ईद उल अज़हा के महत्व पर विद्वानों ने की गंभीर चर्चा
० संवाददाता द्वारा ०
नई दिल्ली / ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट (एआईईएम) ने दिल्ली में स्थित तस्मिया ऑडिटोरियम में ईद उल अज़हा पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया । "ईद उल अज़हा-इतिहास, शिक्षायें व महत्व" के विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्वानों की मौजूदगी में एआईईएम के सरपरस्त और हिमालय कंपनी के प्रमुख डॉ एस. फ़ारूक़ ने अध्यक्षता की। उद्धघाटन संबोधन एआईईएम के अध्यक्ष डॉ ख़्वाजा एम शाहिद ने किया तो वहीं एआईईएम के सचिव डॉ इल्यास सैफी ने मौजूद मेहमानों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में एआईईएम के अध्य्क्ष डॉ ख्वाजा शाहिद ने पैग़म्बर इब्राहिम (अ) की ज़िंदगी को और उनकी क़ुर्बानी को समाज के लिए एक मिसाल बताया और कहा कि आज उन नैतिक शिक्षा व उसूलों की बहुत कमी देखी जा रही है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी-इस्लामिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ एस. एम. फजलुर्रहमान ने कहा कि क़ुर्बानी की रिवायत जैन व बोद्ध मज़हब के अलावा हर धर्म मे पाई जाती है और हम जानते हैं कि हमारे देश भारत में 5% बच्चे कुपोषण का शिकार है ये ईद एक ऐसा मौका है जहां देश में इन जैसे कई बच्चों के परिजनों को भी पोषक खाना मिल जाता है। लेकिन कुछ तथाकथित पशुप्रेमी इस पर आपत्ति जताते हैं।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर शांतापुराम यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके व एडिटर डॉ मोहिउद्दीन ग़ाज़ी ने हज़रत इब्राहीम (अ) के ज़रिए अपनी बीवी और छोटे से बच्चे को सूनसान पहाड़ो के बीच सेहरा में छोड़ना और रब का उसे गुलज़ार करना एक बेहतरीन निशानी बताया। उन्होंने क़ुर्बानी के जानवरों और विलुप्त होती जानवरों की प्रजातियों में तुलना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में क़ुर्बान होने वाले जानवरों की तादाद में कोई कमी नही आती है जबकि कई पशु प्रजातियां जो क़ुर्बान नहीं की जाती वो विलुप्त हो रही है।
कार्यक्रम में खासतौर पर शामिल होने आए मशहूर मेडिकल सर्जन डॉ फ़ारूक़ ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजको का शुक्रिया अदा किया और आगे भी इस तरह के जानकारी भरे कार्यक्रम आयोजित करने की दरख्वास्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ एस फ़ारूक़ ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी और अपनी कुछ पुरानी यादों को बयान करते हुए क़ुर्बानी के मक़सद को समझने की लोगों से अपील की और अपने शायराना अंदाज़ से एक बेहतर ज़िन्दगी के फलसफे को बयान कर इस महफ़िल को और भी खूबसूरत बना दिया।
कार्यक्रम का आग़ाज़ अब्दुल क़य्यूम अंसारी के क़ुरान की तिलावत से हुआ व संचालन सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट असलम अहमद ने किया। वहीं कार्यक्रम में शिरकत करने आये मेहमानों का शुक्रिया एडवोकेट रईस अहमद ने अदा किया। इस मौके पर संस्था के महासचिव अब्दुल रशीद, सीनियर जॉर्नलिस्ट मंसूर आगा, ज़ी न्यूज़ रिपोर्टर सय्यद मुबस्सिर, दिल्ली मुस्लिम मशावरत के अध्यक्ष डॉ इदरीस कुरैशी, महासचिव इक़बाल अहमद के साथ अन्य पदाधिकारी, एडवोकेट ज़ाहिद अख़्तर फलाही, एडवोकेट हुमैरा खान, आफरीन, फरहत, व ऐजाज़ गौरी के अलावा कई मशहूर शख्सियतों ने शिरकत की।
