वेव्स : संस्कृति,रचनात्मकता और सार्वभौमिक संपर्क की एक लहर है : प्रधानमंत्री मोदी

० आनद चौधरी ० 
मुंबई : प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने मुंबई के जियो वर्ल्ड सेंटर में भारत के अपनी तरह के पहले विश्व दृश्य-श्रव्य और मनोरंजन शिखर सम्मेलन, वेव्स-2025 का उद्घाटन किया। रचनात्मक उद्योग से जुड़े अंतरराष्ट्रीय गणमान्य व्यक्तियों, राजदूतों और प्रमुखों की उपस्थिति में प्रधानमंत्री ने इस आयोजन के महत्व का उल्लेख करते हुए इस बात पर जोर दिया कि सौ से अधिक देशों के कलाकार, नवोन्मेषक, निवेशक और नीति निर्माता प्रतिभा और रचनात्मकता के वैश्विक इकोसिस्टम की आधारशिला रखने के लिए एक साथ एक मंच पर आए हैं।  उन्होंने कहा कि वेव्स केवल एक संक्षिप्त नाम नहीं है, बल्कि संस्कृति, रचनात्मकता और सार्वभौमिक संपर्क का प्रतिनिधित्व करने वाली एक लहर है। प्रधानमंत्री ने कहा कि यह शिखर सम्मेलन फिल्मों, संगीत, गेमिंग, एनीमेशन और कहानी कहने की विशाल दुनिया को प्रदर्शित करने के साथ-साथ कलाकारों और रचनाकारों को जुड़ने और सहयोग करने के लिए एक वैश्विक मंच प्रदान करता है।
मोदी ने वेव्स शिखर सम्मेलन के सफलता की प्रशंसा करते हुए कहा कि अपने पहले ही क्षण से इस आयोजन ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है और यह "उद्देश्य से परिपूर्ण है।" उन्होंने शिखर सम्मेलन के सलाहकार बोर्ड के समर्पण और प्रयासों की सराहना की और रचनात्मक उद्योग में वेव्स को एक ऐतिहासिक आयोजन बनाने में उनकी भूमिका पर जोर दिया। उन्होंने व्यापक स्तर पर आयोजित क्रिएटर्स चैलेंज और क्रिएटोस्फीयर पहल का भी उल्लेख किया, जिसमें 60 देशों के लगभग 1 लाख रचनात्मक पेशेवरों ने भाग लिया। 
उन्होंने कहा कि 32 चुनौतियों में से 8 सौ फाइनलिस्ट चुने गए हैं, उनकी प्रतिभा को पहचाना गया है और उनकी इस उपलब्धि पर उन्हें बधाई दी गई है। प्रधानमंत्री ने फाइनल प्रतिभागियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि अब उनके पास वैश्विक रचनात्मक मंच पर अपनी पहचान बनाने का अवसर है। प्रधानमंत्री ने वेव्स शिखर सम्मेलन के दौरान भारत मंडप में प्रदर्शित रचनात्मक विकास के प्रति उत्साह व्यक्त करते हुए कहा कि महत्वपूर्ण नवाचार हासिल किए गए हैं और वे इन कृतियों को प्रत्यक्ष रूप से देखने के उत्सुक हैं। नए रचनाकारों को प्रोत्साहित करने और उन्हें उभरते बाजारों से जोड़ने की इसकी क्षमता को देखते हुए वेव्स बाज़ार पहल की भी जानकारी दी।

 उन्होंने कला उद्योग में खरीदारों और विक्रेताओं को जोड़ने की अवधारणा की प्रशंसा करते हुए कहा कि इस तरह की पहल रचनात्मक अर्थव्यवस्था को मजबूत करती है और कलाकारों के लिए नए अवसर प्रदान करती है। भारत की तीव्र आर्थिक प्रगति का उल्लेख करते हुए, प्रधानमंत्री ने कहा कि देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनने के मार्ग पर है। भारत वैश्विक फिनटेक अपनाने में नंबर एक स्थान रखता है, दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता है और दुनिया भर में तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम है। उन्होंने कहा कि विकसित राष्ट्र बनने की दिशा में भारत की यात्रा अभी शुरू ही हुई है और इसके पास देने के लिए बहुत कुछ है।

