वक्फ इस्लाम का अनिवार्य अंग है : एडवोकेट रईस अहमद

० संवाददाता द्वारा ० 
नयी दिल्ली : भारत के सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष बहस के दौरान कहा कि वक्फ का धर्मार्थ चरित्र है और इसका उपयोग धर्मनिरपेक्ष कल्याण उद्देश्यों के लिए होता है और यह इस्लाम का अनिवार्य अंग नहीं है, लेकिन हिंदू बंदोबस्ती का केवल धार्मिक चरित्र/उद्देश्य है। मैंने राष्ट्रीय टीवी समाचार चैनलों पर वक्फ मुद्दे पर टीवी बहस में भाग लिया और यह मुद्दा उठाया कि वक्फ इस्लाम का अनिवार्य अंग है और हम जानते हैं कि हिंदू बंदोबस्ती शैक्षणिक, चिकित्सा और अन्य संस्थान भी चलाती है, जो धर्मार्थ उद्देश्यों के लिए हैं।

 एसजी मेहता ने खुद को सही करते हुए सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उल्लेख किया कि अपनी दलीलों में उन्होंने अनजाने में उल्लेख किया था कि हिंदू बंदोबस्ती का केवल धार्मिक चरित्र है, उनका धर्मार्थ कल्याणकरी चरित्र भी है।  टीवी डिबेट में मैंने वे वैध मुद्दे उठाए और तुषार मेहता ने सर्वोच्च न्यायालय के समक्ष उन्हें स्वीकार किया और सही किया।

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