डॉ.रमेश गांधी ने WHO कंबोडिया में तंबाकू नियंत्रण पर की चर्चा

० आशा पटेल ० 
जयपुर | डब्लूएचओ सीएसओ आयोग सदस्य डॉ. रमेश गांधी ने डब्लूएचओ कंबोडिया की एनसीडी प्रमुख से की मुलाकात, सामुदायिक भागीदारी और तंबाकू नियंत्रण पर हुई गंभीर चर्चा | विश्व स्वास्थ्य संगठन की सिविल सोसाइटी आयोग की "संचार एवं नागरिक समाज की भागीदारी" कार्यसमूह के सदस्य डॉ. रमेश गांधी ने  डब्लूएचओ कंबोडिया कंट्री ऑफिस में डॉ. एडा मोआदसिरी से एक बैठक की। डॉ. मोआदसिरी कंबोडिया में गैर संचारी रोगों और लाइफलॉन्ग स्वास्थ्य की टीम लीड हैं।
डॉ रमेश गाँधी ने बताया कि इस बैठक का उद्देश्य मानसिक स्वास्थ्य, जलवायु परिवर्तन और तंबाकू नियंत्रण जैसे महत्वपूर्ण सार्वजनिक स्वास्थ्य क्षेत्रों में सामुदायिक भागीदारी और संचार रणनीतियों को सशक्त बनाना था। डॉ. मोआदसिरी ने कंबोडिया फ्नोम पेन्ह में चल रही स्वास्थ्य पहलों और स्वस्थ समुदायों के निर्माण में आ रही चुनौतियों को साझा किया। डॉ गाँधी ने बताया बैठक में चर्चा के प्रमुख मुद्दे रहे :-मानसिक स्वास्थ्य और जलवायु परिवर्तन जैसे विषयों पर स्वास्थ्य कार्यक्रमों में सामुदायिक भागीदारी।,जनजागरूकता के लिए प्रभावशाली संचार सामग्री एवं रणनीतियों का विकास और प्रचार-प्रसार।,

कंबोडिया में तंबाकू नियंत्रण रणनीतियाँ, जिनमें शामिल हैं: -तंबाकू मुक्त शैक्षणिक संस्थान, तंबाकू मुक्त कार्यस्थल, राष्ट्रीय तंबाकू क्विट लाइन सेवा की स्थिति, तंबाकू निवारण केंद्रों की स्थापना और पहुँच| डॉ. गांधी ने जमीनी स्तर पर डब्लूएचओ कंबोडिया की भागीदारी की सराहना की और नागरिक समाज और डब्लूएचओ के बीच आपसी सहयोग और ज्ञान के आदान-प्रदान को बढ़ाने में रुचि व्यक्त की। भारत और कंबोडिया तंबाकू नियंत्रण में तुलना करते हुए डॉ गाँधी ने बताया कि कंबोडिया में जुर्माना भारत से दोगुना से भी अधिक है | सार्वजनिक स्थलों पर धूम्रपान करने पर कंबोडिया में 5 डॉलर (लगभग रु 431) का जुर्माना है, जबकि भारत में कोटपा अधिनियम के तहत मात्र रु 200 का जुर्माना लगाया जाता है।

डॉ गाँधी ने बताया कि कंबोडिया में गुटखा, खैनी, पान मसाला नहीं मिलता और कंबोडिया में गुटखा, खैनी या पान मसाले का कोई ब्रांड उपलब्ध नहीं है, जबकि भारत में ग्लोबल एडल्ट टुबेको सर्वे -2 (2016-17) के अनुसार 21.4% युवा बिना धुएं वाले तंबाकू का सेवन करते हैं। डॉ. गांधी ने बताया कि इस यात्रा का प्रमुख उद्देश्य दक्षिण-पूर्व एशिया क्षेत्र में व्यापक सहभागिता का हिस्सा बनना है, जिसका उद्देश्य सामुदायिक रणनीतियों के माध्यम से एनसीडी और स्वास्थ्य प्रोत्साहन एजेंडे को स्थानीय एवं राष्ट्रीय स्तर पर समझना और समर्थन करना है।

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