 उन्होंने कहा कि भारत न केवल एक अरब से अधिक आबादी का घर है, बल्कि एक अरब से अधिक कहानियों का भी घर है। देश के समृद्ध कलात्मक इतिहास का संदर्भ देते हुए उन्होंने याद दिलाया कि दो हज़ार साल पहले, भरत मुनि के नाट्य शास्त्र ने भावनाओं और मानवीय अनुभवों को आकार देने में कला की शक्ति पर बल दिया था। उन्होंने कहा कि सदियों पहले, कालिदास के अभिज्ञान-शाकुंतलम ने शास्त्रीय नाटक में एक नई दिशा प्रस्तुत की।

प्रधानमंत्री ने लोगों के पद्म पुरस्कारों और वेव्स शिखर सम्मेलन के पीछे के दृष्टिकोण के बीच समानताएं बताते हुए कहा कि दोनों पहलों का उद्देश्य भारत के हर कोने से प्रतिभा को पहचानना और उनका उत्थान करना है। उन्होंने कहा कि पद्म पुरस्कार स्वतंत्रता के कुछ वर्ष बाद शुरू हुए थे, लेकिन जब भारत ने दूरदराज के क्षेत्रों से राष्ट्र की सेवा करने वाले व्यक्तियों को मान्यता देते हुए लोगों के पद्म को अपनाया, तो वे वास्तव में बदल गए। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस बदलाव ने पुरस्कारों को एक समारोह से राष्ट्रीय उत्सव में बदल दिया। वेव्स फिल्मों, संगीत, एनीमेशन और गेमिंग में भारत की अपार रचनात्मक प्रतिभा के लिए एक वैश्विक मंच के रूप में कार्य करेगा, जिससे यह सुनिश्चित होगा कि देश के हर हिस्से के कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय मंच पर पहचान मिले।

प्रधानमंत्री ने कहा कि यह भारत में ऑरेंज इकोनॉमी के उदय का समय है, विषय, रचनात्मकता और संस्कृति– ऑरेंज इकोनॉमी के तीन स्तंभ हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय फिल्में अब 100 से अधिक देशों के दर्शकों तक पहुंच चुकी हैं और अंतर्राष्ट्रीय दर्शक सामान्य प्रशंसा से परे जाते हुए भारतीय सिनेमा को समझने की कोशिश कर रहे हैं। उन्होंने उपशीर्षक के साथ भारतीय सामग्री देखने वाले अंतर्राष्ट्रीय दर्शकों की बढ़ती प्रवृत्ति का भी उल्लेख किया, जो भारत की कहानियों के साथ गहरे जुड़ाव का संकेत देता है। भारत का ओटीटी उद्योग हाल के वर्षों में दस गुना वृद्धि का साक्षी बना है।

 उन्होंने कहा कि स्क्रीन का आकार भले ही छोटा हो रहा हो, लेकिन सामग्री का दायरा असीमित है, जिसमें माइक्रो स्क्रीन बड़े संदेश दे रही हैं। उन्होंने कहा कि भारतीय व्यंजन वैश्विक पसंदीदा बन रहे हैं और विश्वास व्यक्त किया कि भारतीय संगीत जल्द ही दुनिया भर में इसी तरह की पहचान हासिल करेगा। भारत की रचनात्मक अर्थव्यवस्था की अपार संभावनाओं पर बल देते हुए, उन्होंने कहा कि भारत फिल्म निर्माण, डिजिटल सामग्री, गेमिंग, फैशन और संगीत के लिए एक वैश्विक केंद्र के रूप में उभर रहा है। उन्होंने लाइव कॉन्सर्ट उद्योग में आशाजनक विकास के अवसरों और वैश्विक एनीमेशन बाजार में अपार संभावनाओं का उल्लेख किया जो वर्तमान में 430 बिलियन डॉलर से अधिक है और अगले दशक में दोगुना होने का अनुमान है। यह भारत के एनीमेशन और ग्राफिक्स उद्योग के लिए एक महत्वपूर्ण अवसर प्रस्तुत करता है। उन्होंने हितधारकों से इस विस्तार का लाभ उठाकर अधिक अंतर्राष्ट्रीय पहुंच बनाने का आग्रह किया। 