नई दिल्ली / ऑल इंडिया एजुकेशनल मूवमेंट (एआईईएम) ने दिल्ली में स्थित तस्मिया ऑडिटोरियम में ईद उल अज़हा पर एक कार्यक्रम का आयोजन किया । "ईद उल अज़हा-इतिहास, शिक्षायें व महत्व" के विषय पर आयोजित इस कार्यक्रम में विभिन्न विद्वानों की मौजूदगी में एआईईएम के सरपरस्त और हिमालय कंपनी के प्रमुख डॉ एस. फ़ारूक़ ने अध्यक्षता की। उद्धघाटन संबोधन एआईईएम के अध्यक्ष डॉ ख़्वाजा एम शाहिद ने किया तो वहीं एआईईएम के सचिव डॉ इल्यास सैफी ने मौजूद मेहमानों का स्वागत किया।
कार्यक्रम में एआईईएम के अध्य्क्ष डॉ ख्वाजा शाहिद ने पैग़म्बर इब्राहिम (अ) की ज़िंदगी को और उनकी क़ुर्बानी को समाज के लिए एक मिसाल बताया और कहा कि आज उन नैतिक शिक्षा व उसूलों की बहुत कमी देखी जा रही है। कार्यक्रम के मुख्य वक्ता और जामिया हमदर्द यूनिवर्सिटी-इस्लामिक विभाग के असिस्टेंट प्रोफेसर डॉ एस. एम. फजलुर्रहमान ने कहा कि क़ुर्बानी की रिवायत जैन व बोद्ध मज़हब के अलावा हर धर्म मे पाई जाती है और हम जानते हैं कि हमारे देश भारत में 5% बच्चे कुपोषण का शिकार है ये ईद एक ऐसा मौका है जहां देश में इन जैसे कई बच्चों के परिजनों को भी पोषक खाना मिल जाता है। लेकिन कुछ तथाकथित पशुप्रेमी इस पर आपत्ति जताते हैं।
इस कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के तौर पर शांतापुराम यूनिवर्सिटी में पढ़ा चुके व एडिटर डॉ मोहिउद्दीन ग़ाज़ी ने हज़रत इब्राहीम (अ) के ज़रिए अपनी बीवी और छोटे से बच्चे को सूनसान पहाड़ो के बीच सेहरा में छोड़ना और रब का उसे गुलज़ार करना एक बेहतरीन निशानी बताया। उन्होंने क़ुर्बानी के जानवरों और विलुप्त होती जानवरों की प्रजातियों में तुलना करते हुए कहा कि इतनी बड़ी संख्या में क़ुर्बान होने वाले जानवरों की तादाद में कोई कमी नही आती है जबकि कई पशु प्रजातियां जो क़ुर्बान नहीं की जाती वो विलुप्त हो रही है।
कार्यक्रम में खासतौर पर शामिल होने आए मशहूर मेडिकल सर्जन डॉ फ़ारूक़ ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए आयोजको का शुक्रिया अदा किया और आगे भी इस तरह के जानकारी भरे कार्यक्रम आयोजित करने की दरख्वास्त की। कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे डॉ एस फ़ारूक़ ने कार्यक्रम के आयोजन के लिए शुभकामनाएं दी और अपनी कुछ पुरानी यादों को बयान करते हुए क़ुर्बानी के मक़सद को समझने की लोगों से अपील की और अपने शायराना अंदाज़ से एक बेहतर ज़िन्दगी के फलसफे को बयान कर इस महफ़िल को और भी खूबसूरत बना दिया।
कार्यक्रम का आग़ाज़ अब्दुल क़य्यूम अंसारी के क़ुरान की तिलावत से हुआ व संचालन सुप्रीम कोर्ट के एडवोकेट असलम अहमद ने किया। वहीं कार्यक्रम में शिरकत करने आये मेहमानों का शुक्रिया एडवोकेट रईस अहमद ने अदा किया। इस मौके पर संस्था के महासचिव अब्दुल रशीद, सीनियर जॉर्नलिस्ट मंसूर आगा, ज़ी न्यूज़ रिपोर्टर सय्यद मुबस्सिर, दिल्ली मुस्लिम मशावरत के अध्यक्ष डॉ इदरीस कुरैशी, महासचिव इक़बाल अहमद के साथ अन्य पदाधिकारी, एडवोकेट ज़ाहिद अख़्तर फलाही, एडवोकेट हुमैरा खान, आफरीन, फरहत, व ऐजाज़ गौरी के अलावा कई मशहूर शख्सियतों ने शिरकत की।
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