास व्यक्त किया, किन्तु अब सरकार को सभी दलों की बैठक बुलानी चाहिए और संसद के समक्ष देश को सच्चाई बताते हुए विपक्ष के प्रश्नों का जवाब देना चाहिए। उन्होंने कहा कि ट्रम्प कश्मीर मुद्दे में मध्यस्थता की बात कर रहे हैं जबकि दो देशों के बीच में तीसरे देश की कोई भूमिका नहीं हो सकती, लेकिन सरकार इसका खण्डन नहीं कर रही है। उन्होंने कहा कि यह तीसरे देश की पंचायती उचित नहीं है, क्योंकि डोनाल्ड ट्रम्प का कोई भरोसा नहीं है। उन्होंने कहा कि देश बहुत ही खतरनाक समय से गुजर रहा है, केन्द्र में भाजपा झूठ फैलाकर राज कर रही है, किन्तु जनता के लिए कुछ नहीं कर रही है।

इस अवसर पर अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महासचिव और छत्तीसगढ़ प्रभारी सचिन पायलट ने कहा कि पहलगाम म घटित घटना से लेकर ऑपरेशन सिंदूर तक क्या हुआ, सबको पता है, दोहराने की आवश्यकता नहीं है, लेकिन हम सब की सामूहिक आस्था किसी एक चीज में है तो वह भारत की सेना में है और हमें फक्र है कि हम सरहद पर बाड़मेर में खड़े हैं, यहां हमारे सैनिकों ने सीमा की सुरक्षा करते हुए जो शौर्य दिखाया उसके लिए हमारे सैनिक धन्यवाद के पात्र हैं, जिन्होंने डटे रहकर पाकिस्तान में नौ आतंकी ठिकाने समाप्त कर दिये। 

उन्होंने कहा कि पहलगाम की घटना आतंकवादी घटना नहीं थी, वह भारत पर आक्रमण था। उन्होंने कहा कि देश की सेना को हम धन्यवाद देना चाहते हैं, हम उन सभी माता-पिता को धन्यवाद देना चाहते हैं जिन्होंने अपने बच्चों को देश की रक्षा के लिए सेना में भेजा। उन्होंने कहा कि यह सभा हमारे देश के वीर सैनिकों के सम्मान के लिए आयोजित की गई है। उन्होंने कहा कि पूर्व में अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार के समय संसद पर जब हमला हुआ था वह भी पाकिस्तान ने करवाया था तो सोनिया गांधी ने संसद के पटल पर खड़े होकर कहा था कि हमारे देश पर हमला हुआ है,

 भले ही हम विरोधी पार्टी के हैं, किन्तु ऐसे समय विपक्ष सरकार को पूरा समर्थन देकर पाकिस्तान के विरुद्ध कार्यवाही करने की मांग कर रहा है। इसी प्रकार की राजनीति कांग्रेस द्वारा की जाती है और अब पहलगाम हमले के समय भी कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खडग़े तथा नेता विपक्ष राहुल गांधी ने सरकार को विश्वास दिलाया था कि पूरे देश की 140 करोड़ जनता सरकार के साथ है, पाकिस्तान के विरुद्ध कड़ी कार्यवाही होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हमने कभी नहीं पूछा कि पहलगाम में आतंकवादी कैसे घटना कर गये, हमने यह भी नहीं पूछा कि वह आतंकवादी कहां गये और हमारे देश की सेना ने अपना शौर्य प्रदर्शित किया, किन्तु अचानक अमेरिका के राष्ट्रपति घोषणा करते हैं कि दोनों देशों के बीच युद्ध विराम करवा दिया है। 

