पत्रकारिता विश्‍वविद्यालय ने खत्‍म किया तुर्किए के विश्‍वविद्यालय से एमओयू

० आशा पटेल ० 
जयपुर | हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्‍वविद्यालय (एचजेयू) ने अकादमिक आदान-प्रदान के लिए तुर्किए की अफ्योन कोकाटेपे यूनिवर्सिटी के साथ किए गए एमओयू को रद्द कर दिया है। यह करार एचजेयू और अफ्योन कोकाटेपे यूनिवर्सिटी तुर्किए के बीच 22 जून 2024 को हुआ था। सीमापार आतंकवाद और पहलगांव हमले के बाद टकराव में तुर्किए का पाकिस्‍तान को अंधसमर्थन से देश में गहरी नाराजगी और आक्रोश है। तुर्किए के भारत विरोधी रुख के कारण उसके बहिष्‍कार के रूप में जेएनयू सहित देश के कई प्रमुख विश्‍वविद्यालयों ने तुर्किग के अकादमिक संस्‍थानों से अपना संबंध तोड़ लिया है। 
भारतीय विश्‍वविद्यालय संघ ने भी देश के सभी विश्‍वविद्यालयों से इस तरह की अपील की थी।
हरिदेव जोशी पत्रकारिता और जनसंचार विश्‍वविद्यालय की कुलगुरु प्रो. सुधि राजीव ने कहा, ‘तुर्किए के भारत विरोधी रुख के कारण राष्‍ट्रीय सुरक्षा और संप्रभुता के लिए यह कदम उठाया जाना जरूरी था। हमने अफ्योन कोकाटेपे यूनिवर्सिटी तुर्किए को अवगत करवा दिया है कि 2024 को हुआ एमओयू तुरंत प्रभाव से निलंबित समझा जाए और समझौते के मुताबिक तीन महीने बाद यह एमओयू स्‍वत ही रद्द हो जाएगा।’

विश्‍वविद्यालय के समन्‍वयक, अकादमिक एवं प्रशासनिक डॉ. रतन सिंह शेखावत ने कहा, ‘एमओयू दोनों विश्‍वविद्यालयों के बीच अकादमिक आदान-प्रदान के लिए किया गया था। तुर्किए अंतर्राष्‍ट्रीय मंचों पर लगातार भारत विरोधी रुख अपनाता रहा है। पहलगांव हमले के भारत-पाक टकराव में पाकिस्‍तान का साथ देकर तुर्किए ने सभी सीमाएं पार कर दीं। ऐसे में तुर्किए के किसी भी संस्‍थान के साथ संबंध देशहित में उचित नहीं है।’

टिप्पणियाँ

इस ब्लॉग से लोकप्रिय पोस्ट

स्पेशल ओलंपिक्स यूनिफाइड बास्केटबॉल 3x3 वर्ल्ड कप भारत ने जीता ब्रॉन्ज मेडल

महामना मालवीय मिशन,जयपुर द्वारा मालवीय जयंती मनाई

कृष्ण चंद्र सहाय स्मृति समारोह : सवाई सिंह को सहाय स्मृति सम्मान

वरिष्ठ पत्रकार कानाराम कड़वा और कमलेश गोयल को पत्रकारों ने दी श्रद्धांजलि

डॉ. नरेन्द्र शर्मा ‘कुसुम’ कृत ‘खूब लड़ी मर्दानी’ अंग्रेजी रूपान्तरण का लोकार्पण

पुणे ग्रैंड टूर 2026 भारत की पहली अंतरराष्ट्रीय साइक्लिंग रोड रेस की शुरुआत

एमएनआईटी जयपुर एल्युमिनी एसोसिएशन ने किया गोल्डन जुबली व सिल्वर जुबली बैच के पूर्व छात्रों का सम्मान