राजस्थान के ग्रामीण पिछड़ेपन का मूल कारण प्रशासनिक उपेक्षा : रणबीर सिंह सोलंकी

० योगेश भट्ट ० 
रेणी/अलवर : राष्ट्रीय युवा चेतना मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष रणबीर सिंह सोलंकी ने कहा कि राजस्थान के गांवों की बदहाली और पिछड़ेपन का प्रमुख कारण प्रशासनिक उपेक्षा है। उन्होंने ग्राम पाड़ली एवं आस-पास के क्षेत्रों के दौरे के बाद सोलंकी ने कहा कि ग्राम पाड़ली समेत पूरा क्षेत्र आज भी पेयजल, बिजली, सड़क, स्वास्थ्य, शिक्षा और जल निकासी जैसी मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। वर्षों पूर्व सड़कों पर महज़ मलबा डाला गया था, जो अब पूरी तरह से जर्जर हो चुका है। बिजली के खंभों की अनुपयुक्त दूरी के कारण तार झूलते हैं, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका बनी रहती है।

उन्होंने बताया कि गांव में पेयजल की स्थिति अत्यंत गंभीर है। एकमात्र बोरिंग से पानी टंकी में आता है, जहां से ग्रामीणों को मैन्युअली पानी लाना पड़ता है। बिजली की अनियमित आपूर्ति के चलते कई बार जल आपूर्ति दिनो-दिन तक बंद रहती है, जिससे लोग पीने के पानी के लिए परेशान रहते हैं। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि क्षेत्र के लिए प्रस्तावित पेयजल योजना को तत्काल प्रभाव से लागू कर हर घर तक पाइपलाइन से स्वच्छ जल की व्यवस्था की जाए।

सोलंकी ने बताया कि पाड़ली गांव, जो नांगल गांव से सटा हुआ है और रेणी तहसील से महज़ 2–3 किमी दूरी पर स्थित है, आज भी ग्रामीण प्रशासन के अधीन है। जबकि नांगल गांव पहले ही नगर पालिका क्षेत्र में शामिल किया जा चुका है। उन्होंने पाड़ली को भी नगरपालिका में सम्मिलित करने की मांग की, जिससे विकास योजनाओं का लाभ सीधे ग्रामीणों तक पहुंचे। सोलंकी ने कहा कि दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे के निर्माण और क्षेत्र में सैन्य छावनी (कैंट एरिया) की उपस्थिति के कारण यह क्षेत्र सामाजिक, आर्थिक और सामरिक दृष्टि से अत्यधिक संभावनाशील बन चुका है। यदि एक्सप्रेसवे के दोनों ओर साइड रोड का निर्माण हो, तो यह क्षेत्र एक नया विकास केंद्र बन सकता है।

सोलंकी ने जानकारी दी कि वे पूर्व में इस विषय पर माननीय मुख्यमंत्री को पत्र लिखकर विकास कार्यों के शीघ्र निष्पादन की मांग कर चुके हैं। हाल ही में टहटड़ा गांव (तहसील रेणी) में आयोजित प्रशासनिक शिविर के दौरान उन्होंने कैंप प्रभारी एवं तहसीलदार श्री कैलाश चंद्र मेहरा को लिखित ज्ञापन सौंपा। कैंप प्रभारी ने ज्ञापन को गंभीरता से लेते हुए संबंधित अधिकारियों को आवश्यक निर्देश जारी किए। सोलंकी ने बताया कि क्षेत्र में बिजली की अनुपलब्धता सबसे बड़ी विकास बाधा बन चुकी है। बिजली न होने के कारण कंप्यूटर आधारित सेवाएं बंद पड़ी हैं, जिससे युवाओं को डिजिटल सुविधाओं, शिक्षा एवं रोजगार से वंचित रहना पड़ता है।

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