उन्होंने कहा कि युद्ध विराम किन शर्तों पर हुआ ह,ै क्या व्यापार के लालच में अथवा कश्मीर पर मध्यस्थता को लेकर हुआ है, इसका खंडन आज तक सरकार ने नहीं किया। उन्होंने कहा कि थोड़े से व्यापार के लिए युद्ध विराम समझ से पर है, इसका जवाब सरकार को देना चाहिए। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश में संविधान की शपथ लेकर मंत्री बनकर बैठे हुए भाजपा नेता ने कर्नल सोफिया कुरैशी के लिये किन शब्दों का इस्तेमाल किया वह शर्मसार करने वाला है, लेकिन और भी शर्म की बात यह है कि आज तक उसका इस्तीफा तक नहीं लिया गया। उन्होंने कहा कि मध्यप्रदेश के उप मुख्यमंत्री, हरियाणा के सांसद हमारी सेना का, हमारी वीरांगनाओं का मजाक उड़ा रहे हैं, कोई कुछ बोल नहीं रहा, भाजपा का शीर्ष नेतृत्व चुप है, जबकि उन्हें देश से माफी मांगनी चाहिये।

इस अवसर पर नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि भारत की सैना व सैनिकों के शौर्य और पराक्रम का कोई मुकाबला नहीं कर सकता है, यही सुना है जिसने पाकिस्तान के दो टुकड़े कर दुनिया के भूगोल को बदलने का कार्य किया था और पाकिस्तान के 90 हजार सैनिकों को घुटनों के बल टिका दिया था और अपना सातवां बेड़ा भारत के खिलाफ रवाना कर इन्दिरा गॉंधी को युद्ध विराम के लिए कहा गया था, किन्तु इन्दिरा गॉंधी ने अमेरिका के आगे झुकना स्वीकार न कर, अमेरिका के राष्ट्रपति से बात तक नहीं की और पाकिस्तान को सबक सिखाते हुए दो टुकड़े कर विश्व के भूगोल को बदलने का कार्य किया,

 जब बांग्लादेश बन गया तभी इन्दिरा गॉंधी ने अमेरिकी राष्ट्रपति से बात की। उन्होंने कहा कि तकलीफ की बात है कि हमारे गाढी पसीने की कमाई को खर्च कर प्रधानमंत्री विदेश की यात्रा करते हैं, 89 देश की यात्रा तक कर चुके हैं, किन्तु जब आतंकवाद के विरुद्ध हम कार्यवाही कर रहे थे, तो 89 देश में से कोई हमारे पक्ष में नहीं आया। उन्होंने कहा कि यह विदेश नीति और कूटनीति विफल हो गई, जबकि पाकिस्तान जैसे देश के साथ चीन और तुर्की खुलकर खड़े हो गये। उन्होंने कहा कि देश में पहले भी गठबंधन की सरकारें बनी है और प्रधानमंत्री बने हैं, लेकिन सभी ने यह नीति अपनाई की दो देशों के मध्य विवाद में किसी तीसरे का स्थान नहीं है, किन्तु प्रधानमंत्री मोदी के मित्र अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने युद्ध विराम करवा दिया।

अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के मध्यप्रदेश प्रभारी एवं विधायक हरीश चौधरी ने सभा में सभी आगन्तुकों, पूर्व सैनिकों तथा वीरांगनाओं का सभा में स्वागत किया और मांग की पहलगाम में आतंकवादियों के हाथों शहीद हुए 26 लोगों को केन्द्र सरकार शहीद का दर्जा दें, क्योंकि वह 26 परिवार केन्द्र सरकार के विश्वास पर पर्यटन के लिए कश्मीर गए थे, इसलिए उन्हें शहीद का दर्जा दिया जाना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि देश की सेना के साथ पूरा देश खड़ा था और सेना ने अपने शौर्य से आतंकवादियों के विरुद्ध कार्रवाई की, किसी ने सवाल नहीं उठाया,

 आतंकवादी कहां से आए और कहां भाग गए, वहां सुरक्षा क्यों नहीं की, क्योंकि उस वक्त ऐसा समय एवं स्थिति नहीं थी और सेना कार्रवाई कर रही थी। उन्होंने कहा कि भारत सरकार ने हमारी सेना को कार्यवाही करने से रोक दिया, जब तय हुआ था कि तीसरी शक्ति बीच में नहीं आयेगी तो अमेरिका की मध्यस्थता कैसे हो गई? जय हिन्द सभा में राजस्थान प्रदेश कांग्रेस कमेटी द्वारा पूर्व सैनिकों एवं वीरांगनाओं को स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया।

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