श्रीदेव सुमन के बलिदान को याद करने के लिए श्रद्धांजलि सभा का आयोजन

० योगेश भट्ट ० 
नयी दिल्ली : श्रीदेव सुमन टिहरी रियासत की राजशाही के विरुद्ध विद्रोह कर बलिदान देने वाले भारत के अमर स्वतंत्रता सेनानी थे। श्रीदेव सुमन का जन्म टिहरी गढ़वाल जिले की बमुण्ड पट्टी के ग्राम जौल में हुआ था। इनके पिता का नाम हरिराम बड़ोनी और माता का नाम तारा देवी था। श्री देव सुमन, जिन्हें श्री दत्त बडोनी के नाम से भी जाना जाता है, एक स्वतंत्रता सेनानी, राजशाही विरोधी सामाजिक कार्यकर्ता और लेखक के रूप ,ें लोकप्रिय थे। 
उनका जन्म 25 मई 1915 को टिहरी गढ़वाल रियासत में हुआ था और 25 जुलाई 1944 को उनकी मृत्यु हो गई. दिल्ली के गढ़वाल भवन में  श्रीदेब सुमन ट्रस्ट द्वारा श्री देव सुमन की याद में एक श्रद्धांजलि सभी का आयोजन किया गया।  इस श्रद्धांजलि सभी में दिल्ली ,उत्तराखंड के लोगों ने श्री देव सुमन के जीवन,उनके सामाजिक आंदोलन और एक लेखक के रूप में उनके योगदान को याद किया साथ उन्हें भावभीनी श्रद्धांजलि भी दी।  इस अवसर पर अनेक सांस्कृतिक कार्यक्रम भी आयोजित किये गए। 
श्री देव सुमन टिहरी गढ़वाल रियासत में राजशाही के खिलाफ आवाज उठाने और लोगों को राजशाही से मुक्ति दिलाने के लिए लगातार संघर्ष करते रहे  एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में लोगों के अधिकारों और भलाई के लिए काम किया. उन्होंने कई पुस्तकें और लेख लिखे, जिनमें राजशाही के खिलाफ आवाज और स्वतंत्रता के लिए उनकी लड़ाई शामिल थी.श्री देव सुमन ने 84 दिनों तक भूख हड़ताल की, जो उनकी मृत्यु तक जारी रही. उनकी मृत्यु 25 जुलाई 1944 को हुई, श्री देव सुमन को टिहरी के लोगों का काफी समर्थन प्राप्त था ,श्रीदेव सुमन के बलिदान को याद करने के लिए हर साल 25 जुलाई को "सुमन दिवस" मनाया जाता है.
श्रीदेब सुमन ट्रस्ट रजि आयोजक श्रद्धांजलि सभा में गढ़वाल हितेषिणी सभा अध्यक्ष सूरत सिंह रावत सहित सभा के पदाधिकारूण व सदस्य. हाई हिलर्स गुर्प के कलाकार साथी.टिहरी उत्तरकाशी संगठनों से जुडे पदाधिकारी . श्रीदेव सुमन ट्रस्ट रजि.ट्रस्ट के अध्यक्ष व मुख्य ट्रस्टी धनीराम अंथवाल ने इस अवसर पर कहा कि जो सम्मान अमर बलिदानी श्रीदेव सुमन को मिलना चाहिए था वह आज तक किसी भी सरकार से नही मिला । राजशाही के खिलाफ 84 दिनों की भूख हड़ताल विश्व इतिहास में मायने रखती है ।श्रीदेव सुमन ट्रस्ट प्रतिवर्ष उनकी स्मृति में उत्तराखण्ड के ग्रामीण छेत्रों के निर्धन बिद्यार्थियों को पाठ्य सामग्री. स्कॉलरशिप. मेडीकल कैम्प की सुबिधा के साथ आपदा स्थिति में सहयोग करती है पिछले 15 वर्षों से ।
कार्यक्रम संयोजिका मनोरमा भट्ट तिवारी व उनकी टीम ने अपनी प्रस्तुतियां देकर श्रीदेव सुमन के बलिदान को याद किया । कार्यक्रम संयोजक महादेव प्रसाद बलोनी ने इस एतिहासिक दिवस की महत्ता के बारे में बतलाया कि आख़िर क्यों इस दिवस को मनाता है ट्रस्ट .गढवाली कुमावनी जौनसारी भाषा के सतत बिकस में लगे ध्यानी सहित समाज के कई गणमान्यौं ने इस अवसर पर श्रीदेव सुमन को पुष्पांजलि अर्पित कर उनकी शहादत को याद किया ।

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