भारत के युवा रचनाकारों से देश की ऑरेंज इकोनॉमी को आगे बढ़ाने का आह्वान करने के साथ यह स्वीकार करते हुए कि उनका जुनून और कड़ी मेहनत रचनात्मकता की एक नई लहर को आकार दे रहा है। चाहे वे गुवाहाटी के संगीतकार हों, कोच्चि के पॉडकास्टर हों, बेंगलुरु के गेम डिजाइनर हों या पंजाब के फिल्म निर्माता हों, उनका योगदान भारत के बढ़ते रचनात्मक क्षेत्र को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने आश्वासन दिया कि सरकार रचनात्मक पेशेवरों के पीछे मजबूती से खड़ी है, उन्हें स्किल इंडिया, स्टार्टअप सपोर्ट, एवीजीसी इंडस्ट्री के लिए नीतियों और वेव्स जैसे वैश्विक प्लेटफार्मों जैसी पहलों के माध्यम से समर्थन दे रही है। 

ऐसा माहौल बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जा रहा है जहां नवाचार और कल्पना को महत्व दिया जाता है, नए सपनों को बढ़ावा दिया जाता है और व्यक्तियों को उन सपनों को जीवन में लाने के लिए सशक्त बनाया जाता है। उन्होंने युवा रचनाकारों से इस अवसर का अधिकतम लाभ उठाने, बड़े सपने देखने और अपने सपनों को साकार करने के लिए अपने प्रयासों को समर्पित करने का आग्रह किया। 
प्रधानमंत्री ने भारत के कंटेंट क्रिएटर्स पर अपना अटूट विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि उनकी मुक्त प्रवाह वाली रचनात्मकता वैश्विक रचनात्मक परिदृश्य को फिर से परिभाषित कर रही है। भारत के रचनाकारों की युवा भावना किसी भी बाधा, सीमा या झिझक को नहीं जानती,

 जिससे नवाचार को पनपने का मौका मिलता है। भारत की विशाल युवा आबादी रील, पॉडकास्ट और गेम से लेकर एनिमेशन, स्टैंड-अप और एआर-वीआर फॉर्मेट तक नए रचनात्मक आयामों को आगे बढ़ा रही है। प्रधानमंत्री ने जोर देकर कहा कि वेव्स एक ऐसा मंच है जिसे विशेष रूप से इसी पीढ़ी के लिए डिज़ाइन किया गया है- जो युवा सोच को अपनी ऊर्जा और दक्षता के साथ रचनात्मक क्रांति को फिर से कल्पित करने और फिर से परिभाषित करने में सक्षम बनाता है। इस कार्यक्रम में महाराष्ट्र के राज्यपाल सी.पी. राधाकृष्णन, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेन्द्र फडणवीस, केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव, डॉ. एल. मुरुगन, सहित देश विदेश के तमाम फिल्म, मनोरंजन, एवं उद्योग जगत के व्यक्ति उपस्थित थे। 

 इस कार्यक्रम वेव्स 2025 में 90 से ज़्यादा देशों के लोग हिस्सा लेंगे, जिसमें 10,000 से ज़्यादा प्रतिनिधि, 1,000 क्रिएटर, 300 से ज़्यादा कंपनियां और 350 से ज़्यादा स्टार्टअप शामिल होंगे। इस शिखर सम्मेलन में 42 पूर्ण सत्र, 39 ब्रेकआउट सत्र और 32 मास्टरक्लास होंगी, जो प्रसारण, इन्फोटेनमेंट,एवीजीसी-एक्सआर, फ़िल्म और डिजिटल मीडिया सहित विभिन्न क्षेत्रों में आयोजित किए जाएंगे।

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