"जामुन का पेड़" नाटक प्रशासनिक व्यवस्था पर चोट

० आशा पटेल ० 
जयपुर। बरसो से ढोह रहे लचर प्रशासनिक व्यवस्थाओं की त्रासदी में एक आम आदमी किस तरह से पिस रहा है। इस पर करारा व्यंग्य प्रेस क्लब सभागार में मंचित नाटक ‘‘जामुन का पेड़‘‘ में देखने को मिला। भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ ने मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत की। प्रेस क्लब अध्यक्ष मुकेश मीणा एवं महासचिव मुकेश चौधरी, उपाध्यक्ष मोनिका शर्मा एवं मणिमाला शर्मा, ओमवीर भार्गव, ज्ञानेन्द्र मिश्रा, निखलेश शर्मा, दीपक सैनी, अनिता शर्मा, विकास आर्य ने मुख्य अतिथि भाजपा प्रदेशाध्यक्ष मदन राठौड़ का पुष्पगुच्छ एवं स्मृति चिन्ह देकर स्वागत किया।
मशहूर कहानीकार कृष्ण चन्दर की कालजयी कहानी" जामुन का पेड़" का नाटय रूपान्तरण नीरज गोस्वामी ने किया। कथासार जामुन के पेड़ तले दबे एक आदमी को निकालने के लिए कितनी प्रशासनिक बाधाएं पैदा हो रही है और यही हमारे सरकारी प्रशासनिक तंत्र की त्रासदी भी है, जिसे आज भी एक सामान्य नागरिक भोग रहा है। नाटक में सरकारी मशीनरी के क्रियाकलापों पर गहरी चोट की गई।सरकारी फाइलों में ही समस्याओं का समाधान ढूढ़ा जा रहा है।

नाटक का निर्देशन गुरविन्द्र सिंह पुरी रोमी ने किया। नाटक में वरिष्ठ रंगकर्मी नीरज गोस्वामी, ईश्वरदत्त माथुर, राजेन्द्र शर्मा ‘‘राजू‘‘, मोइनुदीन खां, राकेश माथुर, मनोज स्वामी, अशोक माहेश्वरी, लोकेश कुमार साहिल, धनराज दाधिच, दीपक कथुरिया, राहुल मीणा ने अपने किरदारों को बखूबी रोचक ढंग से निभाया। नाटक में संगीत गुलजार हुसैन, मंच एवं म्यूजिक अनिल मारवाड़ी, अंकित शर्मा नोनू एवं रेणु सनाढ़्य की रही।

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